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SIR Row: ‘चुनाव आयोग को व्यावहारिक ज्ञान नहीं’, जदयू सांसद गिरधारी यादव का मतदाता सूची पुनरीक्षण पर कड़ा हमला

Wed, 23 Jul 2025 07:16 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना/नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना/नई दिल्ली Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 23 Jul 2025 07:16 PM IST
सार

Bihar SIR: सांसद गिरधारी यादव ने कहा कि मुझे दस्तावेज जुटाने में 10 दिन लगे। मेरा बेटा अमेरिका में है... एक महीने में दस्तावेज कैसे देंगे? वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी SIR प्रक्रिया पर सवाल दागे। पढ़ें पूरी खबर...।
 

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Bihar Voter List Revision: JDU MP Giridhari Yadav Slams Election Commission Over SIR
SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर बरसे जदयू सांसद गिरधारी यादव और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) को लेकर सियासत तेज हो गई है। जदयू सांसद गिरधारी यादव ने इस प्रक्रिया पर तीखा हमला बोलते हुए चुनाव आयोग की मंशा और तैयारी पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि आयोग को न तो बिहार का इतिहास पता है और न ही भौगोलिक परिस्थितियों की जानकारी।

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दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान गिरधारी यादव ने कहा कि चुनाव आयोग को कोई व्यावहारिक ज्ञान नहीं है। यह लोग बिहार का इतिहास और भूगोल नहीं जानते। मुझे खुद जरूरी दस्तावेज जुटाने में 10 दिन लग गए। मेरा बेटा अमेरिका में रहता है, वह दस्तखत कैसे भेजेगा? एक महीने में सब कैसे होगा?
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‘अगर मैं सच नहीं बोल सकता तो फिर सांसद क्यों बना?’
सांसद गिरधारी यादव ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया आम लोगों की जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर थोप दी गई है। उनका कहना है कि ऐसे गंभीर कार्य के लिए कम से कम छह महीने का समय दिया जाना चाहिए था। गिरधारी यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है, चाहे उनकी पार्टी कुछ भी कहे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मैं सच नहीं बोल सकता, तो फिर मैं सांसद क्यों बना? यह सच्चाई है और इसे छिपाया नहीं जा सकता। चुनाव आयोग की यह जल्दबाजी लोकतंत्र के लिए घातक है।

 
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने जताई गहरी आशंका
जदयू सांसद की बात को सही बताते हुए कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी SIR प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसा कौन-सा तरीका या फॉर्मूला है जिससे आयोग इतनी बड़ी प्रक्रिया को सिर्फ एक महीने में पूरा कर पा रहा है। उन्होंने इसे संदेहास्पद करार देते हुए कहा कि लगता है कि यह सब आदिवासी, दलित, पिछड़े वर्ग और मुस्लिमों के मतदाता सूची से नाम हटाने की सोची-समझी साजिश है। इमरान मसूद ने कहा कि कुछ ताकतें इस देश को उस दिशा में ले जाना चाहती हैं, जहां 10% लोग शासक हों और 90% लोग गुलाम बना दिए जाएं। लेकिन हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए अंतिम दम तक लड़ेंगे।

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संसद में भी छाया रहा SIR का मुद्दा, विपक्ष का हंगामा
बुधवार को संसद के दोनों सदनों में भी बिहार में चल रहे SIR अभियान को लेकर विपक्ष ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। सत्र शुरू होते ही विपक्षी सांसदों के शोरगुल के कारण राज्यसभा की कार्यवाही मात्र एक मिनट में स्थगित कर दी गई, जबकि लोकसभा कुछ मिनटों तक चली, लेकिन वहां भी विपक्षी नारेबाजी जारी रही। संसद भवन के बाहर भी विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन किया। इसी हंगामे के बीच केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने लोकसभा में 'राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, 2025' भी पेश किया।

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