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Bihar: मिड डे मील न मिलने पर ग्रामीणों में भारी रोष, स्कूल में जड़ा ताला; DEO की दखल पर खुला, तब शुरू हुई पढ़ाई

Wed, 27 Sep 2023 06:08 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 27 Sep 2023 06:08 PM IST
सार

Bihar News: ग्रामीणों ने कहा कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंद रहने की शिकायत उन्होंने प्रखंड से लेकर जिला स्तरीय पदाधिकारियों तक से की। शिकायत पर कार्रवाई हुई तो मात्र दो दिन ही बच्चों को मिड डे मिला। बाद में फिर से मध्याह्न भोजन बंद कर दिया गया। इसे लेकर अभिभावक आक्रोशित हो उठे और उन्होंने स्कूल में तालाबंदी कर दी।

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Villagers locked over not getting mid-day meal in Govt Middle School in Aurangabad; Open on deo's intervention
ग्रामीणों ने शिक्षकों को स्कूल से बाहर निकाल गेट पर लगाया ताला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के औरंगाबाद के देव प्रखंड के दधपा स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंद रहने के विरोध में ग्रामीणों ने स्कूल में ताला लगा दिया। इसके पहले ग्रामीणों ने सभी शिक्षकों को स्कूल से बाहर रहने की सलाह दी। इस दौरान ग्रामीणों का आक्रोश देखकर सभी शिक्षक विद्यालय से बाहर खड़े रहे।

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‘तीन किमी पैदल चलकर स्कूल आते हैं बच्चे, लेकिन मिड डे मील बंद’
मौके पर मौजूद ग्रामीण पवन सिंह, शंभू तिवारी, बबलू सिंह, अंकित सिंह, विकास सिंह, मदन सिंह और अखिलेश भारती ने बताया कि स्कूल में आसपास के गांवों दधपा, बसडीहा, माले नगर, भुइया बिगहा और दधपा बिगहा समेत अन्य गांवों के बच्चे पढ़ते हैं। वे करीब दो से तीन किलोमीटर पैदल चलकर आते हैं। लेकिन विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंद रहने से उन्हें काफी परेशानी हो रही है। खासकर वैसे बच्चे जो समाज के अंतिम पंक्ति में बैठे हैं, उन्हें ज्यादा ही परेशानी होती है। उन्हें सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है।
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‘शिकायत के बावजूद एमडीएम चालू नहीं होने पर की तालाबंदी’
ग्रामीणों ने कहा कि विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंद रहने की शिकायत उन्होंने प्रखंड से लेकर जिला स्तरीय पदाधिकारियों तक से की। शिकायत पर कार्रवाई हुई तो मात्र दो दिन ही बच्चों को मिड डे मिला। बाद में फिर से मध्याह्न भोजन बंद कर दिया गया। इसे लेकर अभिभावक आक्रोशित हो उठे और उन्होंने स्कूल में तालाबंदी कर दी।
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‘जब मेरा वेतन बंद तो कैसे चालू करूं एमडीएम’
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक नवनीत कुमार सिंह ने बताया कि उनके पूर्व की प्रभारी प्रधानाध्यापक अलका कुमारी के मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) पर चली गईं। इस कारण प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने आदेश निकालकर दो दिनों के अंदर उन्हें संपूर्ण प्रभार लेकर स्कूल में पठन-पाठन और मध्याह्न भोजन आदि सुचारु रूप में चलाने को कहा। इस आदेश के आलोक में नौ सितंबर तक मुझे कोई भी प्रभार नहीं दिया गया। जब इसकी सूचना मैंने बीआरसी को दी। उसके बाद सर्व शिक्षा अभियान के डीपीओ ने विद्यालय की जांच की और 11 सितंबर को मुझे आरोपित करते हुए स्पष्टीकरण जारी किया कि आपके द्वारा मध्याह्न भोजन बंद किया गया है। इस कारण आपका वेतन बंद किया जाता है। उन्होंने कहा कि जब मुझे किसी तरह का प्रभार ही नहीं दिया गया तो मैं कैसे दोषी हूं।

साथ ही उन्होंने कहा कि 12 सितंबर को मैंने स्पष्टीकरण का जवाब दिया। इसके बाद भी विद्यालय में मध्याह्न भोजन बंद रहा। ग्रामीणों ने जब इसकी शिकायत पटना तक की, तब कार्रवाई की बात होने लगी। इसके बाद डीपीओ सह देव के प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने मध्याह्न भोजन के बीआरपी अरविंद कुमार चौबे तथा लेखापाल अमित कुमार को भेजकर 16 सितंबर को विद्यालय का प्रभार हस्तगत कराया। इसके बाद 17, 18 और 19 सितंबर को विद्यालय में अवकाश था। उन्होंने कहा कि प्रभार देते समय यह बात तय हुआ था कि आप विद्यालय में मध्याह्न भोजन का संचालन कीजिए और आपके बंद वेतन को चालू करने का आदेश निर्गत कर दिया जाएगा। हमने 20 सितंबर से मध्याह्न भोजन शुरू कर दिया। इसके बावजूद मेरे बंद वेतन को चालू कर देने का आदेश नहीं जारी किया गया। इसकी सूचना मैंने वरीय अधिकारियों को 23 सितंबर को दी।

उन्होंने कहा कि जब मेरा वेतन बंद है तो मैं किस परिस्थिति में मध्याह्न भोजन चालू रखूं। इसी को लेकर दो दिन से मध्याह्न भोजन बंद है। इसे लेकर ही आज ग्रामीणों ने विद्यालय में ताला लगा दिया। इस कारण हम सभी शिक्षक विद्यालय के बाहर हैं।
इस बारे में डीपीओ सह प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से बात की गई। इस पर उन्होंने सिर्फ इतना ही कहकर फोन काट दिया कि इसमें प्रधानाध्यापक की गलती है। इसके बाद बार-बार फोन किया गया। मगर उन्होंने कॉल उठाना मुनासिब नहीं समझा। 

तीन घंटे तक बाधित रही बच्चों की परीक्षा
विद्यालय में वर्ग एक से पांच तक के बच्चों की परीक्षा थी। जो आज लगभग तीन घंटे तक बाधित रही। जबकि विद्यालय में कुल 267 बच्चे नामांकित हैं। मामले की जानकारी जब जिला शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह को मिली तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया। प्रभारी प्रधानाध्यापक से पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि दो दिन के अंदर वे खुद आकर पूरे मामले की जांच करेंगे।

वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी ने फोन पर ही ग्रामीणों से बात की। ग्रामीणों से विद्यालय का ताला खोलकर पठन-पाठन को सुचारु रूप से चलने देने का आग्रह किया। डीईओ के आश्वासन के बाद ग्रामीण संतुष्ट हो गए और विद्यालय का ताला खोल दिया।


जिला शिक्षा पदाधिकारी ने शिक्षक नवनीत कुमार को आदेश दिया कि मध्याह्न भोजन को सुचारु रूप से चलाएं, वेतन बंद करने के आदेश को स्थगित करते हुए आपका वेतन भी चालू करने का आदेश जल्द ही कार्यालय से प्राप्त होगा। ग्रामीणों द्वारा ताला खोले जाने के बाद विद्यालय में शिक्षकों ने प्रवेश किया और विद्यालय की पढ़ाई शुरू कर बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन को चालू कराया।

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