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Bihar : हरियाणा में पति ने जान दी, शव देखकर बिहार में पत्नी की मौत; प्रेम की मिसाल, मगर मौत का कारण तनातनी

Sat, 18 Apr 2026 04:43 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Sat, 18 Apr 2026 04:43 PM IST
सार

Husband Wife : पति परदेस में रहकर जो भी कुछ पैसे भेजता, वह परिवार के लिए नाकाफी था। उसपर माइक्रो फाइनेंस का कर्ज। पति-पत्नी के प्रेम में यह आर्थिक तंगी इतना बड़ा मुद्दा बनी कि हरियाणा में युवक ने जान दे दी। पति की मौत के सदमे में पत्नी भी चल बसी।

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Muzaffarpur Bihar news : husband commit suicide then wife also gave up her life two bodies
पति पत्नी की एक साथ उठी अर्थी

विस्तार

इसे नियति का क्रूर मजाक कहें, पारिवारिक कलह कहें या फिर आर्थिक तंगी—एक ही घर से चंद घंटों के भीतर उठी दो अर्थियों ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। पति की मौत की खबर सुनते ही सुहाग के शव से लिपटी पत्नी पूजा देवी (27 वर्ष) ने भी प्राण त्याग दिए। मुजफ्फरपुर जिले के एक श्मशान घाट पर दोनों का अंतिम संस्कार किया गया, जिसे देख हर आंख नम थी और हर दिल गमगीन था।

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जो पैसे भेजता, वह माइक्रो फाइनेंस के कर्ज में चला जाता
बताया गया है कि सुबधीया नूर गांव निवासी योगेंद्र राम के 30 वर्षीय पुत्र राजेश राम हरियाणा के करनाल में एक फैक्ट्री में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। वहीं घर पर पत्नी पूजा देवी अपने पांच वर्षीय पुत्र और वृद्ध माता-पिता के साथ रहती थी। पति जो भी पैसे भेजता था, वह 'समूह' (माइक्रोफाइनेंस) का कर्ज चुकाने में ही खत्म हो जाता था। इसको लेकर पति-पत्नी के बीच फोन पर विवाद हुआ था, जिससे आहत होकर पति ने हरियाणा में ही फंदे से लटककर जान दे दी। जब उसका शव एंबुलेंस से घर पहुंचा, तो यह देख पूरे परिवार में कोहराम मच गया।
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श्मशान घाट से लौटे तो पता चला, पूजा ने भी दम तोड़ दिया
परिजन और ग्रामीण पति के शव को स्थानीय श्मशान घाट ले गए। दाह संस्कार के बाद जैसे ही लोग घर लौटे, पति के वियोग में बेसुध पूजा देवी ने भी दम तोड़ दिया। एक ही आंगन में दोबारा मातम पसर गया और कुछ ही घंटों बाद उसी श्मशान घाट पर पूजा की भी अर्थी पहुंची। बताया गया है कि पूजा देवी और उसके पति के बीच हुआ विवाद महज 'तू-तू मैं-मैं' नहीं था, बल्कि वह उस व्यवस्था के खिलाफ एक चीख थी, जहां गरीब की आधी कमाई ब्याज और किश्तों में चली जाती है।
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घर चलाने की जद्दोजहद और खाली पेट के सवालों ने पहले पति को मौत को गले लगाने पर मजबूर किया और फिर उस सदमे ने एक सुहागन की सांसें छीन लीं। ग्रामीण कहते हैं, "हमने सात जन्मों के साथ की कसमें तो सुनी थीं, पर मौत का ऐसा साथ कभी नहीं देखा।" गांव वाले इस बात से डरे हुए हैं कि अब इन बुजुर्ग दादा-दादी और इस छोटे बच्चे का सहारा कौन बनेगा। वहीं, रो-बिलखती महिलाओं ने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज को तोड़ देती हैं और इससे गरीबी की भयावहता भी सामने आती है।

पति पत्नी की एक साथ उठी अर्थी

पति पत्नी की एक साथ उठी अर्थी

 

पति पत्नी की एक साथ उठी अर्थी

पति पत्नी की एक साथ उठी अर्थी

 

पति पत्नी की एक साथ उठी अर्थी

पति पत्नी की एक साथ उठी अर्थी

 

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