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Bihar News: चमकी बुखार के मामले आते ही अलर्ट मोड में स्वास्थ्य विभाग, तेज होगा जन जागरूकता अभियान

Sun, 02 Mar 2025 08:34 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Sun, 02 Mar 2025 08:34 PM IST
सार

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार के मामले आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को AES से संबंधित जानकारी देने का अभियान तेज कर दिया है। इसके तहत बच्चों और अभिभावकों को जागरूक करने के लिए विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं।

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Muzaffarpur: Health department in alert mode as soon as cases of Chamki fever come, public awareness campaign
एईएस के मामले सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर - फोटो : अमर उजाला

गर्मी बढ़ते ही मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच (श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल) में चमकी बुखार यानी AES (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) से पीड़ित दो बच्चों को भर्ती किया गया है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है।


 
AES का पीक सीजन आमतौर पर अप्रैल और मई माना जाता है, लेकिन इस बार मार्च से पहले ही मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। बीते दो वर्षों में जिले में बेहतर कार्य की वजह से जीरो डेथ पॉलिसी पर काम किया गया था। अब फिर से उसी नीति को दोहराने की योजना बनाई जा रही है।
 

Muzaffarpur: Health department in alert mode as soon as cases of Chamki fever come, public awareness campaign
एईएस के मामले सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर - फोटो : अमर उजाला

AES से बचाव को लेकर तेज हुआ जन जागरूकता अभियान
स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को AES यानी चमकी बुखार से संबंधित जानकारी देने का अभियान तेज कर दिया है। इसके तहत बच्चों और अभिभावकों को जागरूक करने के लिए विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं, ताकि वे बीमारी के लक्षणों को पहचान सकें और समय पर इलाज के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंच सकें।
 
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल किए गए सफल प्रयासों को इस बार भी दोहराया जाएगा, ताकि बीमारी के मामलों को गंभीर होने से पहले ही रोका जा सके। इसके लिए सभी पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) और सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
 

Muzaffarpur: Health department in alert mode as soon as cases of Chamki fever come, public awareness campaign
एईएस के मामले सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर - फोटो : अमर उजाला

बच्चों और अभिभावकों के लिए डॉक्टरों की सलाह
केजरीवाल अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बीएन तिवारी ने बताया कि AES का सटीक कारण अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। लेकिन यह आमतौर पर गर्मी के मौसम में तेजी से फैलता है। खासतौर पर कुपोषित बच्चे इस बीमारी का अधिक शिकार होते हैं। उन्होंने बताया कि AES में शुगर और ग्लूकोज का स्तर तेजी से गिर जाता है, जिससे बच्चे बेहोश हो सकते हैं। यह इसलिए होता है क्योंकि गर्मी के दिनों में बच्चे दिनभर खेलते हैं और रात में भूखे सो जाते हैं। ऐसे में अभिभावकों को खास ध्यान रखना होगा कि बच्चे सही समय पर भोजन करें और हाइड्रेटेड रहें।
 
डॉ. तिवारी ने सलाह दी कि अगर बच्चे को तेज बुखार आता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अगर बच्चे को चमकी (झटके) आते हैं, तो उसे तुरंत नजदीकी पीएचसी या सीएचसी में ले जाएं। बच्चों को सुबह का नाश्ता जरूर दें और उन्हें भरपूर पानी पिलाएं ताकि डिहाइड्रेशन न हो।
 

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एईएस के मामले सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर - फोटो : अमर उजाला

सभी अस्पतालों को दिए गए निर्देश
AES को लेकर सिविल सर्जन डॉ. अजय कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी जीरो डेथ पॉलिसी के तहत काम किया जाएगा। इसके तहत सभी चिकित्सा प्रभारियों के साथ बैठक की गई है। स्वास्थ्य कर्मियों को फिर से AES से संबंधित ट्रेनिंग दी जाएगी। गांवों में आंगनबाड़ी सहायिका, सेविका और एएनएम के सहयोग से जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। AES के लक्षणों की जानकारी देने के लिए पोस्टर, पंपलेट और ऑडियो विजुअल माध्यमों का भी उपयोग किया जाएगा।
 
मेडिकल कॉलेज और पीएचसी में बेड रिजर्व
जिला स्वास्थ्य विभाग ने AES के संभावित मामलों को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में विशेष तैयारी की है। मुजफ्फरपुर के SKMCH में 100 बेड का विशेष PICU वार्ड तैयार किया गया है। सभी पीएचसी और सीएचसी में दो-दो ICU बेड रिजर्व किए गए हैं, ताकि गंभीर मामलों में मरीजों को तुरंत भर्ती कर इलाज किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार अस्पतालों की स्थिति का जायजा ले रही है और स्टाफ को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
 

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एईएस के मामले सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर - फोटो : अमर उजाला

AES को लेकर स्वास्थ्य विभाग की सख्त निगरानी
स्वास्थ्य विभाग ने AES से जुड़े मामलों की रोकथाम के लिए पहले से ही संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी शुरू कर दी है। फील्ड में काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना तुरंत दें, ताकि समय पर उचित कदम उठाए जा सकें।
 
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अगर समय पर इलाज मिल जाए, तो इस बीमारी से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। पिछले साल की तरह इस साल भी विभाग पूरी सतर्कता से काम कर रहा है और जल्द ही व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा।

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