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Bihar News : रेलवे जमीन पर कब्जा कर बना रहे दुकानें, माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत से जारी अवैध धंधा
Sun, 03 Aug 2025 06:29 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Sun, 03 Aug 2025 06:29 PM IST
सार
मोतिहारी के इंडो-नेपाल बॉर्डर स्थित घोड़ासहन इलाके में रेलवे की कीमती जमीन पर अवैध कब्जे का खेल तेजी से जारी है। स्थानीय माफिया शुरुआत में झुग्गी बनाकर जमीन पर कब्जा करते हैं और बाद में उसे पक्की दुकानों में बदलकर किराये वसूलते हैं।
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रेलवे जमीन पर कब्जा कर बना रहे माफिया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इंडो-नेपाल बॉर्डर पर स्थित मोतिहारी के घोड़ासहन इलाके में रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा का खेल खुलेआम जारी है। यहां छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े-बड़े भू-माफिया तक रेलवे की कीमती जमीन पर गिद्ध दृष्टि जमाए बैठे हैं। शुरुआती तौर पर माफिया झुग्गियां बनाकर कब्जा शुरू करते हैं और धीरे-धीरे पक्की दुकानें, लोहे के मकान और किरायेदारों से पगड़ी लेकर बड़ा कारोबार खड़ा कर लेते हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, करीब एक एकड़ से अधिक रेलवे जमीन पर कब्जा हो चुका है। माफिया पहले अस्थायी छतरी लगाकर दुकानें कम किराये पर देते हैं, फिर झुग्गी बनाकर उससे भी अधिक किराया वसूलते हैं। अब तो लोहे के स्ट्रक्चर डालकर दो-दो लाख रुपये की पगड़ी लेकर दुकानदारों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है। इतना ही नहीं, इन माफियाओं द्वारा बाकायदा बॉन्ड पेपर पर किरायनामा तैयार किया जा रहा है और कई मामलों में तो रेलवे की जमीन को बिक्री करने तक की कोशिशें भी सामने आई हैं। इस पूरे अवैध खेल में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और रेल प्रशासन की मिलीभगत की भी बात सामने आ रही है।
ये भी पढ़ें: रिमांड होम में बाल कैदी ने किया सुसाइड, बाथरूम में फंदे से लटका मिला शव; पांच दिन पहले आया था
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रेलवे के कुछ अधिकारियों को पहले से ही कथित ‘सहयोग राशि’ पहुंचा दी जाती है, जिससे वे इन अवैध गतिविधियों पर आंख मूंद लेते हैं। जब कभी रेलवे के वरीय अधिकारी निरीक्षण करने आते हैं, तो थोड़ी देर के लिए गतिविधियां थम जाती हैं, लेकिन उनके जाते ही फिर से कब्जा शुरू हो जाता है। घोड़ासहन बाजार में कई दुकानदार अब इन जमीनों को अपनी संपत्ति बताकर दावा कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कई बार जमीन की पैमाइश भी हुई, लेकिन मामला दबा दिया गया। इस संबंध में पूछे जाने पर आरपीएफ इंस्पेक्टर एके चौधरी ने जवाब देने से बचते हुए कहा कि यह मामला रेलवे इंजीनियरिंग विभाग से जुड़ा है, उनसे बात करें। वहीं, रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के एईएन ने बताया कि इस मामले की जांच की जा रही है।
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स्थानीय सूत्रों के अनुसार, करीब एक एकड़ से अधिक रेलवे जमीन पर कब्जा हो चुका है। माफिया पहले अस्थायी छतरी लगाकर दुकानें कम किराये पर देते हैं, फिर झुग्गी बनाकर उससे भी अधिक किराया वसूलते हैं। अब तो लोहे के स्ट्रक्चर डालकर दो-दो लाख रुपये की पगड़ी लेकर दुकानदारों से मनमाना किराया वसूला जा रहा है। इतना ही नहीं, इन माफियाओं द्वारा बाकायदा बॉन्ड पेपर पर किरायनामा तैयार किया जा रहा है और कई मामलों में तो रेलवे की जमीन को बिक्री करने तक की कोशिशें भी सामने आई हैं। इस पूरे अवैध खेल में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और रेल प्रशासन की मिलीभगत की भी बात सामने आ रही है।
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रेलवे के कुछ अधिकारियों को पहले से ही कथित ‘सहयोग राशि’ पहुंचा दी जाती है, जिससे वे इन अवैध गतिविधियों पर आंख मूंद लेते हैं। जब कभी रेलवे के वरीय अधिकारी निरीक्षण करने आते हैं, तो थोड़ी देर के लिए गतिविधियां थम जाती हैं, लेकिन उनके जाते ही फिर से कब्जा शुरू हो जाता है। घोड़ासहन बाजार में कई दुकानदार अब इन जमीनों को अपनी संपत्ति बताकर दावा कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कई बार जमीन की पैमाइश भी हुई, लेकिन मामला दबा दिया गया। इस संबंध में पूछे जाने पर आरपीएफ इंस्पेक्टर एके चौधरी ने जवाब देने से बचते हुए कहा कि यह मामला रेलवे इंजीनियरिंग विभाग से जुड़ा है, उनसे बात करें। वहीं, रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के एईएन ने बताया कि इस मामले की जांच की जा रही है।