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बिहार: नीतीश सरकार ने पेश किया 2.28 लाख करोड़ का बजट, कोई नया कर नहीं, आत्मनिर्भरता पर जोर

Mon, 22 Feb 2021 11:03 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Tanuja Yadav Updated Mon, 22 Feb 2021 11:03 PM IST
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Bihar budget 2021 First Budget After Election Nitish Kumar budget estimations will be 215000 rs
नीतीश कुमार - फोटो : पीटीआई

बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने सोमवार को वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 2.18 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया जिसमें कोई नया कर प्रस्तावित नहीं है। बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और ग्रामीण विकास पर विशेष जोर दिया गया है। विधानसभा में भोजनावकाश के बाद वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 2,18,302.70 करोड रुपये का राज्य का बजट पेश करते हुए उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि यह बजट राज्य में खुशहाली लाएगा।

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उन्होंने कहा यह बजट मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 के बजट से 6541.21 करोड़ रुपये अधिक है और इसमें 2021-22 में राजस्व अधिशेष 9195.90 करोड़ रुपये अनुमानित है। तारकिशोर ने कहा कि 2021-22 के बजट में 38035.93 करोड़ का सर्वाधिक प्रावधान शिक्षा क्षेत्र के लिए किया गया है। ग्रामीण विकास के लिए 16,835.67 करोड़, सड़क के लिए 15,227.74 करोड़, स्वास्थ्य के लिए 13,264.87 करोड़ और ऊर्जा क्षेत्र के लिए 8560.00 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है ।
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उन्होंने कहा कि इस बजट में 'सात निश्चय-2' के तहत सात लक्ष्य; युवा शक्ति, बिहार की प्रगति, सशक्त महिला-सक्षम महिला, हर खेत तक सिंचाई का पानी, स्वच्छ गांव-समृद्ध गांव, स्वच्छ शहर-विकसित शहर, सुलभ संपर्कता और सबके लिए अतिरिक्त स्वास्थ्य सुविधा; के लिए 4671.00 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
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उल्लेखनीय है कि अपने पिछले शासनकाल के दौरान नीतीश सरकार ने अपने पहले सात निश्चय कार्यक्रम; आर्थिक हल, युवाओं को बल, आरक्षित रोजगार, महिलाओं का अधिकार, हर घर बिजली, हर घर नल का जल, घर तक पक्की गली नालियां, शौचालय निर्माण-घर का सम्मान तथा अवसर बढे, आगे पढें; को लागू किया था।

तारकिशोर ने कहा कि कौशल एवं उद्यमिता के विकास के लिए अब एक अलग विभाग कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग का गठन किया जाएगा जिसमें औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों आईटीआई और पालीटेक्निक संस्थानों को समाहित किया जाएगा। बजट दस्तावेज में कहा गया है कि 2012-13 को छोड़कर, राज्य का बजट 2008-09 से राजस्व अधिशेष वाला रहा है और इस वर्ष बजट का आकार 2004-05 के मुकाबले नौ गुना बढ़ा है, जब नीतीश सरकार पहली बार सत्ता में आई थी।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तारकिशोर द्वारा पेश बजट को संतुलित बताते हुए कहा कि यह सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि बिहार जिसने 2004-05 के बाद से द्विअंकीय विकास दर देखा है, यह बजट राज्य में विकास को और गति देगा। सदन में बजट पेश करने के बाद संवादताओं से बातचीत के दौरान तारकिशोर ने कहा कि बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया है। 

यह पूछे जाने पर कि क्या राज्य सरकार लोगों को कुछ राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर वैट कम करने पर विचार करेगी, तारकिशोर ने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त करने से इंकार किया। इस सवाल पर कि पेट्रोलियम उत्पादों को भी क्या जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा, वित्त विभाग के प्रधान सचिव एस सिद्धार्थ ने कहा कि न प्रस्ताव लाए हैं और न ही इस पर कोई चर्चा कर रहे हैं।

तेजस्वी ने बजट को बताया झूठ का पुलिंदा

बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने इस बजट में कही गई बातों को घोषणा मात्र और जनता का मजाक उड़ाने वाला झूठ का पुलिंदा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 लाख रोजगार सृजन का झूठा ढोल सत्तारूढ़ दलों ने हाल में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव में खूब बजाया। अब जब किसी तरह सत्ता में बैठ गए हैं तो सरकार 20 लाख रोजगार सृजन का ब्लूप्रिंट बिहार की जनता के सामने रखे।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 5 बजट से मुख्यमंत्री लगातार एक खेल स्टेडियम बनवाने की घोषणा कर रहे हैं, पर खेल स्टेडियम है कि घोषणा से बाहर आता ही नहीं है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री का अपने पहले सात निश्चय कार्यक्रम तो पूरा हो नहीं पाया। और यह भ्रष्टाचार का पर्याय बन गया है तथा इसे पूरा किए बिना अब सात निश्चय-2 की बात करके लोगों को भ्रमित करने में लगे हुए हैं। 

उन्होंने आरोप लगाया कि इस बजट में न बंद पड़ी चीनी मिलों, न ही खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों और न ही नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने का कोई जिक्र है ।

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