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21 दिन के अनशन के बाद बड़ा फैसला: असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती नियम बदलने पर बनी सहमति; 2026 की बहाली रुकेगी

Mon, 24 Aug 2026 10:23 PM IST
प्रतीक पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: प्रतीक पांडेय Updated Mon, 24 Aug 2026 10:23 PM IST
सार

Bihar News: पटना के गर्दनीबाग में 21 दिनों से अनशन कर रहे असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थियों और राज्यपाल के बीच करीब दो घंटे चली वार्ता के बाद अनशन खत्म करने पर सहमति बनी। राज्यपाल सचिवालय के अनुसार, सहायक प्राध्यापक भर्ती परिनियम-2026 में आवश्यक संशोधन तक इसके आधार पर नियमित या संविदा बहाली नहीं होगी।

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bihar assistant professor recruitment rules 2026 protest governor meeting
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती नियम बदलने पर बनी सहमति - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पटना के गर्दनीबाग में पिछले 21 दिनों से अनशन कर रहे ‘ऑल बिहार पीएचडी होल्डर्स और रिसर्च स्कॉलर्स के प्रतिनिधिमंडल’ की बिहार के राज्यपाल से करीब दो घंटे तक वार्ता हुई। वार्ता के बाद अनशनकारी असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थियों ने अपना अनशन वापस लेने का आश्वासन दिया। राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों पर विचार करने और सहायक प्राध्यापक भर्ती परिनियम-2026 में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया पर सहमति बनी है।
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2026 के नियमों से फिलहाल नहीं होगी बहाली
सहमति के अनुसार, सहायक प्राध्यापक भर्ती परिनियम-2026 को तब तक स्थगित रखा जाएगा, जब तक अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों पर विचार कर आवश्यक संशोधन नहीं कर दिए जाते। इस दौरान 2026 के परिनियम के आधार पर सहायक प्राध्यापकों की नियमित या संविदा बहाली नहीं की जाएगी।
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15 दिनों में बनेगी समिति, शिक्षाविदों को भी मिलेगा स्थान
अभ्यर्थियों की मांगों पर विचार के लिए राज्यपाल मुख्यमंत्री से विचार-विमर्श के बाद 15 दिनों के भीतर एक समिति का गठन करेंगे। समिति में प्रमुख शिक्षाविदों के साथ शिक्षा क्षेत्र में काम करने का अनुभव रखने वाले प्रशासकों को भी शामिल किया जाएगा।
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55 साल की उम्र सीमा की मांग पर होगा मंथन
समिति सहायक प्राध्यापक भर्ती में अधिकतम उम्र सीमा 55 वर्ष करने की मांग पर विचार करेगी। इसके अलावा लिखित परीक्षा कराने और उसे वस्तुनिष्ठ रखने का प्रस्ताव भी समिति के सामने रखा जाएगा। लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के API स्कोर को शामिल कर संयुक्त मेरिट सूची तैयार करने पर भी विचार होगा। इसके आधार पर निर्धारित संख्या में अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाने और इंटरव्यू में टीचिंग डेमो शामिल करने की मांग भी रखी गई है।

API स्कोर में बदलाव की मांग, NET-JRF और PhD को लेकर प्रस्ताव
API की गणना को लेकर भी अभ्यर्थियों की मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया है। अभ्यर्थियों की मांग है कि मैट्रिक और इंटरमीडिएट के अंकों को API में शामिल नहीं किया जाए। नेट और जेआरएफ की वरीयता 11 तक रखने तथा पीएचडी की वरीयता 30 से कम नहीं करने की मांग की गई है। शोध प्रकाशन और अनुभव को भी API स्कोर में शामिल करने का प्रस्ताव है। साथ ही शोध प्रकाशन और अनुभव की स्पष्ट परिभाषा तय करने पर जोर दिया गया है।

अतिथि सहायक प्राध्यापकों की मांगों पर भी होगी चर्चा
वार्ता में अतिथि सहायक प्राध्यापकों से जुड़ी मांगों को भी समिति के समक्ष रखने पर सहमति बनी। इनमें वर्तमान में बहाल संविदा सहायक प्राध्यापकों की तरह न्यूनतम वेतनमान और उस पर महंगाई भत्ता देने की मांग शामिल है। सभी विश्वविद्यालयों में नवीकरण की प्रक्रिया एक समान रखने तथा शैक्षणिक प्रमाणपत्र, शोध पत्र और अनुभव की उचित जांच के बाद अतिथि सहायक प्राध्यापकों को 65 वर्ष तक कार्य करने का अवसर देने की मांग पर भी विचार किया जाएगा।

हर साल रिक्त पदों पर बहाली का सुझाव
अभ्यर्थियों की ओर से अधिकतम उम्र सीमा को एक साथ कम करने के बजाय धीरे-धीरे कम करने का सुझाव भी दिया गया। साथ ही सहायक प्राध्यापकों की नियमित बहाली हर साल उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर करने की बात कही गई।


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छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से की वार्ता
राज्यपाल के साथ वार्ता करने वाले छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शिक्षक प्रतिनिधि एमएलसी जीवन कुमार, अतिथि सहायक प्राध्यापक डॉ. कुंदन सिंह, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. विभा रानी तथा शोध छात्र आशीष कुमार और मोनू कुमार राय शामिल रहे। वार्ता के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर अभ्यर्थियों ने अनशन समाप्त करने का आश्वासन दिया।
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