SIR: विशेष गहन पुनरीक्षण को खत्म किया जाए, सिर्फ सुधारा नहीं जाए; पटना में हुई जन सुनवाई में उठी मांग
Bihar: न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा मांगे जा रहे दस्तावेजों को ग्रामीण लोग जुटा ही नहीं सकते। वजाहत हबीबुल्ला ने कहा कि यह प्रक्रिया प्रशासन के दुरुपयोग का उदाहरण बन गई है। न यह संविधान के अनुसार है, न सूचना के अधिकार कानून के अनुरूप। पढ़ें पूरी खबर
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बिहार में मतदाता सूची के लिए चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर पटना के बीआईए हॉल में एक जन सुनवाई का आयोजन किया गया। इस जन सुनवाई में बिहार के 14 जिलों से आए करीब 250 लोगों ने भाग लिया। इनमें से 28 प्रतिभागियों ने इस प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। लगभग सभी लोगों ने एक बात पर जोर दिया कि यह प्रक्रिया गरीबों और आम लोगों के लिए बेहद कठिन बना दी गई है। इसलिए इसे केवल संशोधित नहीं, बल्कि पूरी तरह से रद्द कर देना चाहिए।
कटिहार की फूल कुमारी देवी ने जन सुनवाई में बताया कि वह मजदूरी कर अपने घर चलाती हैं। उनसे आधार और वोटर कार्ड की फोटोकॉपी मांगी गई। उन्होंने 4 किलोमीटर चलकर फोटो खिंचवाई और पैसे के अभाव में अपने राशन का चावल बेच दिया। दस्तावेज जुटाने में उनका दो दिन का काम छूटा और उन दो दिनों में उनके पास खाना भी नहीं था।
ऐसे कई अनुभव सामने आए जहां लोगों को जरूरी दस्तावेज जुटाने में काफी परेशानी हुई। गांवों और छोटे कस्बों में रहने वाले गरीब, दलित और अनपढ़ लोगों के लिए SIR की प्रक्रिया एक बोझ बन गई है। लोगों ने बताया कि गणना फॉर्म कई बार बीएलओ के बजाय वार्ड पार्षद, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता या सफाईकर्मी ने बांटे। कहीं-कहीं तो फॉर्म भरने का तरीका ही नहीं बताया गया। कई परिवारों में कुछ को फॉर्म मिला, कुछ को नहीं। पटना शहर में तो बिना फोटो वाले फॉर्म भी बांटे गए।
गरीब लोगों के दस्तावेज अक्सर बह जाते हैं
कई लोगों को यह भी नहीं बताया गया कि उनका फॉर्म कब और कैसे जमा हो गया। कुछ लोगों को फॉर्म की रिसीविंग नहीं दी गई। जिन्हें मिली, उन्होंने जागरूकता और दबाव के बाद ही पाई। कई बार फॉर्म बिना दस्तखत के ही जमा कर दिए गए। एक व्यक्ति ने जब सोशल मीडिया पर यह मामला उठाया, तो उसके जानने वालों को धमकियां मिलीं। कई अनपढ़ लोगों को फॉर्म भरवाने के लिए ₹100 तक देने पड़े। कुछ BLO ने ऐसे दस्तावेज भी मांगे जिनकी जरूरत नहीं थी, जैसे बैंक पासबुक की फोटोकॉपी।
खेती का समय चल रहा है और बिहार के बहुत से गरीब लोग पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में खेतों में मजदूरी कर रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए फॉर्म भरना या दस्तावेज़ भेजना संभव नहीं है। कोसी नदी के बाढ़ प्रभावित गांवों में रहने वाले गरीब लोगों के दस्तावेज अक्सर बह जाते हैं, जिससे वे और अधिक परेशान हो जाते हैं। बीएलओ और आंगनवाड़ी सेविकाओं पर भी भारी दबाव है। जो नियमों का पालन कर रहे हैं, उन्हें काम धीमा करने के लिए डांटा जा रहा है और वेतन रोकने की धमकी दी जा रही है। इस वजह से उनकी दूसरी जिम्मेदारियां, जैसे बच्चों की शिक्षा और पोषण से जुड़ी योजनाएं, प्रभावित हो रही हैं।
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कई जानी मानी हस्तियां रहीं शामिल
जन सुनवाई में मौजूद पैनल में छह जानी-मानी हस्तियां शामिल थीं। इनमें पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला, पूर्व न्यायाधीश अंजना प्रकाश, अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़, समाजशास्त्री प्रो. नंदिनी सुंदर, ए. एन. सिन्हा संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. दिवाकर और सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी।
न्यायमूर्ति अंजना प्रकाश ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा मांगे जा रहे दस्तावेजों को ग्रामीण लोग जुटा ही नहीं सकते। वजाहत हबीबुल्ला ने कहा कि यह प्रक्रिया प्रशासन के दुरुपयोग का उदाहरण बन गई है। न यह संविधान के अनुसार है, न सूचना के अधिकार कानून के अनुरूप। सामाजिक कार्यकर्ता भंवर मेघवंशी ने कहा कि SIR संविधान की प्रस्तावना, जिसमें समानता और राजनीतिक न्याय का वादा किया गया है, उसका उल्लंघन करती है।
अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़ ने साफ कहा कि SIR को केवल सुधारा नहीं जाना चाहिए, बल्कि पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए। यह चुनाव आयोग की अपनी ही प्रक्रियाओं का उल्लंघन है जिससे मतदाता सूची की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर बुरा असर पड़ेगा। समाजशास्त्री प्रो. नंदिनी सुंदर ने कहा कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र के लिए खतरनाक है और उम्मीद है कि हमारी बात सुनी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस लड़ाई को हमें आगे भी जारी रखना होगा।
ए. एन. सिन्हा संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. दिवाकर ने कहा कि आज हमारा लोकतंत्र न जनता का है, न जनता के लिए है, और न ही जनता द्वारा है। इसे वापस पाने के लिए हमें संगठित होकर संघर्ष करना होगा। जन सुनवाई में रखे गए सभी अनुभवों और विशेषज्ञों की बातों से यह साफ है कि “विशेष गहन पुनरीक्षण” की यह प्रक्रिया गरीब, ग्रामीण और कमजोर वर्ग के लोगों को मतदाता सूची से बाहर करने की दिशा में काम कर रही है। इसलिए इसे केवल सुधारा नहीं, बल्कि पूरी तरह से बंद किया जाना चाहिए।