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Bihar: मरीजों को आभा एप से जोड़ने की कवायद हुई फेल, परिजनों ने किया हंगामा; लोग बिना इलाज के वापस लौट रहे

Wed, 07 Feb 2024 03:14 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीतामढ़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीतामढ़ी Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 07 Feb 2024 03:14 PM IST
सार

Sitamarhi Hindi News: गरीब तबके के लोगों का कहना है कि हमारे पास बड़ा मोबाइल नहीं है तो क्या हमारा इलाज नहीं होगा? ऐसे में मरीज और उनके परिजनों को काफी परेशानी हो रही है। वहीं, कार्यरत कर्मियों का कहना है कि लोग छोटा मोबाइल लेकर आते हैं, जिसकी वजह से बारकोड स्कैन नहीं हो पाता है। पढ़ें पूरी खबर...।

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Effort to connect patients with Abha App in Sitamarhi Sadar Hospital failed, family members created ruckus
सीतामढ़ी सदर अस्पताल में आभा एप से पंजीकरण कराने पहुंचे मरीज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार के सीतामढ़ी सदर अस्पताल में आने वाले मरीजों को आभा एप से जोड़ने की कवायद फेल साबित हो रही है। बिना मोबाइल के पर्ची नहीं कटने से मरीजों के परिजन आक्रोशित भी हो रहे हैं, जिसका खामियाजा काउंटर पर मौजूद कर्मियों को झेलना पड़ रहा है। दूर-दराज से आए बिना मोबाइल के लोगों का इलाज नहीं हो पा रहा है।

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गरीब तबके के लोगों का कहना है कि हमारे पास बड़ा मोबाइल नहीं है तो क्या हमारा इलाज नहीं होगा? ऐसे में मरीज और उनके परिजनों को काफी परेशानी हो रही है। वहीं, कार्यरत कर्मियों का कहना है कि लोग छोटा मोबाइल लेकर आते हैं, जिसकी वजह से बारकोड स्कैन नहीं हो पाता है। कुछ लोग बारकोड स्कैन करने के बावजूद सही से जानकारी नहीं भर पाते हैं, जिसकी वजह से उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ जाता है।
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‘चार घंटे बाद भी नहीं मिली पर्ची’
जानकारी के मुताबिक, सीतामढ़ी सदर अस्पताल में बुधवार को सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष मरीज इलाज के लिए अपने-अपने परिजनों के साथ पहुंचे थे। जहां करीब 4-5 घंटे से लाइन में खड़े मरीज के परिजनों ने बताया कि दूर से आए हैं और अभी तक पर्ची नहीं कटी है। गरीब तबके के लोग हैं, अगर मोबाइल खरीदने के लिए पैसा होता तो गांव में ही इलाज करा लेते। वहीं, इस दौरान दर्जनों महिलाएं हंगामा करने लगीं। वे सरकार को कोसते हुए बोलीं कि काफी दूर से इलाज कराने आए हैं और उनके पास बड़ा मोबाइल नहीं है। ऐसे में इलाज कैसे होगा, समस्या बनी हुई है। गंभीर बीमारी से ग्रसित एक मरीज के साथ आई महिला का कहना था कि जब तक मोबाइल खरीद कर लाएंगे, तब तक हमारे परिजन की मृत्यु भी हो जाएगी।
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‘मोबाइल होने के बावजूद लगता है टाइम’
वहीं, अपने पैर का जख्म दिखाने आए अभय कुमार ने बताया कि उनके पास बड़ा मोबाइल भी है। उन्होंने बारकोड स्कैन भी किया है। पूरा फॉर्म भरने के बावजूद उनका नंबर अभी तक नहीं आया है। काउंटर पर पूछे जाने पर कहा गया कि फाइनल सबमिट में गड़बड़ी है, टाइम लगेगा। पिछले चार घंटे से खड़े हैं, बावजूद अब तक उनका नंबर नहीं आया है।

गौरतलब है कि सदर अस्पताल में आने वाले मरीजों को आभा एप से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस एप की खासियत यह है इसपर एक बार मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो जाता है। उसके बाद मरीज की पूरी हिस्ट्री एप पर मौजूद रहेगी। दोबारा मरीज जब भी अस्पताल आएगा तो पहले कौन सी बीमारी थी और क्या इलाज चला, यह सब एप पर मौजूद रहेगा।

 
सैकड़ों मरीज वापस लौट रहे
साथ ही अस्पताल में विभिन्न बीमारियों की जांच रिपोर्ट भी ऑनलाइन मिलेगी। इसके लिए मरीज को पैथोलॉजी जाने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही पर्चा बनवाने के लिए लाइन में भी नहीं लगना पड़ेगा। क्यूआर कोड के माध्यम से तुरंत ही पर्चा बन जाएगा। इस एप की शुरुआत जिला अस्पताल में करीब तीन माह पहले हुई थी। शुरुआत में रोजाना 30 से 40 मरीजों के पर्चा बनते थे। अब यह सिमटकर महज 10 से 15 तक आ गए हैं। वहीं, दर्जनों मरीज मोबाइल न होने की वजह से वापस लौट जा रहे हैं। 

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