Bihar SIR: 'कांग्रेस-राजद का दोहरा रवैया उनकी हताशा का नतीजा', विपक्ष पर बिफरे जदयू नेता राजीव रंजन प्रसाद
Bihar SIR: राजीव रंजन प्रसाद ने सवाल किया कि अगर एसआईआर में कोई गड़बड़ी है, तो अब तक इन दलों ने चुनाव आयोग को कोई ठोस सबूत या सुधार का सुझाव क्यों नहीं दिया। उनके मुताबिक, इन दलों को लोकतंत्र की नहीं बल्कि खोई हुई सत्ता की चिंता है।
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जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने बिहार में एसआईआर को लेकर कांग्रेस और राजद पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही विपक्ष को अपनी हार का अंदेशा हो गया है, इसलिए उनकी भाषा और तेवर बदलने लगे हैं।
राजीव रंजन प्रसाद ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र की दुहाई देने वाले वही नेता हैं जिनका राजनीतिक इतिहास बूथ लूट, बाहुबल और बोगस वोटिंग जैसी घटनाओं से भरा पड़ा है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची को साफ और पारदर्शी बनाने के लिए एसआईआर प्रक्रिया लागू की गई है, लेकिन कांग्रेस और राजद अब लोकतंत्र की चिंता का दिखावा कर रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि अतीत में इन दलों ने बाहुबलियों को संरक्षण देकर खुलेआम बूथ कब्जाए और वोटरों के अधिकार छीने। साथ ही याद दिलाया कि बिहार में बूथ लूट का पहला मामला 1957 में बेगूसराय के रचियाही गांव में दर्ज हुआ था। 1980 और 90 के दशक में तो यह प्रवृत्ति चरम पर थी।
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जदयू प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि बिना नोटिस और जवाब के किसी का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। इसके बावजूद तेजस्वी यादव और राहुल गांधी झूठ व भ्रम फैलाने में लगे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव खुद दो वोटर आईडी कार्ड रखने के मामले में शामिल पाए गए, फिर भी नैतिक उपदेश देते हैं।
उन्होंने कहा कि ईवीएम, सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल वोटर लिस्ट जैसी व्यवस्थाओं ने चुनावी धांधली की गुंजाइश खत्म कर दी है, यही वजह है कि कांग्रेस और राजद अब चुनाव आयोग पर निराधार आरोप लगा रहे हैं।
राजीव रंजन प्रसाद ने सवाल किया कि अगर एसआईआर में कोई गड़बड़ी है, तो अब तक इन दलों ने चुनाव आयोग को कोई ठोस सबूत या सुधार का सुझाव क्यों नहीं दिया। उनके मुताबिक, इन दलों को लोकतंत्र की नहीं बल्कि खोई हुई सत्ता की चिंता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करने वाले कभी बूथ लूट नहीं करते और आपातकाल थोपकर लोकतंत्र का गला घोंटने वालों के मुंह से लोकतंत्र की बात शोभा नहीं देती। जनता अब जागरूक है और बयानबाजी नहीं, बल्कि विकास व पारदर्शिता को वोट देती है।