बिहार : पुलिस का काम करने लगे अपराधी; क्राइम सीरियल की तरह मौका-ए-वारदात पर नाट्य रूपांतरण का राज खुला
Bihar Police : बड़ी वारदात में पुलिस तथ्यों का मिलान करने के लिए आपराधिक सीन को री-क्रिएट करती है। क्राइम पर बनने वाले धारावाहिकों में भी यही दिखाया जाता है। लेकिन, अब अपराधी भी नाट्य रूपांतरण कर पुलिस को भटकाने लगे हैं।
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देश में कहीं कोई बहुत बड़ी आपराधिक वारदात हो तो आरोपी के पकड़े जाने पर जुर्म साबित करने या कोई सुराग नहीं मिल पाने पर- दोनों ही स्थिति में पुलिस घटना का सीन री-क्रिएट करती है। लेकिन, अब अपराधी भी इसमें खिलाड़ी हो गए हैं। एक शव की हत्या दिखाने के लिए नाट्य रूपांतरण ऐसा किया गया कि बिहार पुलिस भी चकरा गई। पुलिस को इस नाट्य रूपांतरण को 'नाटक' साबित करने के लिए उस सरकारी अस्पताल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जहां फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं। वैसे, बाकी सबूत सामने आ चुके हैं। गवाह भी। फिलहाल नाट्य रूपांतरण में जिसे फंसाया गया, उस शख्स को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
जिस अस्पताल में पहले गए, बताया- गिरने से मौत; पुलिस जिप्सी नहीं रोकी
19 सितंबर को सूर्यास्त के बाद की यह घटना है। सीसीटीवी फुटेज में दिख रहा है कि एक छोटे परिसर में चलने वाले अस्पताल में कुछ लोग ई-रिक्शे पर एक शख्स को लादकर लाते हैं। लाने का समय शाम 6:48 बजे का है। जिस अस्पताल में लाया गया, वहां के डॉ. लक्ष्मीकांत प्रसाद वर्मा ने बताया- "कई लोग उस व्यक्ति को लेकर आए थे। व्यक्ति की मौत पहले ही हो चुकी थी, इसलिए विशेषज्ञ डॉक्टर को बुलाने की जरूरत नहीं दिखी। चोट थी, लेकिन गोली लगने जैसे चर्चा नहीं थी। खून भी बहुत नहीं बह रहा था, इसलिए पुलिस को बताने की जरूरत नहीं लगी। जो लोग लेकर आए थे, दो मिनट बाद लौट गए।" इस अंतराल का प्रमाण भी सीसीटीवी में दर्ज है कि 6:50 बजे ई-रिक्शा पर लोग शव को लेकर लौट गए। आगे पुलिस जिप्सी थी, उसे नहीं टोका।
इस अस्पताल से शव वापस लेकर लोग लौटे। फिर उस जमीन पर पहुंचे, जिसपर मृतक के कब्जे को चार दिन पहले अपर समाहर्ता के न्यायालय ने अवैध बताया था। इस जमीन पर शव को रखा गया, ताकि मौत को हत्या बताकर कुछ लोगों को फंसाया जा सके। हत्या का नाट्य रूपांतरण किया गया और फिर शोर-कोहराम से भीड़ जुटी। किसी ने गोली की आवाज नहीं सुनी, लेकिन गोली मारने की बात बताई गई। घर वाले ही प्रत्यक्षदर्शी बने। पुलिस FIR में थाने को सूचना रात 10:30 बजे मिली, हालांकि आंतरिक रिकॉर्ड में ERSS के जरिए पहली सूचना रात 8:15 बजे मिलने की जानकारी भी है। दूसरी तरफ, प्राथमिकी के लिए दिए आवेदन को पढ़ें तो घटना का समय पहले 7:45 बजे लिखा गया और फिर उसे काटकर 6:45 बजे किया गया। यह तो हुआ ही, लेकिन आवेदन में हेरफेर करने-करवाने वाले ने यह ध्यान नहीं दिया कि किसी सीसीटीवी फुटेज में 6:48 बजे मौत की पुष्टि का प्रमाण बाद में सामने आ सकता है। नाट्य रूपांतरण करते समय यह भी ध्यान नहीं रखा गया कि 6:45 बजे गोली मारी जाए, फिर घटनास्थल पर ई-रिक्शा लिए कोई खड़ा रहे और वह गोली लगते ही तीन मिनट के अंदर शख्स को उठाकर 400-500 मीटर की दूरी तक पहुंचा दे।
