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बिहार: मुंगेर में बाढ़ के बीच सिंचाई बांध का स्लुइस गेट धंसा, रातोंरात कराई गई मरम्मत; 10-15 हजार लोग प्रभावित

Fri, 11 Sep 2026 08:55 AM IST
मुंगेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर Published by: मुंगेर ब्यूरो Updated Fri, 11 Sep 2026 08:55 AM IST
सार

मुंगेर में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। छह प्रखंडों की 38 पंचायतें प्रभावित हैं। इसी बीच जमालपुर के परहम पंचायत में सिंचाई बांध का स्लुइस गेट धंसने से पानी गांव की ओर बढ़ने लगा। सिंचाई विभाग ने रात में ही जेसीबी की मदद से बांध की मरम्मत कराई, लेकिन आसपास पानी का दबाव अब भी बना हुआ है। 

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Bihar Sluice Gate of Irrigation Dam Collapses Amid Floods in Munger ten to fifteen thousand people Affected
सिंचाई बांध का स्लुइस गेट धंसा - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मुंगेर जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। छह प्रखंडों की 38 पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ प्रभावित परिवार राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे प्लास्टिक के तंबू लगाकर रहने को मजबूर हैं। वहीं सदर प्रखंड की कुतलूपुर और जाफरनगर पंचायत के प्रभावित लोगों ने समाहरणालय के समीप डेरा डाल रखा है।
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इसी बीच आठ सितंबर की रात जमालपुर प्रखंड की ग्राम पंचायत परहम के प्रेम टोला हरदा स्थित सिंचाई बांध का स्लुइस गेट अचानक धंस गया। गेट धंसने के बाद बांध में बड़ी दरार बन गई और टाल क्षेत्र का पानी तेज रफ्तार से गांव की ओर आने लगा। इससे आसपास के ग्रामीणों में अफरातफरी मच गई। घटना की सूचना उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को दी गई। उनके निर्देश पर सिंचाई विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रात में ही जेसीबी की मदद से बांध की मरम्मत कराई गई।
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मरम्मत के बाद भी ग्रामीणों की चिंता बरकरार
बांध की मरम्मत होने के बावजूद ग्रामीणों की चिंता कम नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि बांध के आसपास अभी भी पानी लबालब है। ऐसे में दोबारा बांध पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीण खुद बारी-बारी से बांध की निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सिंचाई विभाग की ओर से बांध की निगरानी के लिए किसी अधिकारी या कर्मी की स्थायी प्रतिनियुक्ति नहीं की गई है। ग्रामीणों के अनुसार गंगा और टाल क्षेत्र के पानी के बीच सात-आठ गांव फंसे हुए हैं। इन गांवों में करीब 10 से 15 हजार की आबादी प्रभावित बताई जा रही है।
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पांच टोले बाढ़ की चपेट में
स्थानीय ग्रामीण सुभाष कुमार ने बताया कि बाढ़ के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। परहम पंचायत के करीब पांच टोले बाढ़ की चपेट में हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों और सिंचाई विभाग के प्रयास से रातोंरात बांध की मरम्मत संभव हो सकी, जिससे फिलहाल बड़ी परेशानी टल गई है। हालांकि, आसपास पानी का दबाव बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि परहम पंचायत का वार्ड संख्या एक पूरी तरह बाढ़ प्रभावित है, लेकिन अब तक प्रभावित परिवारों को पर्याप्त राहत सामग्री नहीं मिली है। उनका दावा है कि राहत सूची में कथित तौर पर गैर-बाढ़ प्रभावित लोगों के नाम शामिल कर उन्हें सामग्री दी जा रही है, जबकि वास्तविक प्रभावित परिवार राहत से वंचित हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से बांध की नियमित निगरानी, जरूरत पड़ने पर तत्काल मरम्मत तथा बाढ़ प्रभावित परिवारों को पॉलीथिन शीट, सूखा राशन और अन्य जरूरी राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है।
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