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Bihar News: साइबर खतरों को लेकर सभी सरकारी विभागों का होगा साइबर ऑडिट, EOU की अगुवाई में बढ़ेगी डिजिटल सुरक्षा
Wed, 23 Jul 2025 08:52 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Wed, 23 Jul 2025 08:52 PM IST
सार
Bihar Cyber Audit: बिहार में सरकारी वेबसाइटों पर बढ़ते साइबर खतरों के बीच सरकार ने ईओयू को नोडल एजेंसी बनाकर बड़ी पहल शुरू की है। इसे लेकर सी-डैक, आई4सी समेत राष्ट्रीय संस्थानों की मदद से ऑडिट किया जाएगा।
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बिहार साइबर ऑडिट (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : AI Image- Freepik
विस्तार
बिहार में साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं और सरकारी संस्थानों की वेबसाइटों पर लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए अब सरकार ने इस दिशा में एक बड़ी और निर्णायक पहल की है। सभी सरकारी विभागों, कार्यालयों और प्रतिष्ठानों की साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब व्यापक साइबर ऑडिट कराया जाएगा। इस कार्य के लिए आर्थिक अपराध इकाई (Economic Offences Unit - EOU) को राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया गया है।
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इस साइबर ऑडिट के जरिए यह स्पष्ट किया जाएगा कि सरकारी संस्थानों की वेबसाइटें, डिजिटल सेवाएं, ऑनलाइन लेनदेन और अन्य डिजिटल कार्य साइबर सुरक्षा मानकों पर कितने सुरक्षित हैं। जहां-जहां भी खामियां या चूक मिलेगी, वहां तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में किसी भी साइबर हमले की गुंजाइश न रहे।
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राष्ट्रीय एजेंसियों का मिलेगा तकनीकी सहयोग
इस पूरी प्रक्रिया में सरकार को सी-डैक (Centre for Development of Advanced Computing), आई4सी (Indian Cyber Crime Coordination Centre) और अन्य राष्ट्रीय साइबर एजेंसियों का तकनीकी सहयोग प्राप्त होगा। इन संस्थानों की विशेषज्ञता के आधार पर सभी विभागों की वेबसाइटों और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का गहराई से परीक्षण और मूल्यांकन किया जाएगा।
इसके लिए एक विशेष रणनीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से राज्य के सभी सरकारी विभागों और संस्थानों में यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ऑडिट के दौरान सभी साइबर हाइजीन मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच की जाएगी ताकि यह समझा जा सके कि किस स्थान पर क्या कमजोरियां हैं और उन्हें कैसे दुरुस्त किया जाए।
साइबर ऑडिट की आवश्यकता क्यों पड़ी?
पिछले कुछ महीनों में बिहार समेत देशभर में साइबर अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। राज्य के कई महत्वपूर्ण सरकारी विभागों की वेबसाइटें साइबर हमलों का शिकार हुई हैं। हाल ही में एम्स पटना का पूरा सिस्टम साइबर अटैक के कारण ठप हो गया था। इसी प्रकार स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, डॉयल 112 और जल वितरण प्रणाली से जुड़ी वेबसाइटों पर भी साइबर अटैक की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य की डिजिटल संरचना को अब और अधिक सुरक्षित बनाने की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने सभी विभागों में साइबर ऑडिट अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इससे सरकारी डिजिटल सेवाओं की विश्वसनीयता और सुरक्षा में सुधार होगा।
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ईओयू की सख्ती और कार्रवाई की तैयारी
इस पूरे अभियान की निगरानी और संचालन की जिम्मेदारी ईओयू के एडीजी नैयर हसनैन खान को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है और कई बड़े साइबर गैंग और उनके नेटवर्क की पहचान की जा चुकी है। ऐसे सभी गिरोहों के खिलाफ तेज और सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि साइबर ऑडिट की प्रक्रिया सभी विभागों और सरकारी प्रतिष्ठानों में शुरू की जाएगी। इसके लिए समुचित व्यवस्था तैयार की जा रही है। साइबर सुरक्षा को लेकर हमारी प्राथमिकता अब और अधिक सख्त है और किसी भी तरह की चूक को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।