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Hindi News ›   Bihar ›   Munger News ›   Sheikhpura: Sonarwa Devi was established 300 years ago, devotees from other states also come for Darshan

Durga Puja 2024: 300 साल पहले हुई थी सोनरवा देवी की प्राण-प्रतिष्ठा, दूसरे राज्यों से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु

Fri, 04 Oct 2024 09:23 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शेखपुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शेखपुरा Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Fri, 04 Oct 2024 09:23 PM IST
सार

Navratri 2024: शेखपुरा में 300 साल पहले सोनरवा देवी की प्रतिष्ठा हुई थी। यहां बड़ी दुर्गा जी के दर्शन के लिए दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। जानें महत्व...।

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Sheikhpura: Sonarwa Devi was established 300 years ago, devotees from other states also come for Darshan
दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में सोनरवा देवी के दर्शन करने आते हैं श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शेखपुरा जिले में स्थित सोनरवा देवी (बड़ी दुर्गा जी) की प्रतिमा की स्थापना लगभग 300 साल पहले की गई थी। यह प्रतिमा आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है, जहां हर साल दुर्गा पूजा के दौरान जिले के अलावा दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। इस ऐतिहासिक मंदिर की नींव मड़पसौना मोहल्ला निवासी एक स्वर्णकार लक्ष्मी प्रसाद ने रखी थी। प्रारंभ में, प्रतिमा को माहुरी टोला में स्थापित किया गया, लेकिन इसके बाद इसे बनिया टोला और फिर कमिश्नरी बाजार में लाया गया। जहां से इसे 1953 से हर साल स्थापित किया जा रहा है।

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स्वर्णकार समाज करता है स्थापना और प्रबंध
कमिश्नरी बाजार में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने की जिम्मेदारी स्वर्णकार समाज की रही है। पन्नालाल सर्राफ ने 1953 में अपनी जमीन इस प्रतिमा की स्थापना के लिए दी थी। तब से लेकर आज तक स्वर्णकार समुदाय की अगुवाई में यह परंपरा चली आ रही है। इसके साथ, लक्ष्मण वर्मा, जगदीश सर्राफ, लखनलाल और ज्वाला प्रसाद वर्मा जैसे कई लोगों ने मंदिर के विकास और प्रबंधन में योगदान दिया।
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Sheikhpura: Sonarwa Devi was established 300 years ago, devotees from other states also come for Darshan
मां सोनरवा देवी की प्रतिमा का तेज लाल रूप - फोटो : अमर उजाला

मां दुर्गा की प्रतिमा का तेज लाल रूप
परंपरागत रूप से मां दुर्गा की प्रतिमा को तेज लाल रंग में स्थापित किया जाता है। हर साल दुर्गा पूजा के दौरान छठी तिथि को बेल का निमंत्रण और सातवीं तिथि को बेलभरनी का आयोजन होता है। इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं और पूजा के दौरान गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है।
 
मंदिर के अनुष्ठान और विसर्जन की अनोखी परंपरा
विसर्जन के दिन, मां दुर्गा की डोली को कहार द्वारा उठाया जाता है और पूरे शहर का भ्रमण कराया जाता है। यह डोली माहुरी टोला, खांड पर, चांदनी चौक, लालबाग, चकदीवान और बुधौली होते हुए गिरिहिंडा के खीरी पोखर में विसर्जित की जाती है। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालु कहार के रूप में अपनी सेवा देते हैं।
 
जानकारी के अनुसार, सोनरवा देवी को मनोकामना सिद्ध करने वाली देवी माना जाता है। हर साल हजारों श्रद्धालु यहां अपनी मन्नत मांगने और सुख-समृद्धि की कामना के लिए आते हैं। लोगों का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है। इसके अलावा मंदिर और पूजा की तैयारियों में भी श्रद्धालु बढ़-चढ़कर योगदान देते हैं, जिससे मंदिर का कायाकल्प होता रहता है।
 
पूजा समिति की जिम्मेदारी
वर्तमान में मंदिर की देखरेख और आयोजन की जिम्मेदारी पूजा समिति की है। इसमें अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा, सचिव उमेश प्रसाद वर्मा और कई अन्य सदस्य शामिल हैं। हर साल बड़ी धूमधाम से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहता है।

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