{"_id":"69f85d66c2381fa11c095775","slug":"nalanda-mbbs-student-solver-gang-leader-failed-in-mbbs-exam-expanded-network-through-bihar-to-rajasthan-patna-news-c-1-1-noi1243-4240753-2026-05-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bihar News: तीन साल से फेल हो रहा MBBS छात्र बना सॉल्वर गैंग का मास्टरमाइंड, कई राज्यों में फैला नेटवर्क","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bihar News: तीन साल से फेल हो रहा MBBS छात्र बना सॉल्वर गैंग का मास्टरमाइंड, कई राज्यों में फैला नेटवर्क
Mon, 04 May 2026 03:11 PM IST
पटना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Mon, 04 May 2026 03:11 PM IST
सार
Bihar News: नालंदा के वीएमआईएस हॉस्टल से नीट परीक्षा में सॉल्वर गैंग चलाने का खुलासा हुआ है। गैंग का मास्टरमाइंड उज्ज्वल राज फरार है, जबकि उसके साथी गिरफ्तार हो चुके हैं। लाखों की डील वाले इस नेटवर्क को पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
पुलिस गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नालंदा के वर्धमान आयुर्विज्ञान संस्थान (VIMS) का हॉस्टल, जहां आमतौर पर पढ़ाई और प्रैक्टिकल की तैयारी होती है, वहीं से NEET परीक्षा में धांधली का बड़ा खेल संचालित किया जा रहा था। इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड उज्ज्वल राज है, एक ऐसा छात्र, जो पढ़ाई में लगातार असफल रहा, लेकिन अवैध ‘सेटिंग’ के कारोबार में सक्रिय हो गया।
सफलता नहीं मिली तो बना मास्टरमाइंड
उज्ज्वल राज, VIMS के 2022 बैच का छात्र है। नियमों के अनुसार उसे अब तक एमबीबीएस के अंतिम वर्षों में होना चाहिए था, लेकिन बार-बार असफल होने के कारण वह अभी भी दूसरे वर्ष में ही रुका हुआ है। इसी असफलता के बीच उसने परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने का रास्ता चुना और सॉल्वर गैंग खड़ा कर लिया।
कैसे चलता था रैकेट?
जांच में सामने आया कि यह गिरोह दूसरे राज्यों—खासतौर पर राजस्थान और छत्तीसगढ़—से ‘प्रोफेशनल सॉल्वर’ बुलाता था, जो असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देते थे। इसके बदले प्रति उम्मीदवार 20 से 25 लाख रुपये तक वसूले जाते थे। इस नेटवर्क में उज्ज्वल का सहयोगी उसका कॉलेज साथी अवधेश कुमार और ममेरा भाई अमन कुमार भी शामिल थे, जो लंबे समय से हॉस्टल में रहकर गतिविधियां संचालित कर रहे थे।
विज्ञापन
मास्टरमाइंड फरार
पावापुरी पुलिस ने हॉस्टल में छापेमारी कर इस नेटवर्क का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान 2.95 लाख रुपये नकद और दो लग्जरी वाहन (स्कॉर्पियो और ब्रेजा) जब्त किए गए। हालांकि, मुख्य आरोपी उज्ज्वल राज पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया।
ये भी पढ़ें- Bihar News : 2001 में बनी बिहार की लाइफलाइन टूटी; विक्रमशिला सेतु बीच से टूटकर नदी में समाया
सीबीआई की नजर में भी था नेटवर्क
सूत्रों के मुताबिक, इस गिरोह की गतिविधियां पहले से ही केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर थीं। हाल ही में सीबीआई टीम भी उज्ज्वल की तलाश में संस्थान पहुंची थी, जिससे नेटवर्क के बड़े दायरे का संकेत मिलता है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने बिहार के कई जिलों के 10–12 अभ्यर्थियों के साथ डील कर रखी थी। लेकिन समय रहते कार्रवाई होने से फर्जी एडमिट कार्ड जारी नहीं हो सके और परीक्षा से पहले ही पूरी साजिश विफल हो गई।
फिलहाल, पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। मोबाइल डेटा और संपर्कों के आधार पर आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
विज्ञापन
सफलता नहीं मिली तो बना मास्टरमाइंड
उज्ज्वल राज, VIMS के 2022 बैच का छात्र है। नियमों के अनुसार उसे अब तक एमबीबीएस के अंतिम वर्षों में होना चाहिए था, लेकिन बार-बार असफल होने के कारण वह अभी भी दूसरे वर्ष में ही रुका हुआ है। इसी असफलता के बीच उसने परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने का रास्ता चुना और सॉल्वर गैंग खड़ा कर लिया।
विज्ञापन
कैसे चलता था रैकेट?
जांच में सामने आया कि यह गिरोह दूसरे राज्यों—खासतौर पर राजस्थान और छत्तीसगढ़—से ‘प्रोफेशनल सॉल्वर’ बुलाता था, जो असली अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देते थे। इसके बदले प्रति उम्मीदवार 20 से 25 लाख रुपये तक वसूले जाते थे। इस नेटवर्क में उज्ज्वल का सहयोगी उसका कॉलेज साथी अवधेश कुमार और ममेरा भाई अमन कुमार भी शामिल थे, जो लंबे समय से हॉस्टल में रहकर गतिविधियां संचालित कर रहे थे।
विज्ञापन
मास्टरमाइंड फरार
पावापुरी पुलिस ने हॉस्टल में छापेमारी कर इस नेटवर्क का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान 2.95 लाख रुपये नकद और दो लग्जरी वाहन (स्कॉर्पियो और ब्रेजा) जब्त किए गए। हालांकि, मुख्य आरोपी उज्ज्वल राज पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया।
ये भी पढ़ें- Bihar News : 2001 में बनी बिहार की लाइफलाइन टूटी; विक्रमशिला सेतु बीच से टूटकर नदी में समाया
सीबीआई की नजर में भी था नेटवर्क
सूत्रों के मुताबिक, इस गिरोह की गतिविधियां पहले से ही केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर थीं। हाल ही में सीबीआई टीम भी उज्ज्वल की तलाश में संस्थान पहुंची थी, जिससे नेटवर्क के बड़े दायरे का संकेत मिलता है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने बिहार के कई जिलों के 10–12 अभ्यर्थियों के साथ डील कर रखी थी। लेकिन समय रहते कार्रवाई होने से फर्जी एडमिट कार्ड जारी नहीं हो सके और परीक्षा से पहले ही पूरी साजिश विफल हो गई।
फिलहाल, पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। मोबाइल डेटा और संपर्कों के आधार पर आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।