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Bihar : बड़ा भाई नहीं पढ़ सका, छोटी बहन स्टेट टॉपर; फेरीवाला पिता लाचार हुआ तो मां ने कबाड़ी दुकान चला पढ़ाया

Fri, 31 Mar 2023 07:48 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Fri, 31 Mar 2023 07:48 PM IST
सार

बदकिस्मती भी कई बार हिम्मत और जुनून के आगे हार जाती है। बिहार बोर्ड के मैट्रिक रिजल्ट में टॉप 8 में आई अर्पिता की कहानी जानकर यकीन हो जाएगा कि एक मां चाहे तो क्या नहीं कर सकती है। एक बेटी चाह ले तो क्या नहीं कर सकती है।

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Simultala student Arpita Kumari Bihar Board 8th topper's father disabled, mother taught by selling junk
परिवार के साथ अर्पिता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बदकिस्मती भी कई बार हिम्मत और जुनून के आगे हार जाती है। बिहार बोर्ड के मैट्रिक रिजल्ट में टॉप 8 में आई अर्पिता की कहानी जानकर यकीन हो जाएगा कि एक मां चाहे तो क्या नहीं कर सकती है। एक बेटी चाह ले तो क्या नहीं कर सकती है। सिमुलतला आवासीय विद्यालय की अर्पिता भारतीय प्रशासनिक सेवा का लक्ष्य लेकर चल रही है, हालांकि इससे पहले वह आईआईटी से इंजीनियरिंग भी करना चाहती है।

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बर्तन बेचते पिता के हादसे के बाद मां ने संभाला घर
इस संबंध में अर्पिता की मां रीना देवी ने अमर उजाला को बताया कि 2007 में उनके पति नरेश प्रसाद का एक्सीडेंट हो गया।  वह उस समय आसनसोल में बाइक पर घूम-घूम कर बर्तन बेचते थे। अचानक उनका एक्सीडेंट हो गया। इस क्रम में उनका स्पाइनल टूट गया। तब से वह आज तक बिस्तर पर पड़े हैं। अब जिम्मेदारी थी घर चलाने की,  इसलिए हमने कमर कस लिया और शुरू कर दिया कबाड़ी का काम।
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पति के एक्सीडेंट ने रोक दी बेटे की पढाई  
अर्पिता की मां रीना देवी ने बताया कि जिस समय मेरे पति का एक्सीडेंट हुआ था उस समय मेरा सबसे बड़ा लड़का शुभम नवमी का छात्र था। लाचारी में जीने और परिवार को चलाने के लिए कुछ न कुछ करना जरूरी था इसलिए कम लागत में कबाड़ी का धंधा शुरू कर दिया। लेकिन मैं औरत अकेली क्या करती। उस समय मजबूरी में मैंने अपने बेटे की पढाई बंद करवा दी और घर चलाने की जिम्मेदारी का आधा हिस्सा मैंने उसके नाजुक कंधों पर डाल दिया। और मैं अपने बेटे के साथ घर चलाने लगी।
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अर्पिता - फोटो : अमर उजाला

बेटियों ने बढाया हौसला 
अर्पिता ने बताया कि हमारी दैनिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही थी जो हमारे हौसले को बुलंद कर रही थी । हमने उस पल को चुनौती के साथ जिया जिसका नतीजा यह हुआ कि मेरी दीदी ने सशरं पढाई कर स्नातक पास कर लिया। मेरी छोटी बहन  सौम्या नवोदय में चयनित होकर अभी दसवीं (सीबीएससी) की परीक्षा दी है । और मैं सिमुरतल्ला से बिहार टॉप हुई हूं।

अब IAS बनकर करना चाहती हैं देश की सेवा 
बिहार टॉपर अर्पिता ने आज 478 अंक लाकर न सिर्फ अपने माता पिता बल्कि अपने समाज से लेकर पुरे बिहार मेंम अपना नाम रौशन की हैं । अब वह भारतीय प्रशासनिक सेवा का लक्ष्य लेकर चल रही है, हालांकि इससे पहले वह आईआईटी से इंजीनियरिंग भी करना चाहती है। 

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