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Satta Ka Sangram: बंद चीनी मिल-सिसवन ढाला ओवरब्रिज का उठा मुद्दा, विपक्ष के नेता ने सरकार को घेरा; जानें
Sat, 24 May 2025 02:23 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Sat, 24 May 2025 02:23 PM IST
सार
Satta Ka Sangram: कभी सीवान में चार-चार चीनी मिलें हुआ करती थीं, लेकिन अब सभी बंद हो चुकी हैं। न सिर्फ मिलें बंद हुईं, बल्कि उन्हें नीलाम भी कर दिया गया। यही नहीं, एक समय की प्रसिद्ध सूत फैक्टरी को बंद कर उसमें इंजीनियरिंग कॉलेज खोल दिया गया। कार्यक्रम में इन विषयों का मुद्दा उठाया गया।
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सत्ता का संग्राम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमर उजाला द्वारा आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को ध्यान में रखते हुए 'सत्ता का संग्राम' कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इस विशेष कार्यक्रम में सीवान के विधायक और विभिन्न राजनीतिक दलों के जिलाध्यक्षों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र रहा वर्षों से लंबित सिसवन ढाला ओवरब्रिज का निर्माण और सीवान की औद्योगिक बदहाली।
सीपीआई (एमएल) के जीरादेई विधायक अमरजीत कुशवाहा ने सिसवन ढाला अब तक नहीं बनने को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले 20 वर्षों से सत्ता में रह चुकी सरकार इस स्थिति की जिम्मेदार है। साथ ही उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार और बिहार में उसकी सहयोगी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब दोनों जगह एक ही गठबंधन की सरकार है तो यह काम अब तक क्यों नहीं हुआ? यह प्रशासनिक विफलता है। गौरतलब है कि जीरादेई, जो भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की कर्मभूमि रही है, वहां से अब तक राजधानी के लिए सीधी ट्रेन सेवा नहीं है। यह मुद्दा भी चर्चा में रहा और लोगों में रोष का विषय बना।
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औद्योगिक गिरावट पर छिड़ी बहस
कभी सीवान में चार-चार चीनी मिलें हुआ करती थीं, लेकिन अब सभी बंद हो चुकी हैं। न सिर्फ मिलें बंद हुईं, बल्कि उन्हें नीलाम भी कर दिया गया। यही नहीं, एक समय की प्रसिद्ध सूत फैक्टरी को बंद कर उसमें इंजीनियरिंग कॉलेज खोल दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि यहां के लाखों युवाओं को दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में पलायन कर मजदूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। पलायन की रफ्तार लगातार बढ़ रही है, जो जिले की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे के लिए चिंता का विषय है।
पढ़ें; सासाराम सदर अंचल कार्यालय के डाटा ऑपरेटर घूस लेते धरे गए, निगरानी टीम ने 1.10 लाख रुपये के साथ दबोचा
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
भाजपा नेता कुंदन कुमार ने दावा किया कि सिसवन ढाला ओवरब्रिज के लिए लगभग सभी कागजी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में 20 साल पहले क्या स्थिति थी, यह जनता को याद रखना चाहिए। वहीं वीआईपी पार्टी के जिलाध्यक्ष श्रीनिवास यादव ने जिले की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। इसके जवाब में जदयू जिलाध्यक्ष ने सरकार का पक्ष रखते हुए योजनाओं और विकास कार्यों का ब्योरा प्रस्तुत किया।
क्या बनेगा चुनावी मुद्दा?
पूरे कार्यक्रम के दौरान सिसवन ढाला ओवरब्रिज और बंद पड़ी चीनी मिलों का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। यह सवाल अब ज़रूरी हो गया है कि क्या पिछले दो दशकों से लंबित ये मुद्दे एक बार फिर सिर्फ चुनावी नारे बनकर रह जाएंगे या वास्तव में 2025 में इन पर ठोस कार्यवाही देखने को मिलेगी? क्या सिसवन ढाला ओवरब्रिज इस बार चुनाव से पहले बनकर तैयार होगा?
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सीपीआई (एमएल) के जीरादेई विधायक अमरजीत कुशवाहा ने सिसवन ढाला अब तक नहीं बनने को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले 20 वर्षों से सत्ता में रह चुकी सरकार इस स्थिति की जिम्मेदार है। साथ ही उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार और बिहार में उसकी सहयोगी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब दोनों जगह एक ही गठबंधन की सरकार है तो यह काम अब तक क्यों नहीं हुआ? यह प्रशासनिक विफलता है। गौरतलब है कि जीरादेई, जो भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की कर्मभूमि रही है, वहां से अब तक राजधानी के लिए सीधी ट्रेन सेवा नहीं है। यह मुद्दा भी चर्चा में रहा और लोगों में रोष का विषय बना।
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औद्योगिक गिरावट पर छिड़ी बहस
कभी सीवान में चार-चार चीनी मिलें हुआ करती थीं, लेकिन अब सभी बंद हो चुकी हैं। न सिर्फ मिलें बंद हुईं, बल्कि उन्हें नीलाम भी कर दिया गया। यही नहीं, एक समय की प्रसिद्ध सूत फैक्टरी को बंद कर उसमें इंजीनियरिंग कॉलेज खोल दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि यहां के लाखों युवाओं को दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में पलायन कर मजदूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। पलायन की रफ्तार लगातार बढ़ रही है, जो जिले की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे के लिए चिंता का विषय है।
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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
भाजपा नेता कुंदन कुमार ने दावा किया कि सिसवन ढाला ओवरब्रिज के लिए लगभग सभी कागजी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में 20 साल पहले क्या स्थिति थी, यह जनता को याद रखना चाहिए। वहीं वीआईपी पार्टी के जिलाध्यक्ष श्रीनिवास यादव ने जिले की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। इसके जवाब में जदयू जिलाध्यक्ष ने सरकार का पक्ष रखते हुए योजनाओं और विकास कार्यों का ब्योरा प्रस्तुत किया।
क्या बनेगा चुनावी मुद्दा?
पूरे कार्यक्रम के दौरान सिसवन ढाला ओवरब्रिज और बंद पड़ी चीनी मिलों का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। यह सवाल अब ज़रूरी हो गया है कि क्या पिछले दो दशकों से लंबित ये मुद्दे एक बार फिर सिर्फ चुनावी नारे बनकर रह जाएंगे या वास्तव में 2025 में इन पर ठोस कार्यवाही देखने को मिलेगी? क्या सिसवन ढाला ओवरब्रिज इस बार चुनाव से पहले बनकर तैयार होगा?