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Hindi News ›   Bihar ›   Bihar Election 2020: Why Did Former Dgp Gupteshwar Pandey Not Get Ticket From Jdu In Bihar Election, Know Here

Bihar Assembly Election 2020: आखिरी दौर में यूं साफ हुआ गुप्तेश्वर पांडे का पत्ता बिहार के रण में महाराष्ट्र भी

Fri, 09 Oct 2020 04:16 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना/ नई दिल्ली/ मुंबई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना/ नई दिल्ली/ मुंबई। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 09 Oct 2020 04:16 PM IST
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Bihar Election 2020: Why Did Former Dgp Gupteshwar Pandey Not Get Ticket From Jdu In Bihar Election, Know Here
गुप्तेश्वर पांडे, डीजीपी (बिहार ) - फोटो : एएनआई

Bihar Election Date 2020: कभी अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाने की तैयारी कर चुकी भाजपा और जदयू अब इस मुद्दे से दूरी बनाने में जुट गई है।

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आत्महत्या साबित होने और प्रवर्तन निदेशालय के साथ एनसीबी की जांच में कुछ खास हाथ न लगने के कारण दोनों दल अब इस मुद्दे को तूल नहीं देना चाहते। राज्य के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे से दोनों दलों की बनाई गई दूरी की एक बड़ी मजबूरी यह भी रही।
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बक्सर सीट पर विराम
एक समय में इस मामले को देशव्यापी चर्चा में लाने वाले राज्य के तत्कालीन डीजीपी पांडे को दोनों दल डोरे डाल रहे थे। इस मामले में लगातार मुखर भूमिका निभाने वाले पांडे ने तब भाजपा की जगह जदयू को वरीयता दी।
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जदयू से आश्वासन के बाद ही उन्होंने अपने करियर में दूसरी बार नौकरी से इस्तीफा दिया। जब जदयू ने उन्हें उम्मीदवारों की सूची मेंं जगह नहीं दी तो चर्चा थी कि भाजपा उन्हें बक्सर से चुनाव मैदान में उतारेगी मगर भाजपा ने इस सीट से परशुराम चतुर्वेदी को मैदान में उतार कर चर्चाओं पर विराम लगा दिया।

सुशांत की हत्या की थ्योरी औंधे मुंह गिरी
दरअसल सुशांत की हत्या की थ्योरी औंधे मुंह गिर गई। एम्स के फोरेंसिक विशेषज्ञों ने इसे आत्महत्या माना। इसके बाद से ही पूरा मामला पलटा गया। एक समय ऐसा था जब पूरे बिहार में इस घटना के कारण उबाल था। अब बदली परिस्थितियों में एक बड़ा वर्ग हताश है। सोशल मीडिया में सरकार पर मामले को दबाने के आरोप लग रहे हैं।

भाजपा-जदयू को डर है कि ऐसी परिस्थिति में पूर्व डीजीपी को टिकट देने पर यह मामला तूल पकड़ेगा। खासतौर से विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना लेगा, वह भी तब जब शिवसेना भी मैदान बिहार के मैदान में खम ठोकने जा रही है।

पांडे को दूसरी बार झटका
अपने करियर के दौरान पूर्व डीजीपी को दूसरी बार सियासी झटका लगा। पहले भाजपा से तो अब जदयू से। साल 2009 में भाजपा से लोकसभा के टिकट का आश्वासन मिलने के बाद पांडे ने अचानक वीआरएस ले लिया था। तब बक्सर लोकसभा सीट से उन्हें उम्मीदवार बनाने की चर्चा थी मगर भाजपा ने इस सीट से अश्विनी चौबे को उम्मीदवार बना दिया।

हालांकि राजनीतिक पहुंच के बल पर उन्होंने दोबारा नौकरी हासिल कर ली और राज्य में पुलिस का मुखिया बनाए गए। इसके 11 साल बाद अब पांडे का बक्सर से जदयू के टिकट से विधानसभा चुनाव लडऩे का सपना टूट गया।

जदयू सत्ता में आई तो बचा है विकल्प
बहरहाल पूर्व डीजीपी का राजनीतिक भविष्य जदयू के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। अगर जदयू की सत्ता में वापसी हुई तो पार्टी उन्हें राज्यपाल कोटे से विधान परिषद भेज सकती है। चुनाव बाद राज्यपाल को ऐसी 12 सीटों पर मनोनयन करना है। इसके अलावा अगले साल राज्यसभा चुनाव भी है। अगर जदयू की सत्ता में वापसी हुई तो उन्हें राज्यसभा भी भेजा जा सकता है।

अब नहीं लड़ेंगे चुनावः गुप्तेश्वर  
जदयू से टिकट कटने के बाद पांडे ने सधे राजनीतिज्ञ की तरह कहा, नीतीश कुमार किसी को ठगते नहीं हैं। अब मैं चुनाव नहीं लडूंगा। समीकरण नहीं बैठे। नीतीशजी जो कहेंगे, सो करेंगे। पूर्व डीजीपी पांडे के चेहरे पर टिकट नहीं मिलने का मलाल साफ दिख रहा है। पांडे ने खुद को जदयू का सच्चा सिपाही बताया।

पहले पांडे ने कहा था कि वह बिहार की किसी भी सीट से चुनाव जीत सकते हैं। अब चुनाव लड़ने का इरादा त्यागना पड़ा है। देखना है कि भविष्य में पिछले दरवाजे से सियासी कुर्सी मिलती है या इस बार भी निराशा हाथ लगेगी।

इसीलिए कटा पांडेय का टिकटः  देशमुख
महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने पांडे पर कटाक्ष किया कि मैने भाजपा नेता (देवेंद्र फडणवीस) से सवाल किया था कि क्या महाराष्ट्र को बदनाम करने वाले पांडे का चुनाव प्रचार करेंगे। हालांकि टिकट देना या न देना उस पार्टी का मामला है लेकिन संभवतः मेरे इसी सवाल पर पांडे का टिकट कट गया हो।


पांडे को सबक सिखाने का शिवसेना का प्लान फेल
शिवसेना ने बिहार के पूर्व डीजीपी पांडे के खिलाफ उम्मीदवार उतारने की तैयारी की थी, लेकिन जदयू ने उन्हें टिकट नहीं दिया है। इससे पांडे को सबक सिखाने का शिवसेना का प्लान फेल हो गया है। अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला उठाने के बाद गुप्तेश्वर पांडे शिवसेना के निशाने पर थे।

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