Prashant Kishor: भाजपा अध्यक्ष के बाद अब मंत्री मंगल पांडेय पर पीके का निशाना, प्रत्यय अमृत को भी घेरा
Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर लगातार यह साबित करने में जुटे हैं कि वह भाजपा की बी टीम नहीं हैं। पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को घेरा। अब मंत्री मंगल पांडेय पर निशाना साधा है। लपेटे में अगले मुख्य सचिव को भी लिया है।
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प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार के मंत्री और अधिकारी पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि 2020 में कोविड में लोग परेशान थे और उस वक्त बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे दिल्ली में फ्लैट खरीद रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि इसमें वर्तमान में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल उनकी मदद कर रहे थे। इस संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि 6/8/19 को दिलीप जायसवाल ने अपने अकाउंट से 25 लाख मंगल पांडे के पिता को भेजा और मंगल पांडे के पिता ने ये पैसा अपनी बहु के अकाउंट में भेजा। प्रशांत किशोर ने कहा कि 2020 के मंगल पांडे के एफिडेविट में ऐसी कोई घोषणा नहीं है जिसमें यह कहा गया है कि उन्होंने लोन लिया है।
मंगल पांडे और दिलीप जायसवाल पर लगाये गंभीर आरोप
जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बताया कि मंगल पांडे और दिलीप जायसवाल मित्र हैं। साल 2020 में कोविड के वक्त जब बिहार के लोग दवा-एम्बुलेंस के लिए मारे फिर रहे थे। तब स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने अपनी पत्नी के नाम पर दिल्ली के द्वारका इलाके में 86 लाख रुपये की कीमत का फ्लैट लिया। इसके लिए मंगल पांडेय की पत्नी उर्मिला पांडेय को उनके ससुर (मंगल पांडेय के पिता) अवधेश पांडेय के अकाउंट से 25 लाख रुपये दिए गए। बड़ी बात यह है कि अवधेश पांडेय के पास यह रुपये दिलीप जायसवाल के अकाउंट से ट्रांसफर किए गए। साथ ही मंगल पांडेय ने 2020 में दिए गए एफिडेविट में भी इस लोन का जिक्र नहीं किया है। उन्होंने बताया कि 6 अगस्त 2019 को दिलीप जायसवाल के अकाउंट से यह रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर किए गए। फ्लैट की खरीदारी में दिलीप जायसवाल विटनेस भी बने। यह सब डॉक्यूमेंट हमारे पास है। छह अलग-अलग ट्रांजैक्शन से 86 लाख रुपये देकर फ्लैट लिया गया। इसके बाद किशनगंज के एमजीएम कॉलेज को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया। इसके पहले 20 साल तक एमजीएम कॉलेज बीएन मंडल यूनिवर्सिटी से डिग्री देता था।
एम्बुलेंस की खरीदारी सामान्य से बढ़ी हुई कीमत पर की गई
प्रशांत किशोर ने मंगल पांडेय पर दूसरा गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए बिहार में एम्बुलेंस की खरीदारी सामान्य से बढ़ी हुई कीमत पर की गई। साल 2022 में 1000 एम्बुलेंस खरीदने के लिए निविदा जारी की गई, जिसमें 466 टाइप सी एम्बुलेंस 19.58 लाख रुपये की दर से फोर्स मोटर्स से खरीदे गए। अब 2025 में 250 एम्बुलेंस करीब 27 लाख रुपये में खरीदे गए, वो भी फोर्स मोटर्स से। इससे पहले टाटा मोटर्स का बिड यह कहकर हटा दिया गया कि एम्बुलेंस के ड्राइवर वाले हिस्से में एसी नहीं चाहिए। फिर फोर्स मोटर्स को 19 लाख की कीमत वाले एम्बुलेंस का 27 लाख प्रति एम्बुलेंस कीमत भुगतान कर 250 यूनिट के ऑर्डर दिए गए, जबकि इन्हीं एम्बुलेंस को ओड़िसा और यूपी सरकार ने कम कीमत पर खरीदा है। अगर बल्क परचेज हो तो कीमत कम होनी चाहिए, लेकिन बिहार सरकार ने कीमत बढ़ा कर एम्बुलेंस की खरीदारी क्यों की?
प्रत्यय अमृत से पूछा सवाल, कहा- जवाब आपको भी देना होगा
प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार के अधिकारी पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि एम्बुलेंस की खरीदारी के वक्त प्रत्यय अमृत स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव थे। इसलिए उनकी भी जिम्मेदारी बनती है कि वह भी जवाब दें। क्योंकि अब वो बिहार सरकार के मुख्य सचिव बनने वाले हैं। उनको क्लियर करना चाहिए कि क्यों 12-13 लाख का एम्बुलेंस पहले 19 लाख में खरीदा गया। फिर कुछ समय बाद उसी एम्बुलेंस को 27 लाख में खरीदा गया। अधिकारियों को ध्यान रखना चाहिए कि फाइल पर आपको ही साइन करना है। चारा घोटाले में लालूजी को तो सजा हुई ही, अधिकारी भी पकड़े गए थे।