Bihar News: खरीफ विपणन को लेकर बिहार सरकार ने दी सौगात, अनाज खरीद के लिए 9600 करोड़ की दी गारंटी
Bihar News: खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, विकेन्द्रीकृत अधिप्राप्ति व्यवस्था के तहत निगम को कुल 12,000 करोड़ रुपये की पूंजी की जरूरत होगी। इसमें से 9600 करोड़ रुपये का ऋण विभिन्न वित्तीय संस्थाओं जैसे व्यावसायिक बैंक और नाबार्ड से लिया जाएगा।
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राज्य मंत्रिमंडल ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में खरीफ विपणन मौसम के दौरान खाद्यान्नों की खरीद (अधिप्राप्ति) के लिए बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम को 9600 करोड़ रुपये की राजकीय गारंटी देने की मंजूरी दी है। यह फैसला आज, 03 अक्टूबर 2025 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया।
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, विकेन्द्रीकृत अधिप्राप्ति व्यवस्था के तहत निगम को कुल 12,000 करोड़ रुपये की पूंजी की जरूरत होगी। इसमें से 9600 करोड़ रुपये का ऋण विभिन्न वित्तीय संस्थाओं जैसे व्यावसायिक बैंक और नाबार्ड से लिया जाएगा। इस ऋण के लिए राज्य सरकार गारंटी देगी।
विकेन्द्रीकृत अधिप्राप्ति व्यवस्था क्या है?
इस व्यवस्था के तहत, खरीफ मौसम में धान और चावल की खरीद का कार्यक्रम नवंबर से शुरू होकर अगले वर्ष अगस्त तक चलता है। कृषि विभाग फसल की उपज का अनुमान देता है। उसके बाद सरकार न्यूनतम खरीद लक्ष्य तय करती है। पैक्स और व्यापार मंडल किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सीधे धान की खरीद करते हैं। खरीदे गए धान से तैयार की गई सीएमआर की मात्रा को पैक्स/व्यापार मंडल राज्य के नोडल एजेंसी बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के संग्रहण केंद्रों पर जमा करते हैं।
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निगम इन केंद्रों पर अनाज की मात्रा और गुणवत्ता की जांच करता है। फिर, तय समय सीमा में पैक्स/व्यापार मंडलों को MSP और सभी अन्य मदों को जोड़कर ऑनलाइन भुगतान करता है। ताकि पैक्स और व्यापार मंडल किसानों को 48 घंटे के भीतर भुगतान कर सकें और पूरी राशि का चक्रानुक्रम में उपयोग हो।
क्यों जरूरी है यह गारंटी
गेहूं और धान की खरीद कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में निगम को बड़ी राशि की जरूरत होती है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में निगम को 12,000 करोड़ रुपये की गारंटी दी गई थी, जिसमें से 10,350 करोड़ रुपये का इस्तेमाल रबी और खरीफ दोनों मौसमों में अनाज खरीदने में हुआ। इस राशि का पूरा भुगतान 2025-26 तक कर दिया जाएगा। भारत सरकार विकेन्द्रीकृत अधिप्राप्ति व्यवस्था के तहत हर महीने कॉस्ट शीट के अनुसार खर्च की गई राशि की प्रतिपूर्ति अनुदान के रूप में निगम को देती है।
इस बार की व्यवस्था
इस साल (वित्तीय वर्ष 2025-26) में खरीफ विपणन मौसम के लिए 9600 करोड़ रुपये की गारंटी सिर्फ इसी उद्देश्य के लिए दी गई है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसानों से अनाज की खरीद समय पर हो और भुगतान में कोई दिक्कत न आए।