फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Muzaffarpur News ›   Bihar News: after soil brick and fly ash brick, engineering college making plastic brick from waste material

बिहार में बन रही प्लास्टिक की ईंट: कचरे में फेंके प्लास्टिक से इंजीनियरिंग कॉलेज ने किया प्रयोग, अब हुआ सफल

Thu, 14 Mar 2024 02:56 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Thu, 14 Mar 2024 02:56 PM IST
सार

Bihar News: दुनिया भर के लिए खतरे और चुनौती बन चुका प्लास्टिक को अब अनोखे तरीके से खत्म किया जायेगा। इसको लेकर अब बिहार के मुजफ्फरपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज ने कार्य शुरू कर दिया है और जिले के एमआईटी कॉलेज में प्लास्टिक के कचरे से ईंट बनाई जा रही है। इसको लेकर के मैकेनिकल विभाग के एचओडी प्रो.आशीष श्रीवास्तव  सहायक प्राध्यापक डॉ. शालिनी और एमटेक और बीटेक के कई छात्रों ने मिलकर यह प्रोजेक्ट तैयार किया है।

विज्ञापन
Bihar News: after soil brick and fly ash brick, engineering college making plastic brick from waste material
बिहार में बन रही प्लास्टिक की ईंट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुजफ्फरपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज में प्लास्टिक के कचरे से ईंट बनाई जा रही है। MIT के द्वारा पायलट प्रोजेक्ट के तहत यह कार्य किया जा रहा और अब अंतिम रूप में आईआईटी की मदद से पास कराया जाने के बाद इसका पेटेंट कराया जायेगा। इसको लेकर MIT के मैकेनिकल विभाग के हेड प्रो. आशीष ने बताया कि कॉलेज के सहयोग से प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। पहली चार वेस्ट प्लास्टिक से ईंट बनाई है और इसके लिए इ लोगों ने शहर के कई हिस्सों में डस्टबिन को लगाकर के प्लास्टिक उठाया। इसके बाद इस प्रोजेक्ट को तैयार किया।

विज्ञापन


उन्होंने बताया कि इस ईंट को बनाने के लिए जिप्सम और फ्लाई एश में प्लास्टिक को मिलाया है। यह बेहद टिकाऊ है और बहुत खड़ा उतरा है और यह भूकंप को भी झेलने वाला है। बताया जा रहा है कि इसकी टेस्टिंग भी कर ली गई है। प्रो. आशीष ने बताया कि प्लास्टिक की बनी ईंट की कांप्रेसिव स्ट्रेंथ मापने पर सामान्य इस्तेमाल होने वाली ईंटों से अधिक पाई गई। सामान्य ईंट की कांप्रेसिव स्ट्रेंथ 8.5 गीगा पास्कल की ही रहती है, जबकि एमआईटी में प्लास्टिक से बनी ईंट की कांप्रेसिव स्ट्रेंथ 11.6 पाई गई। 

विज्ञापन

प्रदूषण भी होगा कम 
मैकेनिकल विभाग में प्लास्टिक की ईंटों के अलावा अंडों के छिलके का इस्तेमाल कर कंपोजिट मैटेरियल तैयार किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट का फायदा होगा कि इसमें स्टील से ज्यादा मजबूत, लेकिन उससे हल्की वस्तु तैयार होगी, जिसका इस्तेमाल घर बनाने में किया जा सकता है। इस ईंट का एक बड़ा फायेंदा होगा की इससे प्रदूषण भी कम होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन


जिप्सम से जोड़ी जाएंगी ईंट
प्लास्टिक से बनी ये ईंट सीमेंट-बालू से नहीं बल्कि यह जिप्सम से जोड़ी जाएंगी। इसको लेकर के प्रो. आशीष ने बताया कि इस ईंट से दीवार बनाने में लागत सामान्य ईंट से कम आयेंगी। उन्होंने बताया कि हम लोगों ने पहले इस ईंट का इस्तेमाल कर एमआईटी में एक कमरा तैयार करेंगे। इसके बाद इसे अगले दो तीन माह में बाजार में उतारा जायेगा। इन प्लास्टिक से बनी ईंट से घर बनाने में बाजार में मिलने वाली दूसरी ईंट की तुलना में 40 प्रतिशत कम लागत आएगी। यही नहीं बल्कि इसमें सीमेंट बालू नहीं लगने से लोगों की जेब पर कम असर होगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed