आखिर नए राज्यपाल की जाति को लेकर नीतीश इतने परेशान क्यों?
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बिहार के नए राज्यपाल राम कोविंद की नियुक्ति को लेकर केन्द्र और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच लड़ाई और तीखी होती जा रही है। अभी तक राज्यपाल की नियुक्ति पर सलाह न करने को लेकर आपत्ति कर रहे नीतीश कुमार ने अब उनकी जाति को लेकर भी केन्द्र सरकार पर वार करना शुरू कर दिया है।
हालांकि दिल्ली पहुंचे सीएम नीतीश कुमार ने मीडिया से बात करते हुए राज्यपाल की जाति को लेकर भाजपा पर ही आरोप मढ़ दिए। उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं बीजेपी के लोग जो गर्वनर आए हैं उनको दलित आदि चीजों से जोड़कर देख रहे हैं। उनकी जाति की पहचान बता रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि हर चीज को ये जाति के नजरिए से देखना चाहते हैं। कहा जो बिहार का राज्यपाल है वो बिहार का राज्यपाल है किसी पार्टी का नेता नहीं। हालांकि वह यह कहने से भी नहीं चूके कि केन्द्र ने बिहार में राज्यपाल की नियुक्ति से पहले परंपरा का निर्वाह नहीं किया।
न ही इसमें राज्य सरकार से बात की गई न मुख्यमंत्री से। अब सवाल ये है कि बिहार में नए राज्यपाल की नियुक्ति से पहले ही विवाद शुरू क्यों हो गया है।
ये है विवाद की जड़
असल में केन्द्र सरकार ने बिहार में दो दिन पहले यूपी के बड़े भाजपा नेता रामनाथ कोविंद को राज्यपाल नियुक्त किया है। बिहार में काफी समय से पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ही अतिरिक्त प्रभार संभाले हुए थे।
वहीं इसके बाद से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पारा चढ़ा हुआ है। उन्होंने केन्द्र पर राज्यपाल की नियुक्ति में राज्य सरकार से सलाह न करने का आरोप लगाया है। नीतीश इस मुद्दे पर लगातार भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साध रहे हैं।
वहीं, 69 वर्षीय रामनाथ कोविंद दो बार 1994 और 2006 में राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। वे उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं। असल में रामनाथ कोविंद दलित जाति से आते हैं और उन्हें दलितों का बड़ा नेता माना जाता है।
वह भाजपा दलित मोर्चा और अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। ऐसे में यह भी माना जा रहा है कि बिहार में उनकी नियुक्ति दलित जातियों में भाजपा की पैंठ बनाने के लिए हुई है। जिनका बिहार की राजनीति में अच्छा खासा दखल है।
शायद, इस बात का एहसास मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी है इसलिए उन्होंने अभी से इसे भाजपा की चाल बताना शुरू कर दिया है।