फरक्का जल संधि: नीतीश की पार्टी ने लालू राज पर पर बोला हमला, संजय झा बोले- बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी गई
फरक्का जल संधि को लेकर बिहार के सियासी दलों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। अब जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बिना नाम लिए पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए। आइये जानते हैं, उन्होंने क्या कहा?
विस्तार
बिहार में फरक्का जल संधि को लेकर सियासी घमासान जारी है। रविवार को एक बार फिर से पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी ने लालू राज की याद दिलाई और उनके शासनकाल पर हमला बोला। जनता दल यूनाईटेड के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिया कि गंगा सिर्फ एक पवित्र नदी नहीं, बिहार की जीवनधारा भी है। गंगा और अन्य नदियों के जल पर बिहार को वाजिब अधिकार मिले, यह 13 करोड़ बिहारवासियों के हित में एक जरूरी मांग है। संजय झा ने कहा कि दिसंबर 1996 में हुई 'फरक्का जल संधि' में बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी गई थी। अब, जबकि दिसंबर 2026 में इस संधि के 30 वर्षों की समय-सीमा पूरी हो रही है, जनता दल यूनाइटेड ने 'फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद' के जरिए जन-जागरूकता की मुहिम शुरू की है, ताकि फिर से बिहार का हक न मारा जा सके।
उपमुख्यमंत्री ने भी राजद पर बोला था हमला
हाल में ही उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने भी राजद पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि जब गंगा जल के बंटवारे को लेकर संधि हुई थी, उस समय बिहार में राजद की सरकार थी। लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री थे और केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। उनके समय में यह फरक्का जल संधि हुई थी। इसमें बिहार के हितों की उपेक्षा की गई। इतना ही नहीं बिहार को परेशानी में डालने वाली यह संधि हुई।
बिहार: अब अस्पताल के चक्कर खत्म, घर बैठे मिनटों में बनाएं आभा आईडी; आधार से लिंक मोबाइल जरूरी
राजद सांसद ने पलटवार करते हुए क्या कहा?
वहीं राजद सांसद सुधाकर सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि फरक्का का मुद्दा नया नहीं है और हमारी पार्टी शुरू से इसका विरोध करती रही है। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र और राज्य में लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद जदयू ने बिहार के हित में इस मामले पर अब तक क्या कदम उठाए? उन्होंने कहा कि यदि जदयू वास्तव में फरक्का बैराज और संबंधित संधि का विरोध करती है तो सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। उन्होंने पूछा कि केंद्र यदि बिहार की मांग नहीं मानता है तो क्या जदयू केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला करेगी?