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बिहार: सीजेआई सूर्यकांत छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर क्या बोले? कई सवालों का भी दिया जवाब

Sat, 26 Sep 2026 04:18 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Sat, 26 Sep 2026 04:18 PM IST
सार

भारत के मुख्य न्यायाधीश आज पटना में छात्रों के सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बातचीत की। लोकभवन में एक कार्यक्रम के दौरान बच्चों में नशे की लत पर चिंता भी जताई। सीजेआई ने और क्या कहा? आइये जानते हैं...

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CJI Surya Kant Holds Open Interaction with Students in Patna, Protest and Collegium Child Protection Issue
चीफ जस्टिस सूर्यकांत - फोटो : एएनआई

विस्तार

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि न्यायपालिका छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के मौलिक अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यदि इस अधिकार के उल्लंघन से जुड़े मामले अदालत के सामने आते हैं तो न्यायपालिका आंखें नहीं मूंदेगी। सीजेआई पटना स्थित चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने छात्रों के साथ पहली बार 'ओपन हाउस' संवाद किया। उन्होंने कहा कि वह छात्रों के साथ औपचारिक बातचीत के बजाय बेबाक सवाल-जवाब करना पसंद करेंगे। 

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छात्रा ने पूछा- शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई क्यों?
'ओपन हाउस' संवाद के दौरान एक छात्रा ने शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की प्रतिक्रिया को लेकर सवाल किया। इस पर सीजेआई ने कहा कि पुलिस की कथित कठोर कार्रवाई से जुड़े मामलों में अदालतें आंखें नहीं मूंदेंगी। उन्होंने छात्रों के शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने के अधिकार की रक्षा के लिए न्यायपालिका की प्रतिबद्धता दोहराई।
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कॉलेजियम में असहमति सार्वजनिक करने पर भी सवाल
बातचीत के दौरान एक छात्र ने सीजेआई से पूछा कि कॉलेजियम के भीतर असहमति से जुड़े विचारों को दर्ज तो किया जाता है, लेकिन उन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी जानकारी का खुलासा, भले ही उसका उद्देश्य अच्छा हो, संबंधित व्यक्ति को मुश्किल स्थिति में डाल सकता है। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति की गरिमा का सवाल हो तो पारदर्शिता की भी एक सीमा होती है। सीजेआई ने सवाल किया कि यदि कॉलेजियम की कार्यवाही में किसी मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश के बारे में नकारात्मक टिप्पणी दर्ज हो और वह सार्वजनिक हो जाए तो वह अपने पद पर किस तरह काम कर पाएगा।
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चार साल की लॉ डिग्री के प्रस्ताव की सराहना
सीजेआई सूर्यकांत ने सीएनएलयू के कुलपति और वरिष्ठ विधिवेत्ता फैजान मुस्तफा के उस प्रस्ताव की भी सराहना की, जिसमें पांच साल की लॉ डिग्री को चार साल की अकादमिक पढ़ाई और अंतिम वर्ष में अनिवार्य कोर्ट अप्रेंटिसशिप के साथ पूरा करने की बात कही गई है। सीजेआई ने इस प्रस्ताव को 'नई और स्वागत योग्य सोच' बताया। उनके अनुसार, इस व्यवस्था से न्यायिक सेवा परीक्षाओं के लिए अलग से एक साल की प्रैक्टिस की आवश्यकता को खत्म करने में मदद मिल सकती है। सीजेआई सूर्यकांत के साथ पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव भी सीएनएलयू पहुंचे। वह विश्वविद्यालय के चांसलर भी हैं।

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बच्चों में नशे की लत को लेकर क्या बोले सीजेआई
इससे पहले सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि बच्चों में नशे की लत को केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंता के तौर पर नहीं, बल्कि बाल संरक्षण के मुद्दे के रूप में भी समझने की जरूरत है। पटना स्थित बिहार लोक भवन में ‘चाइल्डहुड बियॉन्ड ड्रग्स: प्रोटेक्शन, केयर एंड रीइंटीग्रेशन’ विषय पर पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह व्याख्यान में उन्होंने हालिया लैंसेट अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि भारत में कम से कम हर पांच में से एक किशोर में नशे के दुरुपयोग का मध्यम से गंभीर जोखिम है। उन्होंने बच्चों में नशे की लत से निपटने के लिए संवेदनशील और बाल-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। सूर्यकांत ने कहा कि नशे की समस्या से जूझ रहे बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनकी गरिमा और आत्मसम्मान की भी रक्षा जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास का अर्थ केवल नशे से बाहर निकालना नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां बच्चा फिर से शिक्षा, रिश्तों, खेल, विश्वास और भविष्य को लेकर आत्मविश्वास हासिल कर सके। उन्होंने कहा कि बच्चों को मौजूदा मुश्किलों से आगे बढ़कर एक बेहतर भविष्य की उम्मीद मिलनी चाहिए।

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