अब जानिए, नाट्य रूपांतरण का खेल कहां खेला गया, किरदार कौन
यह घटना बिहार के बेगूसराय जिले में हुई। कला-संस्कृति के साथ यह जिला अपराध के लिए भी चर्चित रहा है। फिल्में तक बन चुकी हैं। यह घटना इसी जिले की है। अनुमंडल है बखरी। थाना भी बखरी। बेगूसराय जिले में बखरी की पहचान कला-संस्कृति और धर्मस्थल के लिए ही थी। बीच सड़क पर जब कपड़ा कारोबारी को दौड़ाकर मारा गया, तब पहली बार यह अपराध के लिए चर्चा में आया। फिर अपराधियों का राजनीतिकरण यहां भी हुआ। ऐसा कि सरकार के बड़े नुमाइंदों की तस्वीर भी अपराधियों के साथ नजर आने लगी। ताजा मामला भी इन्हीं सारी बातों से घिरा है। घिरा नहीं होता तो पुलिस को और साफ-साफ सीसीटीवी फुटेज मिला गया होता इस अस्पताल का। लोग बता रहे कि वारदात की रात इस अस्पताल के पास से एक सीसीटीवी उखाड़कर हटाया गया। जिस सीसीटीवी में अस्पताल का घटनाक्रम कैद हुआ, वह पुलिस रिकॉर्ड में है। पुलिस शुरुआत से मामले को संदिग्ध मान रही थी। अब सीसीटीवी में दिख रहे अस्पताल की जगह प्राथमिकी आवेदन में पुलिस को दूसरे अस्पताल से मृत घोषित किए जाने की जानकारी दिए जाने के कारण शक और गहरा गया है। अब चूंकि एसपी मनीष कुमार खुद मामले पर नजर रख रहे हैं तो आवेदन में हेरफेर से लेकर सीसीटीवी रिकॉर्ड के एंगल तक पुलिस पहुंच चुकी है।
मृतक के परिजनों ने क्या कहा?
मृतक का नाम लालो महतो था। मृतक के परिजनों ने पुलिस को जानकारी दी कि लालो महतो के दरवाजे पर उनका जानी दुश्मन मनोज महतो एक आदमी के साथ आया और एक लोटा पानी मांगा। लालो महतो लोटा देने लगे तो मनोज महतो ने गोली मार दी। मृतक के परिजनों ने मनोज महतो को पहचानने की बात पुलिस को बताई। साथ ही परिवार के लोगों को ही बाकी गवाह भी बनाया।
आरोपी के परिजनों ने क्या कहा?
पुलिस पहले ही मामले को संदिग्ध मान रही, लेकिन गोली मारने का आरोप मनोज महतो पर लगा तो पुलिस ने अगले दिन उसे गिरफ्तार कर लिया। अब मनोज महतो के परिजनों का कहना है कि जानी दुश्मन ने घर पहुंचकर पानी मांगा और लालो महतो पानी देने भी लगा, यह एक ही बात सबकुछ साफ कर दे रही है। इसके बावजूद पुलिस ने मनोज को गिरफ्तार कर लिया है। वैज्ञानिक अनुसंधान कराना था तो शव का पोस्टमार्टम किसी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कराया जाता, जहां कोई विशेषज्ञ यह पुष्टि कर सके कि जीवित शख्स की हत्या की गई या हादसे में मृत व्यक्ति की हत्या का आरोप लगा दिया गया।
पुलिस तकनीकी अनुसंधान कर रही
बेगूसराय एसपी मनीष के अनुसार- इस घटना में बहुत कुछ संदेहास्पद लग रहा है, इसलिए किसी भी एंगल को छोड़ा नहीं जा रहा है। मोबाइल लोकेशन से लेकर सीसीटीवी फुटेज तक की जांच हो रही है। शव पर दिखे निशान से लेकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर उसके मिलान तक की जांच होगी। अभी किसी निर्णय तक नहीं पहुंचा जा सकता है। जिस आरोपी पर गोली मारने का आरोप लगाया गया था और उसकी पहचान बताई गई थी, उसे गिरफ्तार किया गया है।