Caste Census Bihar : अल्टीमेटम बेअसर देख एलान- नियोजित शिक्षक जातीय जनगणना करने नहीं उतरेंगे
Caste Census in Bihar : जातीय जनगणना के प्रगणक समय पर नहीं आएं, यह संभव है। प्रगणकों में शिक्षकों की बड़ी संख्या है और 2006 से अबतक नियोजित शिक्षकों ने इसके बहिष्कार की तैयारी कर ली है
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शनिवार 15 अप्रैल से प्रस्तावित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट 'जातिगत जनगणना’ को जोर का झटका लग सकता है। जातीय जनगणना में प्रगणक की सबसे अहम भूमिका निभाने वालों में सर्वाधिक संख्या शिक्षकों की है और 2006 से अबतक नियोजित किए गए शिक्षकों ने इसके बहिष्कार की घोषणा कर दी है। शिक्षक जातीय जनगणना के विरोध में ऐसा नहीं कर रहे हैं, बल्कि पिछले दिनों घोषित शिक्षकों की नियुक्ति की नई नियमावली के विरोध में आंदोलनकारी कदम उठा रहे हैं। नियोजित शिक्षकों के विभिन्न संगठनों ने शुक्रवार शाम तक सरकार को फैसला बदलने के लिए अल्टीमेटम दिया था, लेकिन इसे बेअसर देख बहिष्कार की तैयारी कर ली गई है।
दरअसल, संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने एक लेटर जारी किया है। यह लेटर उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखा है। इसमें उन्होंने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि 24 घंटे के अंदर राज्य के सभी कार्यरत नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालय अध्यक्षों को राज्य कर्मी का दर्जा दें। संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष संजीत भारती, परिवर्तनकारी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर ब्रजवशी और टीईटी प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश संयोजक राजू सिंह ने कहा कि बिहार के तमाम नियोजित शिक्षक अपने कर्तव्य का निर्वहन ईमानदारी पूर्वक करते आ रहे हैं लेकिन बिहार सरकार द्वारा नई नियमावली जारी की गई। इसमें पूर्व से कार्यरत नियोजित शिक्षकों को नियोजन इकाई के अधीन ही छोड़ दिया गया। यह विश्वासघात है। शिक्षा मंत्री और सत्तारूढ़ दलों द्वारा नियोजित शिक्षकों को राज्य करबी का दर्जा देने का वादा किया गया था लेकिन इस नियमावली में ऐसा नहीं किया गया।
सभी नियोजित शिक्षकों को राज्य कर्मी का दर्जा दे
प्रारंभिक शिक्षक कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष शशि रंजन सुमन, बिहार राज्य शिक्षक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन कुमार सिंह ने कहा कि राज्य सरकार की वादाखिलाफी से आक्रोशित होकर बिहार के 25 संगठन ने सर्वसम्मति से संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा का गठन किया है। हमलोग सरकार से मांग करते हैं कि राज्य में कार्यरत सभी नियोजित शिक्षकों एवं पुस्तकालय अध्यक्षों को राज्य कर्मी का दर्जा दें। साथ ही समान काम के लिए समान वेतन दे। मांग पूरी नहीं होने पर हमलोग 15 अप्रैल यानी शनिवार को सभी प्रखंड मुख्यालय में एक दिवसीय धरना पर बैठेंगे।
जाति गणना का हम लोग पूर्णत: बहिष्कार करेंगे
बिहार प्रदेश प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष नवल किशोर सिंह, अनुसूचित जाति एवं जनजाति शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमित कुमार और बिहार प्रदेश नियोजित शिक्षक कल्याण संघ के कृष्णा प्रसाद यादव ने सरकार से अपील की कि बिहार में चल रही जाति गणना का हमलोग पूर्णत: बहिष्कार करेंगे इसकी सारी जवाबदेही बिहार सरकार की होगी इसलिए हमारी मांग है कि जल्द से जल्द संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा के सभी मांगों को बिहार सरकार पूरी करें।
पुराने वेतनमान का भी लाभ दिया जाए
बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव एवं पूर्व सांसद शत्रुध्न प्रसाद सिंह और उपाध्यक्ष डॉ सुरेश प्रसाद राय का कहना है कि बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने राज्यकर्मी का दर्जा सभी शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों के लिए लागू करने की मांग बिहार सरकार से की थी। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा है कि सभी कोटि के शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों को राज्यकर्मी का दर्जा देते हुए उन्हें पुराने वेतनमान का भी लाभ दिया जाए। अन्यथा विवश होकर बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ को आंदोलन का रास्ता अख्तियार करना पडे़गा। संयुक्त शिक्षक संघर्ष मोर्चा, बिहार के सदस्यों में