Bihar: ईंट-भट्टों पर कार्यरत बच्चों की मुक्ति के लिए चलेगा अभियान, बाल श्रम कराने पर होगी दो साल तक की सजा
Bihar: अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया है। लेकिन अभी भी कई बच्चे ईंट-भट्टों और कारखानों में काम करने को मजबूर हैं। इन बच्चों की मुक्ति के लिए विशेष छापेमारी अभियान चलाया जाएगा।
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बिहार को बाल श्रम मुक्त राज्य बनाने की दिशा में श्रम संसाधन विभाग एक विशेष राज्यव्यापी अभियान चलाने जा रहा है। इसके तहत ईंट-भट्टों, कारखानों और घरों में कार्यरत बच्चों की पहचान कर उन्हें मुक्त कराया जाएगा। साथ ही पूरे राज्य में बाल श्रम, बाल विवाह, बाल अधिकार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर पंचायत स्तर तक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
यह निर्णय सोमवार को राजधानी पटना स्थित नियोजन भवन के मंथन सभागार में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार ने की। बैठक में आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह, विधायक श्रेयसी सिंह, रामविलास कामत, विधान पार्षद विजय सिंह, अनिल कुमार, रविंद्र प्रसाद सिंह, सदस्य सुशील कुमार, शौकत अली, राजेश भारती सहित श्रमायुक्त, आयोग के सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पारंपरिक मेलों के माध्यम से चलेगा जागरूकता अभियान
बैठक में निर्णय लिया गया कि सोनपुर मेला, श्रावणी मेला, छठ पर्व जैसे बिहार के पारंपरिक त्योहारों और आयोजनों में बाल श्रम के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाने हेतु विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में नुक्कड़ नाटक, लोकगीत, झांकी, पोस्टर प्रदर्शनी आदि के माध्यम से बाल अधिकारों से जुड़ी जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाएगी।
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ईंट-भट्टों पर विशेष छापेमारी अभियान
अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया है। लेकिन अभी भी कई बच्चे ईंट-भट्टों और कारखानों में काम करने को मजबूर हैं। इन बच्चों की मुक्ति के लिए विशेष छापेमारी अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अपार्टमेंट्स और घरों की भी जांच की जाए, जहां बाल मजदूरी की आशंका हो।
अभिभावकों को योजनाओं की जानकारी देने का निर्देश
उन्होंने कहा कि सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन बाल श्रम का प्रमुख कारण है। इसलिए जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा समाधान है। विभाग के अधिकारी स्कूलों में जाकर बच्चों के माता-पिता को श्रम विभाग की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दें ताकि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजें, न कि काम पर।
सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी जागरूकता
बैठक में यह भी तय किया गया कि सोशल मीडिया के साथ-साथ प्रखंड और पंचायत स्तर पर सूचना बूथ, कला और शिल्प गतिविधियां, कार्यशालाएं तथा व्यक्तिगत कहानियों के जरिए भी बाल श्रम के खिलाफ जागरूकता फैलाई जाएगी। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि बाल श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाल मजदूरी कराते पकड़े जाने पर छह माह से लेकर दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।