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वीरान रेगिस्तान में मिला विशालकाय कछुए का जीवाश्म, यह आकार में एक कार के बराबर
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Thu, 13 Feb 2020 01:22 PM IST
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विशालकाय कछुए का जीवाश्म मिला
- फोटो : University of Zurich/Edwin Cadena
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धरती पर कभी डायनासोर जैसे विशालकाय जीव-जंतु रहा करते थे, ये तो हम सभी जानते हैं और समय-समय पर कई जगहों से उनके जीवाश्म भी मिलते रहते हैं। एक ऐसा ही जीवाश्म दक्षिण अमेरिका के कोलंबिया के ताताकोआ रेगिस्तान में मिला है। यह जीवाश्म एक विशालकाय कछुए का है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह आकार में एक कार के बराबर है। अब आप समझ सकते हैं कि यह कितना बड़ा होगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों की मानें तो इस विशालकाय कछुए की लंबाई 13 फीट और वजन करीब 2.5 टन रहा होगा। दावा किया जा रहा है कि ऐसे कछुए उत्तर-दक्षिण अमेरिका में 1.3 करोड़ साल पहले पाए जाते थे। वैज्ञानिकों ने कछुए के जीवाश्म को स्टुपेंडेमी जिग्राफीकस नाम दिया है। यह दक्षिण अमेरिका के कोलंबिया के ताताकोआ रेगिस्तान और वेनेजुएला के उरूमाको क्षेत्र में मिला है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
आमतौर पर कछुओं के सींग नहीं होते, लेकिन बताया जा रहा है कि नर स्टुपेंडेमी कछुए के कवच के दोनों ओर सामने की तरफ सींग होते थे, जिसका इस्तेमाल वो शायद दूसरे जीवों से अपने क्षेत्र की सुरक्षा या मादा कछुए के लिए लड़ाई के तौर पर किया करते थे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
इस हैरान करने वाले शोध को जर्नल साइंस में प्रकाशित किया गया है। बोगोटा के जीवाश्म विज्ञानी एडविन कैडेना के नेतृत्व में यह शोध हुआ। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब इतने बड़े कछुए का जीवाश्म मिला हो। इससे पहले साल 1970 में भी स्टुपेंडेमी कछुए का जीवाश्म मिला था, लेकिन उस समय इसके बारे में कई सारी चीजें नहीं पता चल सकी थीं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों के मुताबिक, सीगोइंग आर्कीलोन धरती पर सबसे बड़े कछुए के तौर पर विख्यात है। इसके बाद स्टुपेंडेमी ऐसा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा कछुआ माना जाता है। सीगोइंग आर्कीलोन डायनासोर युग के अंत के समय यानी करीब 7 करोड़ साल पहले धरती पर रहते थे। इनकी लंबाई 4.6 मीटर हुआ करती थी।
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