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बिहार आर्टिस्ट रजिस्ट्रेशन पोर्टल: दो माह में ही आए हजारों आवेदन, ढाई महीने पहले ही हुई थी शुरुआत
Wed, 02 Jul 2025 08:17 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Wed, 02 Jul 2025 08:17 PM IST
सार
Bihar: पंजीकरण के मामले में मधुबनी जिला सबसे आगे है, जहां से 225 कलाकारों ने अपना नाम दर्ज कराया है। इसके बाद सहरसा जिला 166 आवेदनों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि राजधानी पटना से अब तक 41 कलाकारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
- फोटो : ANI
विस्तार
राज्य के कलाकारों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से बिहार सरकार द्वारा शुरू किया गया बिहार आर्टिस्ट रजिस्ट्रेशन पोर्टल कलाकारों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस पोर्टल की शुरुआत अभी ढाई महीने पहले ही हुई थी और इतने कम समय में ही पूरे राज्य से अब तक कुल 1368 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 65 आवेदन तकनीकी कारणों से अस्वीकृत कर दिए गए हैं।
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पंजीकरण के मामले में मधुबनी जिला सबसे आगे है, जहां से 225 कलाकारों ने अपना नाम दर्ज कराया है। इसके बाद सहरसा जिला 166 आवेदनों के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि राजधानी पटना से अब तक 41 कलाकारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। यह पहल राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और कलाकारों को एक मजबूत मंच उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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गौरतलब है कि इस पोर्टल की शुरुआत 15 अप्रैल को बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री मोतीलाल प्रसाद ने की थी। पोर्टल https://artistrregistration-bihar-gov-in के माध्यम से शास्त्रीय, लोक, समकालीन, दृश्य और प्रदर्शन कलाओं से जुड़े कलाकार आसानी से ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं। यह प्रक्रिया न केवल सरल है बल्कि मोबाइल फ्रेंडली भी है। पंजीकरण के बाद प्रत्येक कलाकार को एक विशिष्ट यूनिक आईडी दी जाएगी, जो भविष्य में सरकारी योजनाओं, पुरस्कारों, प्रशिक्षणों और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेने के लिए अनिवार्य होगी।
राज्य सरकार ने हाल ही में मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना भी शुरू की है। इस योजना के तहत 50 वर्ष से अधिक आयु के उन कलाकारों को पेंशन प्रदान की जाएगी जिनकी वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से कम है। इस योजना का लाभ लेने के लिए कलाकारों का बिहार आर्टिस्ट रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है, साथ ही उन्हें अपनी कला विधा में अनुभव का प्रमाण भी प्रस्तुत करना होगा। यह पहल न केवल कलाकारों को उनकी पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम बनेगी, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक विरासत को भी नई ऊर्जा देने वाला साबित होगी।