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Bihar News: ताड़ के पेड़ों की कटाई और आकाशीय बिजली से मौतों पर NGT ने मांगा जवाब, जानें बेंच ने क्या कुछ कहा

Sun, 22 Jun 2025 02:14 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: शबाहत हुसैन Updated Sun, 22 Jun 2025 02:14 PM IST
सार

Bihar: रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद ताड़ी निकालने पर रोक लग गई। इससे ताड़ के पेड़ों की आर्थिक उपयोगिता खत्म हो गई और लोग इन्हें काटने लगे। इसके बाद से आकाशीय बिजली से मरने वालों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई। पढ़ें पूरी खबर

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Bihar News: NGT seeks answers on felling of palm trees and deaths due to lightning
सोशल मीडिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बिहार में ताड़ के पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई और इसके कारण आकाशीय बिजली से होने वाली मौतों में हो रही बढ़ोतरी पर गंभीरता दिखाई है। इस मुद्दे पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बिहार की संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा गया है। यह मामला तब सामने आया जब NGT ने एक अखबार में छपी रिपोर्ट का खुद से संज्ञान लिया। उस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ताड़ के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के बाद बिहार में आकाशीय बिजली से मरने वालों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। 2016 से अब तक राज्य में 2,000 से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं।
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NGT की बेंच ने क्या कहा?
5 जून को पारित आदेश में NGT के न्यायिक सदस्य जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, दर्जनों ऊंचे ताड़ के पेड़ काट दिए गए हैं जिससे आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ गई हैं और इससे लोगों की मौत हो रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद ताड़ी निकालने पर रोक लग गई। इससे ताड़ के पेड़ों की आर्थिक उपयोगिता खत्म हो गई और लोग इन्हें काटने लगे। इसके बाद से आकाशीय बिजली से मरने वालों की संख्या में तेज बढ़ोतरी देखी गई।
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किन जिलों में सबसे ज्यादा असर पड़ा?
बता दें कि बिहार के औरंगाबाद, पटना, नालंदा, कैमूर, रोहतास, भोजपुर और बक्सर जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकतर मौतें दोपहर 12:30 बजे से 4:30 बजे के बीच होती हैं, जब लोग खेतों या बाहर काम कर रहे होते हैं। NGT ने कहा कि राज्य में ताड़ के पेड़ों की खेती वाले क्षेत्र में 40% की कमी आई है और अब इनकी रोपाई लगभग बंद हो गई है। ट्रिब्यूनल ने माना कि यह मामला पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत आता है।

किस-किस को पक्ष बनाया गया?
इस मामले में NGT ने निम्नलिखित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जिनमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण मंत्रालय का क्षेत्रीय कार्यालय
और बिहार आपदा प्रबंधन विभाग शामिल है। फिलबाल मामले की अगली सुनवाई 7 अगस्त को कोलकाता स्थित NGT की ईस्टर्न ज़ोन बेंच में होगी।
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