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Bihar News: नीचे मछली-ऊपर बिजली, किसानों के लिए हरित ऊर्जा और आर्थिक समृद्धि का नया मॉडल; जानें
Sat, 25 Jan 2025 08:19 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Sat, 25 Jan 2025 08:19 PM IST
सार
Patna News: बिहार में 'नीचे मछली, ऊपर बिजली' योजना के तहत तालाबों में सोलर पैनल से हरित ऊर्जा उत्पादन और साथ ही मछली पालन किया जा रहा है। यह मॉडल किसानों की आय दोगुनी करने और जल संरक्षण में मददगार साबित हो रहा है।
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नीचे मछली-ऊपर बिजली योजना
- फोटो : एआई जनरेटेड इमेज
विस्तार
बिहार में बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के बीच राज्य सरकार ने गैर-परंपरागत ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी एक नई पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में हरित ऊर्जा उत्पादन की महत्वाकांक्षी योजना ‘नीचे मछली, ऊपर बिजली’ ने सतत विकास की दिशा में मील का पत्थर स्थापित किया है। इस योजना के तहत तालाबों में मछली पालन के साथ सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे किसानों को दोहरे लाभ मिल रहे हैं।
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ऐसे मिला रहा आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
राज्य में जमीन की कमी और सौर ऊर्जा के लिए जगह की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट्स का उपयोग किया जा रहा है। इसके तहत दरभंगा जिले में 16 मेगावाट और सुपौल जिले में 525 केबी का सोलर पावर प्लांट पहले ही स्थापित किया जा चुका है। इन प्लांट्स से उत्पादित बिजली को सीधे पावर ग्रिड के माध्यम से शहरों में आपूर्ति किया जाता है। सोलर प्लेटों के नीचे तालाबों में मछली पालन होता है, जिससे मछली उत्पादन में भी बढ़ोतरी हो रही है।
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जलवायु और कृषि पर सकारात्मक प्रभाव
इस तकनीक से पानी का वाष्पीकरण कम हो रहा है, जिससे जल संरक्षण में मदद मिल रही है। सोलर प्लेट्स के कारण तालाबों में पानी की वाटर कॉलिंग की समस्या खत्म हो रही है, जिससे राज्य सरकार का भारी खर्च बच रहा है। यह मॉडल पर्यावरण और आर्थिक समृद्धि दोनों का उत्कृष्ट उदाहरण है।
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मछली उत्पादन में बिहार का बढ़ता योगदान
बिहार में नौ लाख हेक्टेयर नमी वाली भूमि है, जो मछली पालन के लिए उपयुक्त है। राज्य में मीठे पानी की मछलियां जैसे रोहू, कतला, मांगुर और बचवा की मांग नेपाल और बांग्लादेश में काफी अधिक है। वर्तमान में बिहार मीठे पानी की मछली उत्पादन में देश में चौथे स्थान पर है। नीतीश सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं के परिणामस्वरूप, राज्य में मछली उत्पादन में ढाई गुना वृद्धि हुई है। इससे आंध्र प्रदेश की मछलियों का एकाधिकार खत्म हो गया है।
युवाओं को आकर्षित करता मत्स्य पालन
राज्य में मछली बीज उत्पादन के क्षेत्र में भी तेजी से काम हो रहा है। बिहार में 793 मिलियन मछली बीज का उत्पादन होता है, जो कुल मांग का दो-तिहाई है। मत्स्य-पालन में युवाओं की दिलचस्पी बढ़ रही है और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भागीदारी में इजाफा हो रहा है।
किसानों की आय दोगुनी: एक नई उम्मीद
नीचे मछली और ऊपर बिजली के मॉडल ने किसानों की आय में दोगुनी वृद्धि की है। यह मॉडल न केवल आर्थिक समृद्धि ला रहा है, बल्कि किसानों को पर्यावरण के प्रति जागरूक भी बना रहा है।