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Bihar: फायर सेफ्टी पर बड़ा सवाल, समाहरणालय का डेढ़-दो साल से नहीं हुआ ऑडिट; अस्पताल-होटलों की जांच शुरू
Sat, 06 Jun 2026 09:07 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Sat, 06 Jun 2026 09:07 PM IST
सार
मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद मोतिहारी में फायर सेफ्टी जांच शुरू हुई है। इस बीच खुलासा हुआ कि जिला समाहरणालय का पिछले डेढ़-दो वर्षों से फायर ऑडिट नहीं हुआ है। सर्किट हाउस समेत कई सरकारी भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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फाइल फोटो- जिला समाहरणालय
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद पूरे बिहार में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक सक्रियता बढ़ गई है। पूर्वी चंपारण जिले में भी अग्निशमन विभाग अस्पतालों, होटलों और अन्य संस्थानों की जांच में जुट गया है। हालांकि इस बीच सबसे बड़ा सवाल जिले के समाहरणालय भवन की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर खड़ा हो गया है।
जानकारी के अनुसार, मोतिहारी समाहरणालय का पिछले डेढ़ से दो वर्षों से फायर सेफ्टी ऑडिट नहीं कराया गया है। ऐसे में जिले की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक इमारत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
समाहरणालय और सर्किट हाउस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
सूत्रों का कहना है कि समाहरणालय परिसर में आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त अग्निशमन उपकरण और सुरक्षा संसाधनों का अभाव है। यही स्थिति सर्किट हाउस की भी बताई जा रही है, जहां मुख्यमंत्री, मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों का नियमित आगमन होता रहता है। फायर सेफ्टी ऑडिट और सुरक्षा मानकों के अनुपालन को लेकर दोनों भवनों की स्थिति संतोषजनक नहीं मानी जा रही है।
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निजी संस्थानों की जांच, लेकिन सरकारी भवन भी घेरे में
मुजफ्फरपुर हादसे के बाद प्रशासन निजी अस्पतालों और होटलों की जांच कर रहा है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि जब सरकारी भवनों में ही सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन नहीं हो रहा, तो निजी संस्थानों पर कार्रवाई कितनी प्रभावी होगी। शहर में कई अस्पताल और होटल ऐसी संकरी गलियों में संचालित हो रहे हैं, जहां सामान्य दिनों में भी आवागमन प्रभावित रहता है। ऐसे में किसी आपात स्थिति के दौरान अग्निशमन वाहनों का वहां तक पहुंचना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
एनओसी जारी होने पर भी उठ रहे सवाल
जानकारों का कहना है कि जिले के कई संस्थानों को अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त है, जबकि वहां पर्याप्त निकासी मार्ग, अलग प्रवेश-निकास व्यवस्था और आधुनिक अग्निशमन उपकरणों जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। कुछ अस्पतालों के आईसीयू में भी मानक के अनुरूप फायर सेफ्टी व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आ रही है, जिससे मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ये भी पढ़ें- श्रावणी मेले से पहले गरीबनाथ धाम का बदलेगा स्वरूप, भव्य तोरण द्वार और टेंट सिटी समेत होंगी कई सुविधा
व्यापक जांच अभियान शुरू
अग्निशमन विभाग की डीएसपी तृप्ति सिंह ने बताया कि मुख्यालय के निर्देश पर जिले में व्यापक जांच अभियान शुरू किया गया है। सभी सरकारी भवनों के फायर ऑडिट के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं पाया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
सुरक्षा दावों की खुल रही परतें
मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद मोतिहारी में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। सबसे अहम सवाल यही है कि जब जिले के प्रमुख सरकारी भवनों का लंबे समय से फायर ऑडिट नहीं हुआ है, तो अन्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या होगी। यह मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
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जानकारी के अनुसार, मोतिहारी समाहरणालय का पिछले डेढ़ से दो वर्षों से फायर सेफ्टी ऑडिट नहीं कराया गया है। ऐसे में जिले की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक इमारत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
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समाहरणालय और सर्किट हाउस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
सूत्रों का कहना है कि समाहरणालय परिसर में आग लगने जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त अग्निशमन उपकरण और सुरक्षा संसाधनों का अभाव है। यही स्थिति सर्किट हाउस की भी बताई जा रही है, जहां मुख्यमंत्री, मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों का नियमित आगमन होता रहता है। फायर सेफ्टी ऑडिट और सुरक्षा मानकों के अनुपालन को लेकर दोनों भवनों की स्थिति संतोषजनक नहीं मानी जा रही है।
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निजी संस्थानों की जांच, लेकिन सरकारी भवन भी घेरे में
मुजफ्फरपुर हादसे के बाद प्रशासन निजी अस्पतालों और होटलों की जांच कर रहा है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि जब सरकारी भवनों में ही सुरक्षा मानकों का पूर्ण पालन नहीं हो रहा, तो निजी संस्थानों पर कार्रवाई कितनी प्रभावी होगी। शहर में कई अस्पताल और होटल ऐसी संकरी गलियों में संचालित हो रहे हैं, जहां सामान्य दिनों में भी आवागमन प्रभावित रहता है। ऐसे में किसी आपात स्थिति के दौरान अग्निशमन वाहनों का वहां तक पहुंचना बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
एनओसी जारी होने पर भी उठ रहे सवाल
जानकारों का कहना है कि जिले के कई संस्थानों को अग्निशमन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त है, जबकि वहां पर्याप्त निकासी मार्ग, अलग प्रवेश-निकास व्यवस्था और आधुनिक अग्निशमन उपकरणों जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। कुछ अस्पतालों के आईसीयू में भी मानक के अनुरूप फायर सेफ्टी व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आ रही है, जिससे मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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व्यापक जांच अभियान शुरू
अग्निशमन विभाग की डीएसपी तृप्ति सिंह ने बताया कि मुख्यालय के निर्देश पर जिले में व्यापक जांच अभियान शुरू किया गया है। सभी सरकारी भवनों के फायर ऑडिट के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं पाया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
सुरक्षा दावों की खुल रही परतें
मुजफ्फरपुर अग्निकांड के बाद मोतिहारी में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। सबसे अहम सवाल यही है कि जब जिले के प्रमुख सरकारी भवनों का लंबे समय से फायर ऑडिट नहीं हुआ है, तो अन्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या होगी। यह मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही और सार्वजनिक सुरक्षा दोनों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।