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बिहार: ऐतिहासिक पटना मेडिकल कॉलेज की मुख्य विरासत बचाने की गुहार, अब तक कई भवन गिराए गए

Mon, 27 Dec 2021 04:19 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Mon, 27 Dec 2021 04:19 PM IST
सार

पीएमसीएच परिसर की इमारतों के पुनर्निर्माण के पहले चरण में इमारतें गिराने का काम कुछ माह पहले शुरू हुआ था। परिसर में आधुनिक व हाईराईज इमारतें बनाई जाएंगी। पीएमसीएच का निर्माण 1925 में प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज के रूप में किया गया था। यह तत्कालीन प्रिंस ऑफ वेल्स की दिसंबर 1921 में पटना यात्रा की स्मृति में किया गया था। 

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Phase-wise demolition at PMCH: Alumni appeal for sparing historic buildings
पीएमसीएच - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ऐतिहासिक पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) का मेगा पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके तहत परिसर की कई इमारतों को गिराया जा चुका है। इस बीच कॉलेज के पूर्व विद्यार्थियों ने इस प्रोजेक्ट का विरोध किया है। उन्होंने एक भावुक बयान जारी कर इस प्रसिद्ध संस्थान की 'मुख्य विरासत' को बचाने की गुहार लगाई है, ताकि यह मुख्य इमारत इसकी स्थापना की कहानी बयां करती रहे।

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पीएमसीएच परिसर की इमारतों के पुनर्निर्माण के पहले चरण में इमारतें गिराने का काम कुछ माह पहले शुरू हुआ था। परिसर में आधुनिक व हाईराइज इमारतें बनाई जाएंगी। पीएमसीएच की स्थापना 1925 में प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज के रूप में की गई थी। यह कदम तत्कालीन प्रिंस ऑफ वेल्स की दिसंबर 1921 में पटना यात्रा को यादगार बनाने के लिए उठाया गया था। पटना मेडिकल कॉलेज की शुरुआत 1874 में बांकीपुर में टेंपल मेडिकल स्कूल से हुई थी। इसके बाद 1921 में पटना में शाही मेहमान (Prince of Wales) की यात्रा को यादगार बनाने के लिए पीएमसीएच के निर्माण की कल्पना की गई। 
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अधिकारियों ने बताया कि पुनर्विकास परियोजना के पहले चरण के तहत अब तक गंगा नदी के किनारे स्थित इस विशाल परिसर में पुराने चिकित्सा अधीक्षक का बंगला, जेल वार्ड, नर्स छात्रावास और कुछ अन्य संरचनाएं गिरा दी गई हैं। कुटीर भवन और नर्स स्कूल भी जल्द ही गिराया जाएगा।
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पटना से लंदन तक फैले पीएमसीएच के पूर्व विद्यार्थियों ने  परिसर की ऐतिहासिक इमारतों को ध्वस्त करने पर खेद जताया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों को बिहार और भारत की वास्तुकला और संस्थागत विरासत का एक असाधारण हिस्सा भी छीन लिया जाएगा। विश्वभर में मौजूद कई डॉक्टर इस पूर्व विद्यार्थी पीएमसीएच एल्युमनाई के हिस्सा हैं।

पीएमसीएच एल्युमनाई एसो. के अध्यक्ष सत्यजीत कुमार सिंह ने कहा, पीएमसीएच परिसर में इमारतें गिराए जाने से दुखी हैं। कई पुरानी इमारतें गिराई जा चुकी हैं। लेकिन हम बिहार सरकार से अपील करते हैं कि वे कम से कम ओल्ड बांकीपुर जनरल हॉस्पिटल बिल्डिंग और एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक को बचा लें, ताकि भावी पीढ़ियों को इस संस्थान की विरासत को जस का जस देख सकें। 


पटना में रह रहे डॉ. सिंह ने 1970 के दशक में इसी कॉलेज से एमबीबीएस व मास्टर्स की डिग्री ली थी। इसके बाद वे कई सालों तक ब्रिटेन व अन्य देशों में सेवारत रहे और फिर स्वदेश लौटे। उन्होंने कहा कि परिसर के विरासत भवनों को गिराए जाने की कल्पना करना ही उनके लिए दर्दनाक है। सिंह ने कहा कि कॉलेज 2025 में 100 साल का हो जाएगा। हम इसके भविष्य के छात्रों, पूर्व छात्रों और आने वाली पीढ़ियों को क्या दिखाएंगे। इसकी ऐतिहासिक इमारतों का विध्वंस सभी के लिए बहुत बड़ी क्षति होगी। सिंह ने कहा उन्होंने 1974 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और उनकी डिग्री पर पुराना नाम 'प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज' लिखा है।

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