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Bihar: यहां लोको पायलट ही ट्रेन रोककर खोलता-बंद करता है फाटक, 5 साल से गेटमैन ही नहीं; बड़े हादसे की आशंका

Sun, 06 Aug 2023 04:27 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीवान Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Sun, 06 Aug 2023 04:27 PM IST
सार

Bihar News: सीवान में पांच साल से महाराजगंज-मशरख मार्ग पर अभी तक रेलवे फाटक मैन नहीं रखा गया है। इस वजह से यहां से ट्रेन गुजरने पर लोको पायलट ही ट्रेन रोक कर फाटक खोलता और बंद करता है। लोगों का कहना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो कभी बड़ा हादसा हो सकता है। वहीं, रेलवे ने बहुत ही बेतुकी बात कही है।

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Only loco pilot stops train and opens and closes gate in Maharajganj, not even gateman for 5 years
ट्रेन रोक कर फाटक बंद करता लोको पायलट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में सीवान रेलवे आजकल आधुनिकीकरण की बात कर रही है। लेकिन सीवान जिले में एक ऐसा रेलवे फाटक भी है जहां पिछले पांच साल से रेलवे के द्वारा बड़ी लापरवाही देखने को मिल रही है। दरअसल, यह रेलवे फाटक सीवान जिले के महाराजगंज थाना क्षेत्र के रगड़गंज में मौजूद है। जहां महाराजगंज से मशरख तक ट्रेन जाती है और आती है।

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जानकारी के मुताबिक, पांच साल हो गए इस महाराजगंज-मशरख मार्ग को चालू हुए, लेकिन अभी तक यहां रेलवे फाटक मैन नहीं रखा गया है। जब ट्रेन का आवागमन होता है तो ट्रेन गेट से कुछ दूर पहले ही रुक जाती है। फिर ट्रेन से लोको पायलट उतरकर फाटक बंद करता है। जब ट्रेन फाटक से गुजर जाती है तो आगे रोककर फिर फाटक बंद करता है। यह दिन में एक बार नहीं बल्कि चार-चार बार आपको देखने को मिल जाएगा। लेकिन रेलवे का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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‘गेटमैन रखने पर रेलवे को होगा नुकसान’
महाराजगंज दरौंदा-मशरख रेलखंड में गेटमैन नहीं होने से लोको  पायलट को फाटक खोलना और करना पड़ता है। ऐसा दिन में एक बार नहीं, बल्कि चार-चार बार किया जाता है। इस पूरे मामले पर वाराणसी रेल मंडल के जनसंपर्क पदाधिकारी अशोक कुमार सिंह ने कहा कि महाराजगंज दरौंदा-मशरख के बीच जो ट्रेन आने-जाने का सिस्टम है, वहां एक बार में एक ही ट्रेन जाती है। फिर वही ट्रेन वहां से बनकर खुलती है। यानी एक ही ट्रेन चार बार फेरा लगाती है। इसलिए वहां रेलवे नियम के अनुसार रेलवे फाटक पर गेटमैन नहीं रखा जाता है, क्योंकि उस रूट पर खर्च ज्यादा आता है। उससे रेलवे को नुकसान होगा।

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