Rupauli Assembly Bypolls: जदयू-राजद दोनों पर भारी पड़े निर्दलीय शंकर सिंह, बोले- यह जनता की जीत
Bihar News: पूर्णिया जिले के रूपौली विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद निर्दलीय शंकर सिंह ने कहा कि जनता भगवान होती है। यह जीत जनता की है। उन्होंने मुझे अपना आशीष दिया। यह जीत मैं जनता को समर्पित करता हूं।
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पूर्णिया में निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत की हवा चल रही है। पहले, पूर्णिया लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार पप्पू यादव ने बाजी मारी। अब रूपौली विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भाग्य आजमा रहे शंकर सिंह ने भी जीत का परचम लहराया है। शंकर सिंह ने इस सीट से अहम जीत हासिल की है। उन्होंने भी पप्पू यादव की तरह ही राजद और जदयू प्रत्याशियों को पटखनी दी है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी के बागी शंकर सिंह ने 19 साल बाद जीत का स्वाद चखा। एनडीए को इस सीट पर जीत आसान लग रही थी। उधर, पप्पू यादव और तेजस्वी भी इस सीट पर राजद प्रत्याशी बीमा भारती के समर्थन में खड़े थे, लेकिन इनके बीच से शंकर सिंह ने बाजी मार ली। जीत के बाद शंकर सिंह ने कहा कि जनता भगवान होती है। यह जीत जनता की है। उन्होंने मुझे अपना आशीष दिया। यह जीत मैं जनता को समर्पित करता हूं।
शंकर सिंह ने छठे राउंड से बनाई बढ़त
निर्दलीय प्रत्याशी शंकर सिंह को जदयू उम्मीदवार कलाधर मंडल ने शुरुआती राउंड में लगातार पीछे रखा, लेकिन जैसे ही छठे राउंड का रिजल्ट आया तो शंकर सिंह ने कलाधर मंडल के मुकाबले 501 वोटों की बढ़त बना ली। उसके बाद से वह लगातार आगे बढ़ते रहे। बारहवें राउंड के बाद जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह-जिला पदाधिकारी कुंदन कुमार ने शंकर सिंह की जीत की घोषणा की। बारहवें राउंड की गणना के बाद शंकर सिंह को अंतत: 8211 वोटों से विजयी घोषित किया गया। उन्हें 67779 वोट मिले। चुनाव परिणाम आने के बाद शंकर सिंह ने समर्थक एक-दूसरे को गुलाल लगाकर बधाई देते रहे। साथ ही अपने नवनिर्वाचित विधायक के समर्थन में कई घंटे तक नारेबाजी भी करते दिखे।
शंकर सिंह और उनकी जीत का गणित समझें
शंकर सिंह एक समय पप्पू यादव के खिलाफ हिंसक संघर्ष के लिए चर्चित रहे थे। 2005 में एक बार कुछ समय के लिए विधायक बने भी थे, लेकिन फिर विधानसभा भंग होने के बाद दोबारा चुनाव हुआ तो वह बीमा भारती से हार गए। इसके बाद से वह हर चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी के रूप में हार रहे थे। बाहुबली के रूप में पहचान रखने वाले शंकर सिंह पर डेढ़ दर्जन से ज्यादा केस हैं। वह बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से लगातार दिवंगत बिहारी को न्याय दिलाने की मांग के साथ आंदोलनरत थे। इन आंदोलनों की वजह से बाहुबली की जगह शंकर सिंह की छवि आंदोलनकारी के रूप में उभरी, खासकर सवर्णों के बीच। राजनीतिक प्रेक्षकों के मुताबिक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से लोजपा के दावे की अनदेखी, महागठबंधन के अंदर पप्पू यादव और बीमा भारती के बीच लड़ाई-समझौते के असमंजस के साथ शंकर सिंह की आंदोलनकारी छवि का मिलाजुला असर होने के कारण ऐसा परिणाम सामने आया है।
रूपौली सीट से साल 2000 अजमा रहे किस्मत
शंकर सिंह रूपौली विधानसभा सीट से साल 2000 से लगातार चुनाव लड़ रहे हैं। विधानसभा चुनाव 2020 में लोजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया, इसमें 44,994 वोट लाकर वह दूसरे स्थान पर थे। वहीं शंकर सिंह फरवरी 2005 में रूपौली विधानसभा से लोजपा के टिकट पर विधायक बने थे। हालांकि, दोबारा फिर नवंबर 2005 में चुनाव हुआ तो, उनकी हार हो गई थी। वह छह बार रुपौली सीट से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। 2010 के विधानसभा चुनाव में शंकर सिंह राजद समर्थित लोजपा के उम्मीदवार थे। चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रहे थे। वहीं, 2015 में पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय ही चुनाव लड़ा, इसमें वह तीसरे स्थान पर रहे थे। इसी तरह 2020 में लोजपा ने उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाया, जिसमें 44, 994 वोट लाकर वह दूसरे स्थान पर थे। इस चुनाव से पहले रूपौली सीट जदयू के पाले में थी। शंकर सिंह लोजापा (रामविलास) के सदस्य थे। टिकट मिलने की उम्मीद पर पानी फिरते देख शंकर सिंह ने इस्तीफा दे दिया और निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे।