{"_id":"672311a38e581fb590025a99","slug":"diwali-2024-unique-way-of-celebrating-diwali-in-bihar-people-lit-5100-lamps-and-took-a-pledge-to-save-trees-2024-10-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Diwali 2024: बिहार में दिवाली मनाने का अनोखा अंदाज, लोगों ने 5100 दीप जलाए और वृक्षों को बचाने का लिया संकल्प","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Diwali 2024: बिहार में दिवाली मनाने का अनोखा अंदाज, लोगों ने 5100 दीप जलाए और वृक्षों को बचाने का लिया संकल्प
Thu, 31 Oct 2024 10:42 AM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेतिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेतिया
Published by: अरविंद कुमार
Updated Thu, 31 Oct 2024 10:42 AM IST
सार
बिहार में दिवाली मनाने का अनोखा अंदाज देखने को मिला है। सैकड़ों लोगों ने 5100 दीप जलाए और वृक्षों को बचाने का संकल्प लिया।
विज्ञापन
5100 दीप जलाए
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार के बेतिया में पर्व मनाने का एक अनोखा अंदाज सामने आया है। मामला बगहा पुलिस जिले के एक छोटा सा गांव बरवल पिपरा का है। जहां पेड़ों के साथ दिवाली, होली और रक्षाबंधन समेत पर्व त्योहार बड़े धूमधाम से मनाए जाने का परम्परा वर्षों से चला रहा है। इसी कड़ी में एक साथ सैकड़ों लोगों ने 5100 दीप पेड़ पौधो के नीचे जलाए और वृक्षों को बचाने का संकल्प लिया।
विज्ञापन
खास बात है कि बिहार के इकलौते वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के सीएफ डॉ. नेशामणी के भी ग्रामीणों के कदमताल होकर पर्यावरण प्रेमी गजेंद्र यादव के पहल की सराहना किया। दरअसल, जलवायु परिवर्तन के बीच पर्यावरण संरक्षण में पेड़ पौधों का होना बेहद जरूरी है। क्योंकि वृक्ष है तो हमारी सांसें हैं। लिहाजा वृक्षारोपण कर वृक्ष संरक्षण के क्षेत्र में दिल के मरीज गजेंद्र ने कृतिमान रचा है।
विज्ञापन
आगे बताते चले कि देश भर में दिवाली का पर्व धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के आधार पर परम्परागत तरीके से मनाया जा रहा है। लेकिन बिहार के इस छोटे से गांव बरवल पिपरा में हर वर्ष दिवाली पेड़ पौधों को रोशन कर वृक्ष संरक्षण के लिहाज से मनाया जा रहा है, जिसका मकसद है मानव जीवन को हरियाली के साथ बरकरार रखना है। क्योंकि अब तक इस युवक ने दस लाख से अधिक वृक्ष लगाए हैं और इन्हीं पेड़ पौधों को ये अपना घर परिवार यहां तक की पत्नी और संतान मान इनकी रक्षा विगत 15 वर्षों से करते चले आ रहे हैं।
विज्ञापन
इसके कायल पंचायत के मुखिया अब्दुल राशिद उर्फ छोटे से लेकर VTR के निदेशक डॉ. नेशामणी के और बिहार के मुखिया नीतीश कुमार भी उनके कार्यों को लेकर पुरस्कृत किया है। दीपावली की धूम में यहां आईपीएस विकास वैभव चौराहे पर नर्सरी बनाई गई है। जहां स्कूली बच्चों के साथ-साथ सेना के जवान और अधिकारी समेत पुलिस प्रशासन की ओर से पेड़ों की दिवाली को यादगार बनाया गया है।
गजेंद्र बताते हैं कि वर्ष 2003 में रेडियो पर पर्यावरण संबंधी कार्यक्रम सुनने के बाद पौधारोपण की प्रेरणा मिली। उसी समय से जगह-जगह पौधे लगाते रहे हैं। वर्ष 2003 में उन्होंने अपनी नर्सरी खोल ली। दीपावली में नर्सरी को दीया और बिजली-बत्ती से सजाते थे। यहीं से उन्हें सड़कों के किनारे पेड़ों के नीचे दीया जलाने का ख्याल आया।
गजेंद्र का पर्यावरण के प्रति लगाव को देखकर लोग पहले मजाक उड़ाते थे। गजेंद्र ने 2003 में पौधारोपण शुरू किया। लेकिन, धीरे-धीरे गांव और आसपास के लोग भी प्रेरित हुए, जहां बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। गजेंद्र अपनी नर्सरी से तैयार किए हुए पौधे को फ्री में वन विभाग और मनरेगा तक में देते आए हैं। गजेंद्र एसएसबी कैंप, मंदिर, कब्रगाह, सरकारी विभाग के खाली पड़ी जमीनों पर लोगों के साथ मिलकर एक टीम बनाकर पौधा रोपण करते हैं।
गजेंद्र ने अब तक शादी नहीं की है। वे बताते हैं कि पौधे ही हमारी संतान हैं। शादी करने के बाद सामाजिक उलझने बढ़ जाएगी। इसकी वजह से इस काम से मेरा मन भटक जाएगा। यही कारण है कि शादी नहीं की। गजेंद्र मात्र पांचवी क्लास तक पढ़ाई किए हुए हैं। वे बताते हैं कि पिता की विकलांगता के कारण पढ़ाई नहीं कर सके। बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने 2013 में गजेंद्र को प्रशस्ति पत्र और 11 हजार का चेक देकर हरियाली समागम में सम्मानित किया था। 2017 में पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी गजेंद्र को सम्मानित किया था।