{"_id":"6728c1ce2fedc33dc80df069","slug":"chhath-puja-2024-chhath-puja-is-performed-in-many-states-with-araata-pat-made-in-maker-of-chhapra-2024-11-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chhath Puja 2024: यहां बने अरता पात से कई राज्यों में होती है छठ पूजा, जानें महत्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chhath Puja 2024: यहां बने अरता पात से कई राज्यों में होती है छठ पूजा, जानें महत्व
Mon, 04 Nov 2024 06:15 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Mon, 04 Nov 2024 06:15 PM IST
सार
Chhath Puja 2024: छपरा के मकेर प्रखंड में कई दशकों से महिलाएं अरता पात का निर्माण कर रही हैं, जिसे कई राज्यों में छठ पूजा में प्रयोग किया जाता है। यह क्षेत्र कभी नक्सल प्रभावित हुआ करता था, पर आज यहां की महिलाएं आत्मनिर्भरता की मिसाल गढ़ रही हैं।
विज्ञापन
कभी नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्र में महिलाएं दो दशकों से कर रहीं अरता पात का निर्माण
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
छपरा के मकेर प्रखंड के फुलवरिया पंचायत के भाथा गांव की महिलाएं छठ पूजा में विशेष भूमिका निभा रही हैं। ये महिलाएं, जिनमें से कई बुजुर्ग हैं, पिछले दो दशकों से अरता पात का निर्माण कर रही हैं। अरता पात छठ पूजा की अति महत्वपूर्ण पूजन सामग्री है। छठ पूजा में सूर्य देव को अर्घ्य देने और कोसी भरने में अरता पात का उपयोग किया जाता है। लोक आस्था के इस महापर्व में अरता के पात की भूमिका इतनी महत्वपूर्ण है कि इसके बिना पूजा को अधूरा माना जाता है।
विज्ञापन
अरता पात का निर्माण प्रक्रिया
अरता पात बनाने के लिए श्रावण माह से ही महिलाएं तैयारी शुरू कर देती हैं। इसमें अकवन की रुई, शुद्ध राख और लाल सिंदूर का उपयोग किया जाता है। मिट्टी के ढक्कन में इन सामग्रियों को मिलाकर एक फार्मा तैयार किया जाता है। इसके बाद रुई से अरता के पत्ते की आकृति बनाई जाती है और तेज आग पर उबाल कर दीवार पर सुखाने के लिए चिपका दिया जाता है। जब पत्ते सूख जाते हैं, तो उन्हें बारीकी से सजाकर बंडल में बांध दिया जाता है। इस प्रकार तैयार अरता के पात बिहार, यूपी, कोलकाता और दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में भेजे जाते हैं।
विज्ञापन
आत्मनिर्भरता की मिसाल
यह क्षेत्र कभी माओवादी और नक्सल प्रभावित रहा है। लेकिन इन महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए अपने काम को न केवल जारी रखा, बल्कि इसे एक पहचान भी दी। इनके परिवार पीढ़ियों से इस काम में लगे हुए हैं। पूरे परिवार के सदस्य, बच्चों से लेकर बुजुर्ग महिलाएं, मिलकर अरता पात बनाते हैं। छठ पूजा के दौरान इस पत्ते की मांग अधिक होती है और इस समय इनके परिवार की आय में बढ़ोतरी होती है।
विज्ञापन
आर्थिक चुनौतियां और संभावनाएं
हालांकि इस काम में आर्थिक संभावनाएं हैं, लेकिन निर्माण करने वाली महिलाओं को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता। अगर सरकार या अन्य संस्थाएं इन महिलाओं को वित्तीय मदद और प्रोत्साहन दें, तो इस लघु उद्योग को बड़े पैमाने पर विकसित किया जा सकता है। महिलाओं ने बताया कि अगर जीविका या अन्य सरकारी योजनाओं से लोन की सुविधा मिले, तो वे इस उद्योग को विस्तार देकर अधिक परिवारों को रोजगार दे सकती हैं और आर्थिक परेशानी से मुक्त हो सकती हैं।
इन महिलाओं की मेहनत और समर्पण ने न केवल उनके गांव की पहचान बनाई है, बल्कि छठ पूजा की पवित्रता और पारंपरिक महत्व को भी बनाए रखा है। सरकारी सहयोग से इस लघु उद्योग को नई ऊंचाइयां मिल सकती हैं, जिससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि यह क्षेत्रीय पहचान भी मजबूत होगी।