Bihar News: मानसून में अब पटना को नहीं सताएगा जलजमाव, मिल रही है स्थायी राहत; जानें कैसे?
Bihar: इस परियोजना के तहत पटना के जिन ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों को इस हाईटेक सिस्टम से जोड़ा गया है, उनमें सैदपुर, योगीपुर, योगीपुर एनबीसीसी, ईको पार्क-1, ईको पार्क-2, ईको पार्क-3, पहाड़ी न्यू, पहाड़ी ओल्ड और पहाड़ी एनबीसीसी स्टेशन शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर
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बारिश के मौसम में राजधानी पटना के लोगों को जलजमाव की समस्या से राहत दिलाने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। अब शहर के प्रमुख ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ दिया गया है। पटना के कुल नौ पंपिंग स्टेशनों को गांधी मैदान स्थित इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (आईसीसीसी) से जोड़ा गया है, जहां से पूरे सिस्टम की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।
इन पंपिंग स्टेशनों में अब वाटर लेवल सेंसर, तापमान सेंसर और कंपन मापने वाले सेंसर लगाए गए हैं। इसके अलावा, इन सभी को एक केंद्रीकृत स्वचालित प्रणाली से जोड़ दिया गया है। जैसे ही पानी का स्तर तय सीमा से ऊपर पहुंचता है या पंप में कोई गड़बड़ी होती है, तो इसकी जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम को मिल जाती है। यहां से तकनीकी टीम को मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजा जाता है, जिससे समय पर जरूरी कदम उठाए जा सकें। इस पूरी प्रक्रिया के कारण अब जलभराव की स्थिति बनने से पहले ही उस पर नियंत्रण पा लिया जाएगा।
यह पूरा प्रोजेक्ट पटना स्मार्ट सिटी योजना के तहत चलाया जा रहा है। साथ ही, राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री समग्र शहरी विकास योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास का काम तेज़ी से किया जा रहा है। इसमें नालों की सफाई, सड़क निर्माण, पार्कों के विकास और सौंदर्यीकरण जैसी योजनाएं शामिल हैं।
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इस परियोजना के तहत पटना के जिन ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों को इस हाईटेक सिस्टम से जोड़ा गया है, उनमें सैदपुर, योगीपुर, योगीपुर एनबीसीसी, ईको पार्क-1, ईको पार्क-2, ईको पार्क-3, पहाड़ी न्यू, पहाड़ी ओल्ड और पहाड़ी एनबीसीसी स्टेशन शामिल हैं। इन सभी जगहों पर पंपों की निगरानी के लिए कैमरे भी लगाए गए हैं और संप तथा स्क्रीन पर नजर रखने की व्यवस्था की गई है।
इन सेंसरों की मदद से पानी के स्तर की निगरानी रियल टाइम में की जा रही है। जैसे ही पानी का स्तर तय सीमा से ऊपर जाता है, पंप अपने-आप चालू हो जाते हैं और जलनिकासी शुरू हो जाती है। इसके लिए कंट्रोल रूम पूरे दिन और रात, यानी 24 घंटे काम कर रहा है।
इस आधुनिक व्यवस्था पर कुल 7 करोड़ 80 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। अब उम्मीद की जा रही है कि इस नई प्रणाली के जरिए पटना को हर साल मानसून में होने वाली जलजमाव की परेशानी से स्थायी राहत मिल सकेगी। यह पहल शहर के नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकती है।