{"_id":"67ceff065579ad44be0d7ac2","slug":"patna-news-jeevika-didi-yojana-35-89-lakh-women-became-self-reliant-through-agriculture-based-self-employment-2025-03-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bihar News: जीविका दीदियों की बदली तस्वीर, कृषि आधारित स्वरोजगार से 35.89 लाख महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bihar News: जीविका दीदियों की बदली तस्वीर, कृषि आधारित स्वरोजगार से 35.89 लाख महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर
Mon, 10 Mar 2025 08:32 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Mon, 10 Mar 2025 08:32 PM IST
सार
Patna News: बिहार की लाखों महिलाएं जीविका दीदी परियोजना से जुड़कर न केवल स्वावलंबन की राह पर अग्रसर हो रही हैं, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति में भी बड़ा बदलाव ला रही हैं। यहां कृषि आधारित स्वरोजगार से 35.89 लाख महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
विज्ञापन
जीविका दीदियों से मुलाकात करते सीएम नीतीश कुमार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त बनाने वाली जीविका परियोजना आज मिसाल बन चुकी है। राज्य की लाखों महिलाएं इस परियोजना से जुड़कर न केवल स्वावलंबन की राह पर अग्रसर हो रही हैं, बल्कि अपनी आर्थिक स्थिति में भी बड़ा बदलाव ला रही हैं। विशेष रूप से कृषि आधारित स्वरोजगार के जरिए 35 लाख 89 हजार महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
विज्ञापन
कृषि क्षेत्र में दीदियों की मजबूत भागीदारी
राज्य सरकार के कृषि विभाग के साथ समन्वय कर 515 कस्टम हायरिंग सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही 5,178 कृषि उद्यमों की स्थापना की गई है, जिससे ग्रामीण महिलाएं अब खेती को व्यावसायिक रूप में अपना रही हैं।
विज्ञापन
पशुपालन व मत्स्य पालन से बढ़ रही आय
पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सहयोग से मुर्गी, बकरी और भेड़ पालन योजनाएं तेजी से बढ़ी हैं। अब तक 8.09 लाख परिवार मुर्गी व बकरी पालन और 1.42 लाख परिवार दुग्ध उत्पादन से जुड़े हैं। 5,987 पशु सखियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें 5.97 लाख बकरीपालन परिवारों की सेवा में लगाया गया है।
विज्ञापन
अररिया में सीमांचल बकरी उत्पादक कंपनी के माध्यम से 19,956 परिवार लाभान्वित हुए हैं। वहीं, कोशी प्रमंडल में स्थापित कौशिकी दुग्ध उत्पादक कंपनी के तहत अब तक 829 दुग्ध संग्रहण केंद्र खोले गए हैं, जहां 26,280 पशुपालक रोजाना 70 हजार लीटर दूध का संग्रहण कर रहे हैं।
मधुमक्खी पालन व महिला उद्यमिता को भी बढ़ावा
अब तक 490 मधुमक्खी पालन उत्पादक समूह गठित किए गए हैं। वहीं, आईआईएम कोलकाता के सहयोग से 150 दीदियों को महिला उद्यमिता प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे व्यवसायिक रूप से अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं।
बचत, बैंकिंग और बीमा से मिली आर्थिक सुरक्षा
2006 से अब तक 10.63 लाख स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं, जिनमें 1.35 करोड़ महिलाएं जुड़ी हैं। अब तक 10.36 लाख समूहों के बचत खाते खोले जा चुके हैं। बैंकों ने 48,516 करोड़ रुपये का ऋण इन समूहों को प्रदान किया है। इसके अलावा 87.21 लाख सदस्यों का बीमा भी किया गया है। 6,109 बैंक सखियों को प्रशिक्षित कर ग्राहक सेवा केंद्र खोले गए हैं, जो गांवों में डिजिटल बैंकिंग की पहुंच बना रही हैं।
लवंग कुमारी की सेवा से कम हो रही बकरियों की मृत्यु दर
कटिहार जिले के कुर्सेला प्रखंड की लवंग कुमारी आज एक पशु सखी के रूप में न केवल अपनी कमाई कर रही हैं, बल्कि समाज की सेवा भी कर रही हैं। वे हर महीने 2-3 हजार रुपये कमाती हैं और बकरी पालकों को वैक्सीनेशन जैसी सेवाएं देती हैं। पिछले वर्ष उन्होंने 840 बकरियों को टीका लगाया, जिससे बकरियों की मृत्यु दर में गिरावट आई।
दीपा कुमारी ने किराना दुकान से शुरू की आत्मनिर्भरता की राह
कटिहार जिले की दीपा कुमारी ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 20 हजार का लोन लेकर किराना दुकान खोली। बाद में 50 हजार का लोन लेकर दुकान का विस्तार किया। आज वह प्रति माह 15 हजार रुपये की कमाई कर रही हैं।
मीरा देवी की दोहरी सफलता की कहानी
शिवहर जिले की मीरा देवी पहले आर्थिक संकट से जूझ रही थीं। लेकिन जीविका से जुड़ने के बाद उन्होंने 50 हजार का लोन लेकर भैंस पालन शुरू किया। बाद में 70 हजार रुपये का ऋण लेकर मिट्टी का कुल्हड़ बनाने का प्लांट लगाया। आज उनकी सालाना कमाई 3.60 लाख रुपये हो गई है। कुल्हड़ निर्माण से हर महीने 25 से 30 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।
जीविका परियोजना महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त मॉडल बनकर उभरी है। इससे न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है, बल्कि महिलाओं को स्वाभिमान और सम्मान से जीवन जीने का अवसर मिल रहा है। स्वरोजगार की इस नई लहर से गांव-गांव में समृद्धि की बयार बह रही है।