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Bihar: बिहार में यहां बनेगी देश की सबसे बड़ी बैटरी भंडारण सौर परियोजना, जुलाई-अगस्त से शुरू होने की उम्मीद
Sun, 02 Mar 2025 09:14 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Sun, 02 Mar 2025 09:14 PM IST
सार
Kajra Solar Energy Project: ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शिता और कुशल नेतृत्व में बिहार ने ऊर्जा क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। अब राज्य सरकार नवीकरणीय ऊर्जा की ओर एक ठोस कदम बढ़ा रही है।
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ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार अक्षय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है। लखीसराय जिले के कजरा में दो सौर ऊर्जा परियोजनाओं से 301 मेगावाट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होगा, जो राज्य के ऊर्जा भविष्य को और अधिक स्थिर एवं आत्मनिर्भर बनाएगा। यह परियोजना देश की सबसे बड़ी 495 मेगावाट आवर बैटरी भंडारण क्षमता से लैस होगी, जिससे पीक आवर्स, खासकर रात के समय, निर्बाध रूप से बिजली की आपूर्ति की जा सकेगी।
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इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राज्य मंत्रिपरिषद की स्वीकृति मिलने के बाद निविदा जारी कर दी गई है। ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शिता और कुशल नेतृत्व में बिहार ने ऊर्जा क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। अब राज्य सरकार नवीकरणीय ऊर्जा की ओर एक ठोस कदम बढ़ा रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा को एक नई दिशा मिलेगी।
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राज्य की सबसे बड़ी हरित ऊर्जा परियोजना
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि यह परियोजना बिहार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ देश में सबसे बड़ी बैटरी भंडारण प्रणाली की स्थापना के लिए भी जानी जाएगी। इस परियोजना के पूरा होने पर 301 मेगावाट हरित ऊर्जा उपलब्ध होगी और 495 मेगावाट आवर विद्युत बैटरी भंडारण प्रणाली स्थापित की जाएगी।
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इस अत्याधुनिक भंडारण प्रणाली के कारण राज्य के उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता की बिजली और पीक आवर्स में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही यह परियोजना बिहार के नवीकरणीय ऊर्जा दायित्व (Renewable Energy Obligation) को पूरा करने में भी मददगार होगी।
कार्बन उत्सर्जन में कमी की ओर मजबूत कदम
बिहार सरकार इस परियोजना को 'जल-जीवन-हरियाली' अभियान से जोड़कर हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। अक्षय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से बिजली उत्पादन बढ़ने से राज्य में कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे जलवायु परिवर्तन से निपटने में सहायता मिलेगी।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह पर्यावरणीय लाभ भी सुनिश्चित करेगी। अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देकर हम पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा।
241 मेगावाट आवर बैटरी ऊर्जा भंडारण से आत्मनिर्भर बनेगा बिहार
इस परियोजना में 241 मेगावाट आवर की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित की जाएगी, जो राज्य की ऊर्जा जरूरतों को अधिक स्थिर और कुशल बनाने में सहायक होगी। यह प्रणाली विशेष रूप से रात के समय बिजली आपूर्ति में सुधार करेगी, जिससे उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिल सकेगी।
ऊर्जा विभाग के अनुसार, बिहार इस परियोजना के जरिए देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल होगा, जहां अत्याधुनिक बैटरी भंडारण प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। इससे पीक समय में भी सस्ती और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
दो चरणों में पूरी होगी परियोजना
कजरा सौर ऊर्जा परियोजना को दो चरणों में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में 185 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन और 254 मेगावाट आवर बैटरी भंडारण प्रणाली स्थापित की जाएगी। दूसरे चरण में 116 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन और 241 मेगावाट आवर बैटरी भंडारण का विकास किया जाएगा।
इस परियोजना के लिए 1232 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया है, जिससे इसके क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न आए। परियोजना के पहले चरण की जिम्मेदारी मेसर्स लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) को सौंपी गई है और काम तेजी से चल रहा है। इस साल के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
80:20 वित्तीय मॉडल से होगा क्रियान्वयन
इस परियोजना के लिए 1055.72 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की गई है। इसे 80:20 के वित्तीय मॉडल पर विकसित किया जा रहा है, जिसमें 80% राशि वित्तीय संस्थानों से और 20% पूंजीगत निवेश के रूप में जुटाई जा रही है।
इस परियोजना के निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी। निर्माण, रखरखाव और संचालन से जुड़े कार्यों के लिए कुशल एवं अकुशल श्रमिकों को रोजगार मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। ऊर्जा विभाग का मानना है कि यह परियोजना बिहार के ऊर्जा उत्पादन को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ राज्य में नई नौकरियों के अवसर भी उत्पन्न करेगी। इससे स्थानीय समुदायों को सीधा लाभ मिलेगा।