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Bihar News: मोकामा टाल में फसलों पर दोहरी मार, वेस्टेज वाटर से किसान बेहाल; मामला हाईकोर्ट की चौखट पर
Wed, 03 Dec 2025 04:13 PM IST
पटना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोकामा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोकामा
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Wed, 03 Dec 2025 04:13 PM IST
सार
मोकामा नगर परिषद द्वारा प्रतिदिन लगभग दो लाख लीटर वेस्टेज वाटर टाल में छोड़े जाने से किसान बेहद आक्रोशित हैं। लगातार पानी भरने से 700–800 बीघे में लगी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और नुकसान बढ़ता जा रहा है।
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डूबी हुई फसल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मोकामा नगर परिषद की लापरवाही से परेशान किसान अब खुलकर विरोध में उतर आए हैं। किसानों का आरोप है कि नगर परिषद द्वारा वेस्टेज वाटर को री-ट्रीट करने के बाद प्रतिदिन करीब दो लाख लीटर पानी मोकामा टाल में छोड़ा जा रहा है। इस लगातार बहाव से बुआई की गई फसलें डूब रही हैं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों ने कहा कि मोकामा टाल क्षेत्र पहले से ही प्राकृतिक चुनौतियों से जूझता रहता है, ऊपर से अब सिस्टम की मार ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं। उनका कहना है कि वे दो तरफा संकट में फंस गए हैं, लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही। औटा कृषि विकास समिति से जुड़े कई किसान सीओ से लेकर नगर परिषद के अधिकारियों और एसटीपी प्लांट के प्रबंधक तक सभी के दरवाज़े खटखटा चुके हैं, लेकिन समाधान दूर की बात लग रही है। थकहारकर किसानों ने अब मामला पीएमओ से होते हुए हाईकोर्ट तक पहुंचा दिया है।
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किसानों ने कहा कि मोकामा टाल क्षेत्र पहले से ही प्राकृतिक चुनौतियों से जूझता रहता है, ऊपर से अब सिस्टम की मार ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं। उनका कहना है कि वे दो तरफा संकट में फंस गए हैं, लेकिन उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही। औटा कृषि विकास समिति से जुड़े कई किसान सीओ से लेकर नगर परिषद के अधिकारियों और एसटीपी प्लांट के प्रबंधक तक सभी के दरवाज़े खटखटा चुके हैं, लेकिन समाधान दूर की बात लग रही है। थकहारकर किसानों ने अब मामला पीएमओ से होते हुए हाईकोर्ट तक पहुंचा दिया है।
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किसानों के अनुसार अब तक 700 से 800 बीघे में लगी फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है और नुकसान लगातार बढ़ रहा है, क्योंकि वेस्टेज पानी का बहाव अभी भी जारी है। किसानों ने इस पर तुरंत रोक लगाने और उचित मुआवजा देने की मांग की है, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर नगर परिषद का कोई भी अधिकारी मीडिया से बात करने को तैयार नहीं है। किसान अब अदालत और आंदोलन दोनों रास्तों को मजबूरी में अपना विकल्प मान रहे हैं।