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Bihar : पूर्णिया में नवरात्रि पर पंडालों की भव्यता ने मोहा मन, 40 लाख के पंडाल में असम-बंगाल की झलक; तस्वीरें
Sun, 28 Sep 2025 08:18 PM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
Published by: तरुणेंद्र चतुर्वेदी
Updated Sun, 28 Sep 2025 08:18 PM IST
सार
Navratri 2025 : दुर्गा पूजा 2025 में पूर्णिया शहर में श्रद्धालुओं को भव्य और इनोवेटिव पंडालों का आनंद मिल रहा है। इस बार पंडालों में असम की चटाई, बंगाल के बांस और उत्तराखंड के केदारनाथ मंदिर की झलक दिखाई दे रही है। शहर के प्रमुख पंडालों में 12 लाख से 40 लाख रुपये तक खर्च किए गए हैं।
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Bihar News : आकर्षक पंडाल मोह रहे मन।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इस वर्ष दुर्गा पूजा के अवसर पर पूर्णिया शहर में श्रद्धालुओं को मां दुर्गा के भव्य रूप और आकर्षक पंडालों का दीदार करने का मौका मिलेगा। शहर में इस बार कोलकाता, पटना और रांची जैसी रौनक देखने को मिलेगी। लोग यहां एक से बढ़कर एक इनोवेटिव थीम वाले पंडाल देख पाएंगे, जिनमें असम, बंगाल और उत्तराखंड की कला और संस्कृति की झलक दिखाई देगी।
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Navrati 2025 : लोक संस्कृति को दर्शाते हुए पंडाल।
- फोटो : अमर उजाला
इन दो थीम पर बना है पंडाल
इस दुर्गा पूजा का मुख्य आकर्षण असम की चटाई और बंगाल के बांस से बना 40 लाख रुपये का भव्य पंडाल है। इसके अलावा, बांग्ला वर्ण लिपि और उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर की थीम पर भी पंडाल बनाए जा रहे हैं। शहर के प्रमुख पूजा पंडालों का कुल बजट 12 लाख से 40 लाख रुपये के बीच है।
इस दुर्गा पूजा का मुख्य आकर्षण असम की चटाई और बंगाल के बांस से बना 40 लाख रुपये का भव्य पंडाल है। इसके अलावा, बांग्ला वर्ण लिपि और उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर की थीम पर भी पंडाल बनाए जा रहे हैं। शहर के प्रमुख पूजा पंडालों का कुल बजट 12 लाख से 40 लाख रुपये के बीच है।
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Purniya News : शाम ढलते ही और भी बढ़ जाती है पंडालों की खूबसूरती।
- फोटो : अमर उजाला
पंडाल की लाइटिंग और प्रतिमा खास
शहर की प्रमुख पूजा समितियां दशहरा को खास बनाने के लिए दिन-रात तैयारियों में जुटी हैं। पंडाल, प्रतिमा और लाइटिंग को भव्य और आकर्षक रूप दिया जा रहा है। बंगाल से आए कारीगर पिछले एक महीने से पंडाल निर्माण और प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। सप्तमी पूजा के लिए लोगों को खास उत्साह है। कुछ पंडाल षष्ठी पूजा की रात और अधिकांश पंडाल सप्तमी को खोले जाएंगे।
शहर की प्रमुख पूजा समितियां दशहरा को खास बनाने के लिए दिन-रात तैयारियों में जुटी हैं। पंडाल, प्रतिमा और लाइटिंग को भव्य और आकर्षक रूप दिया जा रहा है। बंगाल से आए कारीगर पिछले एक महीने से पंडाल निर्माण और प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। सप्तमी पूजा के लिए लोगों को खास उत्साह है। कुछ पंडाल षष्ठी पूजा की रात और अधिकांश पंडाल सप्तमी को खोले जाएंगे।
Bihar News : अपनी खूबियों की वजह से चर्चा में यह पंडाल।
- फोटो : अमर उजाला
कप्तानपुल, ग्रीनवैली (40 लाख)
फ्रेंडशिप क्लब दुर्गा पूजा समिति द्वारा बनाया गया यह पंडाल असम की चटाई और बंगाल के बांस से सजा है। 55 फीट ऊंचा और 70 फीट चौड़ा पंडाल शहर का सबसे महंगा पंडाल है। इसमें 25 लाख रुपये पंडाल निर्माण, 7 लाख लाइटिंग और 3.50 लाख प्रतिमा पर खर्च किए गए हैं।
