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बिहार: यहां अब नाव से तय हो रही स्कूल की राह, रोज सैकड़ों बच्चे जान जोखिम में डालकर इस तरह पहुंच रहे विद्यालय

Fri, 04 Sep 2026 10:17 PM IST
पूर्णिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटिहार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटिहार Published by: पूर्णिया ब्यूरो Updated Fri, 04 Sep 2026 10:17 PM IST
सार

कटिहार के बरारी प्रखंड में बाढ़ के कारण उत्क्रमित मध्य विद्यालय प्रतापगढ़ चारों तरफ से पानी से घिर गया है। स्कूल पहुंचने के लिए करीब 100 से 200 बच्चे रोजाना नाव का सहारा ले रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।

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Flooded School, Children Risk Their Lives, Rely on Boats to Reach Classes
नाव में बैठकर स्कूल पहुंच रहे स्कूली बच्चे।

विस्तार

कटिहार में बाढ़ के पानी ने बच्चों की पढ़ाई का रास्ता भी मुश्किल कर दिया है। बरारी प्रखंड के प्रतापगढ़ बांध के किनारे स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय प्रतापगढ़ तक पहुंचने के लिए अब बच्चों का एकमात्र सहारा नाव है। बरांडी नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के बाद स्कूल चारों तरफ से पानी से घिर गया है। सड़क और आने-जाने के रास्ते पूरी तरह जलमग्न हैं। ऐसे में रोजाना बच्चे नाव पर सवार होकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।

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गंगा, कोसी और बरांडी नदी के जलस्तर में लगातार बदलाव के कारण कटिहार के कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैला हुआ है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। प्रतापगढ़ स्कूल के छात्र-छात्राओं को स्कूल पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। स्कूल जाने और लौटने के लिए उन्हें नदी का पानी पार करना पड़ता है।

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निजी नाव के सहारे स्कूल पहुंच रहे बच्चे
विद्यालय के शिक्षक अब्दुल बारी ने बताया कि बाढ़ का पानी फैलने के बाद नाव ही आने-जाने का एकमात्र साधन बचा है। सरकारी स्तर पर अब तक नाव उपलब्ध नहीं कराई गई है। स्कूल प्रबंधन ने अपने खर्च पर निजी नाव की व्यवस्था की है। इसके लिए रोजाना 500 रुपये दिए जा रहे हैं।

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इस नाव से हर दिन 100 से अधिक बच्चे नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं। नाविक नावेद अली के मुताबिक, वह अपनी निजी नाव से बच्चों को स्कूल पहुंचाने और वापस लाने का काम करते हैं। रोजाना करीब 150 से 200 बच्चे नाव से नदी पार करते हैं। उन्होंने बताया कि पानी के बीच बच्चों को ले जाने में डर तो लगता है, लेकिन वह पूरी सावधानी के साथ उन्हें स्कूल पहुंचाने और वापस लाने की कोशिश करते हैं।



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अभिभावकों को सताती है बच्चों की सुरक्षा की चिंता
बच्चों के अभिभावकों की चिंता भी कम नहीं है। उनका कहना है कि बच्चे रोज नाव पर बैठकर स्कूल जाते हैं और हादसे का डर बना रहता है। हाल ही में एक बच्चे की डूबने से मौत के बाद यह चिंता और बढ़ गई है। अभिभावकों की मांग है कि यहां जल्द से जल्द पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चों को पढ़ाई के लिए हर दिन जान जोखिम में डालकर नाव का सहारा न लेना पड़े।

नाव में बैठकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे, हर दिन जान का रिस्क

नाव में बैठकर स्कूल पहुंच रहे स्कूली बच्चे।

नाव में बैठकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे, हर दिन जान का रिस्क

नाव में बैठकर स्कूल पहुंच रहे स्कूली बच्चे।

 

नाव में बैठकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे, हर दिन जान का रिस्क

नाव में बैठकर स्कूल पहुंच रहे स्कूली बच्चे।

 

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