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Bihar: HIV-सिफलिस के ऊर्ध्वाधर संचरण उन्मूलन पर राष्ट्रीय समीक्षा बैठक, दो दिवसीय आयोजन में क्या कुछ हो रहा

Tue, 11 Feb 2025 08:27 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Tue, 11 Feb 2025 08:27 PM IST
सार

Patna News: बैठक का उद्देश्य एचआईवी और सिफलिस के ऊर्ध्वाधर संचरण को रोकने के लिए किए गए कार्यों की समीक्षा और संबंधित अधिकारियों की क्षमता निर्माण करना है। भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश में इन संक्रमणों के ऊर्ध्वाधर संचरण को पूरी तरह खत्म करना है।

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Patna: National review meeting on elimination of vertical transmission of HIV-syphilis Health Department event
एचआईवी संक्रमण - फोटो : Freepik.com

विस्तार

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार के मार्गदर्शन में बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति (BSACS), स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार द्वारा पटना में एचआईवी और सिफलिस के ऊर्ध्वाधर संचरण (EVTHS) के उन्मूलन विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा और क्षमता निर्माण बैठक का आयोजन किया जा रहा है। यह बैठक 12 और 13 फरवरी 2025 को होटल लेमन ट्री में आयोजित की जाएगी।

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इस महत्वपूर्ण बैठक का उद्देश्य एचआईवी और सिफलिस के ऊर्ध्वाधर संचरण (Vertical Transmission) को रोकने के लिए किए गए कार्यों की समीक्षा और संबंधित अधिकारियों की क्षमता निर्माण करना है। भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश में इन संक्रमणों के ऊर्ध्वाधर संचरण को पूरी तरह खत्म करना है।
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बैठक में भाग लेंगे देशभर के विशेषज्ञ और स्वास्थ्य अधिकारी
बैठक में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अपर सचिव सह महानिदेशक, उपमहानिदेशक-BSD, CST, PMR सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी, सलाहकार एवं देशभर के सभी राज्य एड्स नियंत्रण समितियों के नामित प्रतिनिधि शामिल होंगे।
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इस बैठक में लगभग 150 प्रतिभागी भौतिक रूप से भाग लेंगे, जबकि कई अन्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। इस दौरान विभिन्न राज्यों द्वारा अब तक प्राप्त आंकड़ों की समीक्षा की जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि वर्तमान प्रयास कितने प्रभावी रहे हैं तथा किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
 
ऊर्ध्वाधर संचरण का अर्थ और इसका उन्मूलन क्यों आवश्यक?
ऊर्ध्वाधर संचरण (Vertical Transmission) का तात्पर्य गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान मां से शिशु में एचआईवी (HIV) और सिफलिस (Syphilis) संक्रमण के फैलने से है। इसे मां से बच्चे तक संक्रमण (Mother-to-Child Transmission - MTCT) भी कहा जाता है। अगर समय रहते इन संक्रमणों को रोका नहीं गया तो नवजात शिशु भी जन्म से ही इन गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो सकता है। इससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और कई स्वास्थ्य जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
 
भारत सरकार के प्रमुख लक्ष्य
एचआईवी के ऊर्ध्वाधर संचरण को खत्म करना- भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक एचआईवी के ऊर्ध्वाधर संचरण को पूरी तरह खत्म करना है। इसके तहत गर्भवती महिलाओं में एचआईवी संक्रमण की जांच, समय पर उपचार और नवजात की सुरक्षा के लिए विशेष चिकित्सा उपायों को लागू किया जा रहा है।
 
सिफलिस के ऊर्ध्वाधर संचरण को खत्म करना- सिफलिस का संक्रमण भी गर्भावस्था के दौरान मां से शिशु तक फैल सकता है, जिससे नवजात शिशु में जन्मजात सिफलिस (Congenital Syphilis) जैसी गंभीर समस्या हो सकती है। 2030 तक इसके ऊर्ध्वाधर संचरण को खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
 
संक्रमण रोकने के लिए उठाए जा रहे महत्वपूर्ण कदम
एचआईवी और सिफलिस के ऊर्ध्वाधर संचरण को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न रणनीतियां अपनाई जा रही हैं:-
1. गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच- प्रत्येक गर्भवती महिला की एचआईवी और सिफलिस की समय पर जांच सुनिश्चित की जा रही है, ताकि संक्रमण की स्थिति का शीघ्र पता लगाया जा सके और समय पर उपचार शुरू किया जा सके।
2. संक्रमित महिलाओं का समुचित इलाज- अगर किसी गर्भवती महिला में एचआईवी या सिफलिस की पुष्टि होती है, तो उसे समुचित दवाइयां और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाती है। एचआईवी के लिए एंटी-रेट्रोवाइरल थेरेपी (ART) और सिफलिस के लिए एंटीबायोटिक्स का उपयोग किया जाता है।
3. सुरक्षित प्रसव के लिए विशेष उपाय- संक्रमित महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं, जैसे कि सीजेरियन सेक्शन (C-section) या संक्रमण-रोधी दवाओं का उपयोग।
4. स्तनपान के दौरान सतर्कता- एचआईवी संक्रमित माताओं के लिए विशेष निर्देश दिए जाते हैं कि वे अपने बच्चे को स्तनपान कराएं या न कराएं, इस पर चिकित्सीय परामर्श लिया जाए। कई मामलों में सुरक्षित स्तनपान के लिए संक्रमण-रोधी उपायों का पालन किया जाता है।

 
बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति की प्रतिबद्धता
बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति (BSACS) राज्य में एचआईवी और सिफलिस के ऊर्ध्वाधर संचरण के उन्मूलन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। समिति गर्भवती महिलाओं की जांच, समय पर उपचार, सुरक्षित प्रसव और संक्रमण-रोधी रणनीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन पर लगातार कार्य कर रही है। राज्य में इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि भारत सरकार के 2030 के लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त किया जा सके और आने वाली पीढ़ी को एचआईवी और सिफलिस के खतरे से मुक्त किया जा सके।

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