फ्रेंडशिप क्लब दुर्गा पूजा समिति द्वारा बनाया गया यह पंडाल असम की चटाई और बंगाल के बांस से सजा है। 55 फीट ऊंचा और 70 फीट चौड़ा पंडाल शहर का सबसे महंगा पंडाल है। इसमें 25 लाख रुपये पंडाल निर्माण, 7 लाख लाइटिंग और 3.50 लाख प्रतिमा पर खर्च किए गए हैं।
भट्टा दुर्गाबाड़ी (35 लाख):
110 साल की परंपरा वाला यह पंडाल इस बार बांग्ला वर्ण लिपि थीम पर तैयार किया गया है। षष्ठी पूजा की रात 10 बजे ढाक, ढोल और मृदंग के बीच मां दुर्गा के दर्शन होंगे। सार्वजनिक दुर्गा मंदिर, गुलाबबाग (25 लाख): पुराना सिनेमा रोड स्थित यह पंडाल इस बार अलग कॉन्सेप्ट पर सजा है। 1000 बंगाली साड़ियों से 700 मीटर तक सजावट की गई है, जिसमें 'ऑपरेशन सिंदूर' की झलक दिखाई देगी। रजनी चौक पूजा समिति (20 लाख): रजनी चौक पंडाल को बंगाल के मंदिर की शैली में सजाया गया है। प्रतिमा और लाइटिंग का खर्च इस बजट में शामिल है। इस पंडाल के संरक्षक सांसद पप्पू यादव हैं।
110 साल की परंपरा वाला यह पंडाल इस बार बांग्ला वर्ण लिपि थीम पर तैयार किया गया है। षष्ठी पूजा की रात 10 बजे ढाक, ढोल और मृदंग के बीच मां दुर्गा के दर्शन होंगे। सार्वजनिक दुर्गा मंदिर, गुलाबबाग (25 लाख): पुराना सिनेमा रोड स्थित यह पंडाल इस बार अलग कॉन्सेप्ट पर सजा है। 1000 बंगाली साड़ियों से 700 मीटर तक सजावट की गई है, जिसमें 'ऑपरेशन सिंदूर' की झलक दिखाई देगी। रजनी चौक पूजा समिति (20 लाख): रजनी चौक पंडाल को बंगाल के मंदिर की शैली में सजाया गया है। प्रतिमा और लाइटिंग का खर्च इस बजट में शामिल है। इस पंडाल के संरक्षक सांसद पप्पू यादव हैं।
दुर्गा मंदिर, मधुबनी (18 लाख):
1917 से बंगाली विधि-विधान के अनुसार पूजा की परंपरा वाला यह मंदिर इस बार बंगाल के प्रसिद्ध मंदिर की थीम पर सजाया गया है। सप्तमी को शाम 4:30 बजे दर्शन के लिए पट खोला जाएगा। प्रभात पाठागार, खुश्कीबाग (15 लाख): इस पंडाल को उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर की थीम पर सजा गया है। इसमें बंगाली छाप की प्रतिमा और मोहक लाइटिंग आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
1917 से बंगाली विधि-विधान के अनुसार पूजा की परंपरा वाला यह मंदिर इस बार बंगाल के प्रसिद्ध मंदिर की थीम पर सजाया गया है। सप्तमी को शाम 4:30 बजे दर्शन के लिए पट खोला जाएगा। प्रभात पाठागार, खुश्कीबाग (15 लाख): इस पंडाल को उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर की थीम पर सजा गया है। इसमें बंगाली छाप की प्रतिमा और मोहक लाइटिंग आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
बाड़ीहाट दुर्गा पूजा समिति (12 लाख):
1966 से पूजा की परंपरा निभाने वाले इस पंडाल को भी केदारनाथ मंदिर की शैली में सजाया गया है। षष्ठी पूजा की रात 9 बजे दर्शन के लिए पट खोला जाएगा। शहर के लगभग सभी प्रमुख पंडालों और प्रतिमाओं को भव्य रूप देने में बंगाल से आए कारीगर लगे हैं। इससे पूर्णिया की दुर्गा पूजा पर बंगाली संस्कृति की गहरी छाप दिखाई देगी।
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1966 से पूजा की परंपरा निभाने वाले इस पंडाल को भी केदारनाथ मंदिर की शैली में सजाया गया है। षष्ठी पूजा की रात 9 बजे दर्शन के लिए पट खोला जाएगा। शहर के लगभग सभी प्रमुख पंडालों और प्रतिमाओं को भव्य रूप देने में बंगाल से आए कारीगर लगे हैं। इससे पूर्णिया की दुर्गा पूजा पर बंगाली संस्कृति की गहरी छाप दिखाई देगी।
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