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Bihar News: विदाई ऐसी कि हर आंखें हुईं नम! बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कंधा, पेश की मिसाल
Tue, 12 May 2026 03:17 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Tue, 12 May 2026 03:17 PM IST
सार
Bihar News: वैशाली के नया टोला गांव में पांच बेटियों ने समाज की रूढ़िवादी सोच को तोड़ते हुए अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया और पूरे रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया। इस कदम ने बेटा-बेटी में भेदभाव पर सवाल उठाते हुए एक मजबूत सामाजिक संदेश दिया है। पढ़ें पूरी खबर...
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! बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कंधा
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
समाज में वर्षों से चली आ रही उस परंपरा को नया टोला गांव की पांच बेटियों ने चुनौती दी है, जिसमें माना जाता है कि पिता की अर्थी को सिर्फ बेटा ही कंधा देता है। वैशाली थाना क्षेत्र के नया टोला निवासी तारिणी प्रसाद सिंह के निधन के बाद उनकी पांच बेटियों ने न सिर्फ अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई, बल्कि अर्थी को कंधा देकर सामाजिक सोच को भी बदलने का संदेश दिया।
पांच बेटियों ने पिता को दिया कंधा
तारिणी प्रसाद सिंह के परिवार में पत्नी ललिता देवी और पांच बेटियां पूनम, नीलम, माधुरी, माला और चांदनी हैं। पुत्र नहीं होने के कारण अंतिम संस्कार को लेकर शुरुआत में असमंजस की स्थिति बनी, लेकिन बेटियों ने हिम्मत दिखाते हुए पिता को अंतिम विदाई दी।
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लड़का-लड़की में भेदभाव किया जाता है
बेटियों ने कहा कि समाज में आज भी लड़का-लड़की के बीच भेदभाव किया जाता है, जबकि लड़कियां हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने उन्हें पढ़ा-लिखाकर इस काबिल बनाया और अब अंतिम समय में उन्होंने अपना फर्ज निभाया है। माधुरी सिंह ने कहा कि वे यह संदेश देना चाहती हैं कि बेटियां कमजोर नहीं होतीं, बल्कि वे भी बेटों की तरह हर जिम्मेदारी निभा सकती हैं। इस घटना के बाद पूरे गांव में भावुक माहौल है और लोग बेटियों के इस कदम की सराहना कर रहे हैं।
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पांच बेटियों ने पिता को दिया कंधा
तारिणी प्रसाद सिंह के परिवार में पत्नी ललिता देवी और पांच बेटियां पूनम, नीलम, माधुरी, माला और चांदनी हैं। पुत्र नहीं होने के कारण अंतिम संस्कार को लेकर शुरुआत में असमंजस की स्थिति बनी, लेकिन बेटियों ने हिम्मत दिखाते हुए पिता को अंतिम विदाई दी।
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लड़का-लड़की में भेदभाव किया जाता है
बेटियों ने कहा कि समाज में आज भी लड़का-लड़की के बीच भेदभाव किया जाता है, जबकि लड़कियां हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने उन्हें पढ़ा-लिखाकर इस काबिल बनाया और अब अंतिम समय में उन्होंने अपना फर्ज निभाया है। माधुरी सिंह ने कहा कि वे यह संदेश देना चाहती हैं कि बेटियां कमजोर नहीं होतीं, बल्कि वे भी बेटों की तरह हर जिम्मेदारी निभा सकती हैं। इस घटना के बाद पूरे गांव में भावुक माहौल है और लोग बेटियों के इस कदम की सराहना कर रहे हैं।