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Bihar News: शादी में फेरे होने ही वाले थे अचानक पहुंची 'वो', फिर दूल्हे को बगैर दुल्हनिया के ही लौटना पड़ा

Wed, 21 Aug 2024 08:57 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीतामढ़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीतामढ़ी Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 21 Aug 2024 08:57 PM IST
सार

Sitamarhi News: सीतामढ़ी में एक विवाह भवन में दूल्हा-दुल्हन शादी के फेरे लेने ही वाले थे कि पुलिस मौके पर पहुंच गई। इससे वहां अफरातफरी का माहौल बन गया। आखिर में कुछ ऐसा हुआ कि शादी रुक गई और दूल्हे को बिना दुल्हन के ही मंडप से लौटना पड़ा। जानें पूरा मामला...।

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Bihar News: Police arrived at time of wedding in Sitamarhi, stopped wedding by saying that bride was a minor
पुलिस और बचपन बचाओ आंदोलन की टीम ने रुकवाई शादी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीतामढ़ी जिले के रुन्नीसैदपुर के एक विवाह भवन में लड़की की शादी थी। दूल्हा बारात लेकर पहुंच गया था। शादी की रस्म भी शुरू हो गई थी। हालांकि फेरे होने बाकी थे। इससे पहले ही पुलिस ने वहां पहुंचकर लड़की को नाबालिग बताते हुए शादी रुकवा दी। इसके बाद बारात को बिना दुलहन के ही वापस लौटना पड़ा।

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जानकारी के मुताबिक, सीतामढ़ी जिले के रुन्नीसैदपुर के एक विवाह भवन में दूल्हा-दुलहन की शादी की पूरी तैयारी हो चुकी थी। इस दौरान पुलिस के पहुंचते ही विवाह भवन में अफरातफरी का माहौल कायम हो गया। दरअसल, उक्त विवाह भवन में 15 वर्षीय नाबालिग लड़की की शादी कराई जा रही थी। पुलिस को इसकी सूचना बचपन बचाव आंदोलन सूत्रों से मिली। उसके बाद पुलिस के साथ टीम मौके पर पहुंची और दुल्हन के परिवार वालों को डांट फटकार लगाई। फिर शादी को रुकवा दिया गया। बताया जा रहा है कि दूल्हा भी सज-धज कर विवाह भवन पहुंच चुका था। लेकिन ऐन वक्त पर बाल-विवाह की भनक प्रशासन को लग गई। इसके तुरंत बाद बचपन बचाओ आंदोलन, चाइल्ड हेल्पलाइन पुलिस बल के साथ टीम प्रखंड विकास पदाधिकारी सह सहायक बाल विवाह निषेध पदाधिकारी सुनील कुमार के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। फिर कार्रवाई करते हुए नाबालिग लड़की की शादी को रुकवा दिया गया। 
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बीडीओ सुनील कुमार ने नाबालिग लड़की के अभिभावक से बात की। लड़की की उम्र 15 वर्ष पता चलने पर बीडीओ ने उसके परिवार वालों को कड़ी फटकार लगाई। बीडीओ ने बांड पत्र भरवाने के बाद लड़के और लड़की पक्ष के लोगों को बाल विवाह निषेध कानून का उल्लंघन किए जाने पर कानूनी कार्रवाई करने की कड़ी चेतावनी दी। साथ ही विवाह भवन संचालक को भी फटकार लगाई।
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टीम में शामिल प्रशिक्षु पुलिस अवर निरीक्षक अमृत पाल और बचपन बचाओ आंदोलन के सीनियर सहायक परियोजना अधिकारी मुकुंद कुमार चौधरी ने बाल विवाह निषेध कानून की जानकारी और उल्लंघन पर सजा के प्रावधानों से परिवार को अवगत करवाया। लड़की और लड़के वालों के परिवार के सदस्यों ने प्रशासनिक टीम से मांफी मांगते हुए वादा किया कि भविष्य में इस प्रकार की दोबारा गलती नहीं करेंगे।


इस संदर्भ में प्रखंड विकास पदाधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम पुरुषों के लिए न्यूनतम 21 वर्ष और लड़की के लिए 18 वर्ष निर्धारित करता है। बाल विवाह शिक्षा, स्वास्थ्य और बचपन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। बाल विवाह का सीधा असर न केवल लड़के-लड़कियों पर, बल्कि उनके परिवार और समुदाय पर भी होता है। उन्होंने कहा की बाल विवाह पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाने के लिए पंचायत स्तर पर गठित बाल संरक्षण समिति के माध्यम से निरंतर बैठक कर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बाल विवाह निषेध अधिनियम के अंतर्गत आर्थिक दंड के साथ कारावास की सजा का भी प्रावधान है। मौके पर रून्नीसैदपुर थाना का पुलिस बल, चाइल्ड हेल्पलाइन के केस वर्कर कृष्ण कुमार सिंह, कृष्ण कुमार पासवान और सुपरवाइजर किशुन कुमार चंद्रवंशी आदि टीम में शामिल रहे।

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