Bihar: जहां भक्त नहीं, खुद बागमती करती है भोलेनाथ का जलाभिषेक! सावन में बंद रहता है इस अनोखे शिव मंदिर का पट
मुजफ्फरपुर के कटरा प्रखंड के धनौर गांव स्थित बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। सावन के महीने में बागमती नदी का जलस्तर बढ़ने से मंदिर पानी में डूब जाता है और भगवान शिव जलशयन करते हैं।
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सावन का महीना शुरू होते ही देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। हर कोई भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करता है। लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में भगवान शिव का एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां सावन में न तो भक्त जल चढ़ाते हैं और न ही मंदिर के कपाट खुले रहते हैं। यहां नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाली बागमती नदी खुद भगवान शिव का जलाभिषेक करती है। यही वजह है कि यह मंदिर दूर-दूर तक अपनी अनोखी परंपरा और धार्मिक मान्यता के लिए प्रसिद्ध है।
कटरा के धनौर गांव में स्थित है बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर
यह अनोखा मंदिर मुजफ्फरपुर जिले के कटरा प्रखंड के धनौर गांव के पास बागमती नदी के उत्तरी किनारे स्थित है। इसका नाम बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर है। मंदिर की धार्मिक मान्यता इतनी गहरी है कि आसपास के जिलों के अलावा नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।
सावन में बंद रहता है मंदिर का पट
आमतौर पर सावन में सभी शिवालयों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। लेकिन बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर की परंपरा इससे बिल्कुल अलग है। सावन के दौरान बागमती नदी का जलस्तर बढ़ने से पूरा मंदिर पानी में डूब जाता है। इस दौरान मंदिर का पट बंद कर दिया जाता है और बाबा जलशयन करते हैं।
इस समय मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं लगती। केवल इक्का-दुक्का श्रद्धालु दूर से दर्शन करने पहुंचते हैं।
बागमती नदी करती है भगवान शिव का जलाभिषेक
स्थानीय लोगों की मान्यता है कि सावन में बागमती नदी स्वयं भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करती है। जो श्रद्धालु इस दौरान पूजा करना चाहते हैं, वे बागमती नदी में जल अर्पित करते हैं और वही जल भगवान शिव तक पहुंचता है। इसी वजह से इस मंदिर की परंपरा पूरे क्षेत्र में अनोखी मानी जाती है।
पास में है मां चामुंडा का ऐतिहासिक मंदिर
बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर के ठीक दूसरी ओर शक्तिपीठ मां चामुंडा देवी का ऐतिहासिक मंदिर भी स्थित है। यह मंदिर भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। दोनों मंदिरों का धार्मिक महत्व दूर-दूर तक माना जाता है।
छह महीने तक जलशयन में रहते हैं बाबा
मंदिर के पुजारी शंकर कुमार उर्फ दानी बताते हैं कि यह मंदिर काफी प्राचीन है। बचपन से मंदिर की सेवा कर रहे दानी के अनुसार, वर्षों पहले शिवलिंग को नदी से निकालकर दूसरी जगह स्थापित करने का प्रयास किया गया था, लेकिन शिवलिंग का अंतिम छोर नहीं मिल सका। इसके बाद उसे उसी स्थान पर रहने दिया गया।
उन्होंने बताया कि पहले यहां छोटा मंदिर था, जो बागमती नदी के कटाव में समा गया। बाद में स्थानीय लोगों के सहयोग से बड़ा मंदिर बनाया गया। पुजारी के अनुसार, बाबा धनेश्वर नाथ हर साल करीब छह महीने जलशयन करते हैं और इस दौरान मंदिर का पट बंद रहता है।
नाव और पीपा पुल के सहारे पहुंचते हैं श्रद्धालु
पुजारी के अनुसार, बाढ़ के दिनों में मंदिर तक पहुंचने का एकमात्र सहारा नाव होती है। पानी कम होने के बाद श्रद्धालु पीपा पुल के जरिए मंदिर तक पहुंचते हैं। उनका कहना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत बाबा धनेश्वर नाथ जरूर पूरी करते हैं।
हर साल डूबता है मंदिर, फिर भी नहीं हुआ नुकसान
स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि बागमती नदी में बाढ़ आने पर हर साल कई घर, पुल, पुलिया और झोपड़ियां बह जाती हैं या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इसके बावजूद आज तक बाबा धनेश्वर नाथ मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। हर वर्ष मंदिर का आधा हिस्सा करीब दो से तीन महीने तक पानी में डूबा रहता है। बाढ़ के दिनों में शिवलिंग के ऊपर लगभग 8 से 10 फीट तक पानी भर जाता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि स्वयं बागमती नदी द्वारा भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक है। इसी आस्था के कारण यह मंदिर सावन में श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है।