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Bihar News: 'विपक्षी दलों को राम के नाम से परेशानी है', मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कसा तंज

Sat, 10 Jan 2026 08:48 AM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Sat, 10 Jan 2026 08:48 AM IST
सार

मुजफ्फरपुर में राज्य सरकार के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्षी दलों को राम के नाम से परेशानी है, जबकि महात्मा गांधी और रामराज्य की परंपरा में इसका महत्व है।

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Muzaffarpur Bihar news : bjp minister says  opposition has problem on ram name we do for people
राज्य सरकार के मंत्री और पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्य सरकार के मंत्री और पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने मुजफ्फरपुर में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि विपक्षी दलों को राम के नाम से परेशानी होती है। उन्होंने कहा, “इन्हें यह नहीं पता कि खुद महात्मा गांधी रामराज्य की बात करते थे और उनके अंतिम शब्द भी ‘हे राम’ थे। मनरेगा में ‘जी राम जी’ नाम करने से इन्हें किरकिरी हो रही है। हमारा मकसद हर गरीब को रोजगार और उसकी गरिमा का सम्मान देना है।”
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मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने बताया कि केंद्र सरकार ने देश के सभी गरीब, जनजाति और पिछड़े वर्ग को रोजगार सुनिश्चित करने के लिए यह बिल लाया है। यह बिल विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय मिशन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक महात्मा गांधी जी की भावना के अनुरूप है और रामराज्य की स्थापना के उद्देश्य से लाया गया है।
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पर्यटन मंत्री ने कहा कि इस नई योजना में काम के दिन बढ़ाए गए हैं और सभी मजदूरों को पारिश्रमिक भी जल्दी मिलेगा। “हर ग्रामीण परिवार जो बिना कौशल के काम करने के लिए तैयार है, उसे साल में 125 दिन का वेतनयुक्त रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही वन क्षेत्रों में काम करने वाले अनुसूचित जनजाति के कामगारों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार मिलेगा। इससे कृषि और मजदूरी के बीच संतुलन स्थापित होगा।”
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उन्होंने बताया कि मनरेगा योजना साल 2006 में लागू हुई थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक इस पर 11.74 लाख करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जिसमें बिहार सरकार ने 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। नए विधेयक में 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है। यह कोई कोरी गारंटी नहीं है, बल्कि ₹1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि का प्रावधान भी शामिल है।

मंत्री ने कहा कि पहले आवास योजना का नाम ग्रामीण आवास योजना था, जिसे राजीव गांधी ने 1985 में बदलकर इंदिरा आवास योजना किया। अप्रैल 2005 में ग्रामीण विद्युतीकरण योजना को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना बनाया गया, जिसे 25 जुलाई 2015 को दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना कर दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि जब कांग्रेस सरकार ने जवाहर रोजगार योजना का नाम बदलकर नरेगा किया, तो क्या यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान था? अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि हर योजना में गांधी-नेहरू परिवार का नाम जबरन जोड़ा गया। मोदी सरकार में नाम नहीं, काम बोलता है। यही वजह है कि जनता सरकार को लगातार प्यार दे रही है और देश की जनता सभी योजनाओं का लाभ उठा रही है।

 

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