फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   National Seminar Concludes at Nalanda University Resolution to Make Hindi official Language of United Nations

Bihar: 'संयुक्त राष्ट्र की भाषा बने हिंदी', नालंदा विश्वविद्यालय में संपन्न हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी

Sat, 10 Jan 2026 07:17 PM IST
पटना ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा Published by: पटना ब्यूरो Updated Sat, 10 Jan 2026 07:17 PM IST
सार

Nalanda News: नालंदा विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने पर गहन विमर्श हुआ। विद्वानों ने संस्थागत सहयोग, कूटनीतिक प्रयास और दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता पर जोर देते हुए इसे भारत की सभ्यतागत पहचान से जोड़ा।
 

विज्ञापन
National Seminar Concludes at Nalanda University Resolution to Make Hindi official Language of United Nations
नालंद विश्वविद्यालय में संपन्न हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्राचीन ज्ञान की भूमि नालंदा में आज शनिवार को एक नए वैश्विक संकल्प का बिगुल बजा। ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय में हिंदी के संवर्धन और वैश्विक संवाद विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ, जिसने भारत की इस प्राचीन भाषा को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अकादमिक पहल को रेखांकित किया।

विज्ञापन


वैश्विक मंच पर हिंदी की दावेदारी
संगोष्ठी के समापन सत्र में जब प्रोफेसर शिव कुमार सिंह (लिस्बन विश्वविद्यालय) ने हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने के पक्ष में अपने तर्क प्रस्तुत किए, तो सभागार में उपस्थित विद्वानों और शोधार्थियों ने इसे केवल एक भाषाई आकांक्षा नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत उपस्थिति के विस्तार के रूप में देखा।
विज्ञापन


कार्यक्रम में मौजूद विद्वान
विज्ञापन
विज्ञापन

 
विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस के पूर्व महासचिव प्रोफेसर विनोद कुमार मिश्र ने संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी: एक प्रस्तावित मार्ग विषय पर अपनी प्रस्तुति में ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रदान किया। उन्होंने 1945 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा पांच भाषाओं की स्वीकृति और 1973 में अरबी भाषा के समावेश का उदाहरण देते हुए बताया कि यह प्रक्रिया दीर्घकालीन कूटनीति, वित्तीय सहयोग और बहुपक्षीय समर्थन की मांग करती है।
 
अरबी का अनुभव, हिंदी के लिए प्रेरणा
विशेषज्ञों ने अरबी भाषा के अनुभव को हिंदी के लिए एक व्यावहारिक खाका के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने रेखांकित किया कि हिंदी की वैश्विक उपस्थिति, विशाल भाषी समुदाय (विश्व में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा), तकनीक और इंटरनेट के माध्यम से बढ़ता प्रसार तथा 'हिंदी@यूएन' पहल के तहत संयुक्त राष्ट्र में हिंदी की वास्तविक उपस्थिति इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

कार्यक्रम में मौजूद विद्वान
 
संस्थागत सहयोग पर जोर
संगोष्ठी के पंचम और षष्ठ सत्रों में उच्च शिक्षण संस्थानों का योगदान तथा हिंदी सेवी संस्थाओं का योगदान पर केंद्रित विमर्श में इस बात पर सहमति बनी कि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों की साझा भागीदारी के बिना हिंदी को वैश्विक मंच पर सशक्त करना असंभव है।
 
कुलपति का दृष्टिकोण: सभ्यतागत आत्मविश्वास का प्रतीक
नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में कहा कि संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी केवल भाषाई गौरव का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह हमारी सभ्यतागत उपस्थिति और बौद्धिक आत्मविश्वास की प्रगति का भी प्रतीक है।


उन्होंने इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संस्थागत तैयारी और दीर्घकालीन रणनीति की अनिवार्यता पर बल देते हुए कहा कि वैश्विक परिदृश्य में उभर रहे 'ग्लोबल साउथ' के बढ़ते महत्व के साथ यह प्रस्ताव और अधिक प्रासंगिक हो जाता है।

यह भी पढ़ें- Bihar News: नालंदा में हिंदी के वैश्विक विस्तार पर मंथन, प्राचीन ज्ञान परंपरा से आधुनिक तकनीक तक हुआ संवाद
 
नालंदा-सारनाथ के बीच शैक्षणिक सेतु
संगोष्ठी के दौरान एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि रही- नालंदा विश्वविद्यालय और केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान (CIHTS), सारनाथ के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर। यह समझौता प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और CIHTS के कुलपति प्रोफेसर डब्ल्यू. डी. नेगी के बीच राउंडटेबल कॉन्फ्रेंस हॉल में संपन्न हुआ। यह साझेदारी ज्ञान-परंपराओं के संवाद, अंतर्विषयक शोध और अकादमिक सहयोग को नई ऊंचाइयां देने में सहायक होगी।
 
विरासत को समकालीन संदर्भ में आगे बढ़ाना
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हिंदी को वैश्विक विमर्श, कूटनीति और ज्ञान-परंपराओं के केंद्र में स्थापित करने के साझा संकल्प के साथ हुआ। यह आयोजन नालंदा की ऐतिहासिक वैश्विक विरासत को 21वीं सदी के संदर्भ में पुनर्स्थापित करने का एक सार्थक प्रयास है।

 


 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed