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Bihar: प्रयास योजना महिलाओं को स्वावलंबन की ओर ले जाने वाली पहल, राज्यस्तरीय कार्यशाला में शामिल हुए कई संगठन
Wed, 11 Jun 2025 09:28 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Wed, 11 Jun 2025 09:28 PM IST
सार
Patna News: जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा ने कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाएं समूह से आगे बढ़कर अपनी व्यक्तिगत पहचान बनाएं। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा ऋण वापसी की दर 99 प्रतिशत से अधिक है, जो बैंकिंग संस्थानों में विश्वास का प्रतीक है।
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पटना में आयोजित प्रयास योजना के तहत कार्यशाला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी पटना में बुधवार को प्रयास व्यक्तिगत उद्यम योजना पर एक दिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को व्यक्तिगत ऋण के माध्यम से लघु उद्यमों की स्थापना के लिए प्रेरित करना और उन्हें आवश्यक संसाधन व मार्गदर्शन प्रदान करना था। यह कार्यशाला बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका), भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) और वुमन वर्ल्ड बैंकिंग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई।
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कार्यशाला में जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा, सिडबी के मुख्य महाप्रबंधक सत्यकी रस्तोगी और वुमन वर्ल्ड बैंकिंग की क्षेत्रीय प्रमुख कल्पना अय्यन सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधि, जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक, संकुल स्तरीय संघों की अध्यक्षाएं और सदस्याएं शामिल हुईं।
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समूह से आगे बढ़कर व्यक्तिगत पहचान की ओर
प्रयास योजना का मूल उद्देश्य यह है कि महिलाओं को समूह आधारित वित्तीय सहायता से आगे ले जाकर अब व्यक्तिगत ऋण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे खुद का उद्यम स्थापित कर सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें। योजना के अंतर्गत महिलाओं को 50 हजार से दो लाख रुपये तक का ऋण संकुल स्तरीय संघों के माध्यम से दिया जा रहा है। इससे महिलाएं सिलाई, दुकानदारी, पशुपालन, प्रसंस्करण, कृषि आधारित उद्यम और खाद्य उत्पाद निर्माण जैसे क्षेत्रों में अपना व्यवसाय स्थापित कर सकेंगी।
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नेतृत्वकर्ताओं के विचारों में महिला सशक्तिकरण की झलक
जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी हिमांशु शर्मा ने कहा कि अब समय आ गया है कि महिलाएं समूह से आगे बढ़कर अपनी व्यक्तिगत पहचान बनाएं। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा ऋण वापसी की दर 99 प्रतिशत से अधिक है, जो बैंकिंग संस्थानों में विश्वास का प्रतीक है। उनका मानना है कि महिलाएं सिर्फ घर तक सीमित न रहें, बल्कि आर्थिक निर्णयों में भी भागीदार बनें।
SIDBI के मुख्य महाप्रबंधक सत्यकी रस्तोगी ने कहा कि बिहार की महिलाएं अब केवल घरेलू कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बैंकिंग संस्थानों को महिलाओं को ऋण देने की प्रक्रिया को सरल और संवेदनशील बनाना चाहिए, जिससे अधिक महिलाएं इस योजना से लाभ उठा सकें।
वुमन वर्ल्ड बैंकिंग की क्षेत्रीय प्रमुख कल्पना अय्यन ने बताया कि वे पहले ही बिहार के चार जिलों में सात करोड़ रुपये से अधिक का ऋण स्वयं सहायता समूहों को उपलब्ध करा चुके हैं। अब वे व्यक्तिगत उद्यम की दिशा में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए काम कर रहे हैं।
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कार्यशाला में विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं। पटना की साधना देवी ने बताया कि उन्हें ₹1 लाख का ऋण मिला, जिससे उन्होंने अगरबत्ती निर्माण की इकाई शुरू की और अब तीन अन्य महिलाओं को रोजगार दे रही हैं। ऐसी कहानियों ने वहां मौजूद अन्य महिलाओं को प्रेरित किया और उनमें आत्मविश्वास की भावना भरी।
कार्यशाला में यह भी निर्णय लिया गया कि राज्य के अन्य जिलों में भी प्रयास योजना के तहत विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसमें समुदाय स्तर पर कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि इच्छुक महिलाओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान की जा सके।