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बिहार: दूसरे के टीईटी रोल नंबर पर बन गए शिक्षक! 11 साल पुराने प्रमाण-पत्र ने खोला फर्जीवाड़ा, दो पर एफआईआर

Sat, 05 Sep 2026 11:18 AM IST
मुंगेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय Published by: मुंगेर ब्यूरो Updated Sat, 05 Sep 2026 11:18 AM IST
सार

बेगूसराय के बखरी प्रखंड में शिक्षक नियोजन से जुड़े कथित फर्जी टीईटी प्रमाणपत्र का मामला सामने आया है। निगरानी विभाग की जांच में एक शिक्षक के प्रमाणपत्र पर दर्ज रोल नंबर दूसरे अभ्यर्थी के नाम का मिला, जबकि वास्तविक रिकॉर्ड में वह अभ्यर्थी 55 अंक के साथ अनुत्तीर्ण थी। मामले में दो शिक्षकों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

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Bihar Appointed Teachers Using Others TET Roll Numbers 11 Year Old Certificate Exposes Fraud FIR Against Two
निगरानी विभाग - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बेगूसराय के सरकारी स्कूल में शिक्षक की नौकरी हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी टीईटी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में एक शिक्षक के प्रमाणपत्र का रोल नंबर दूसरे अभ्यर्थी के नाम पर दर्ज मिला। जांच के बाद बखरी थाने में दो शिक्षकों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। कार्रवाई की खबर सामने आते ही शिक्षक महकमे में हड़कंप मच गया है। मामला बखरी प्रखंड के मोहनपुर पंचायत के दो नवसृजित प्राथमिक विद्यालयों से जुड़ा है। प्राथमिकी में कारीलाल सिंह विद्यालय के शिक्षक अपरजीत कुमार और साधुदेव सदा टोल विद्यालय के शिक्षक राजीव रंजन पांडेय को नामजद किया गया है।
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प्रमाणपत्र की जांच हुई तो खुल गया बड़ा राज
निगरानी विभाग की जांच में अपरजीत कुमार के नियोजन से जुड़े वर्ष 2011 के बीईटीईटी अंकपत्र को सत्यापन के लिए बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना भेजा गया था। दस्तावेज में रोल नंबर 1903112228, सीरियल नंबर 011321 और 84 अंक के साथ उत्तीर्ण होने का उल्लेख था, लेकिन बोर्ड से मिले सत्यापन प्रतिवेदन में चौंकाने वाली विसंगति सामने आई। उक्त रोल नंबर अपरजीत कुमार का नहीं, बल्कि बुलबुल कुमारी नाम की अभ्यर्थी का निकला।
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84 अंक वाले प्रमाणपत्र का असली रिकॉर्ड 55 अंक और फेल
जांच रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित रोल नंबर पर बुलबुल कुमारी, पिता विश्वनाथ धारी का रिकॉर्ड दर्ज था। उनका वर्ष 2011 का परिणाम 55 अंक के साथ अनुत्तीर्ण बताया गया। यानी जांच में एक ऐसा दस्तावेज सामने आया, जिसमें शिक्षक के नाम पर 84 अंक और उत्तीर्ण दर्ज था, जबकि उसी रोल नंबर का वास्तविक रिकॉर्ड दूसरे अभ्यर्थी के नाम पर था और वह अभ्यर्थी परीक्षा में असफल थी।
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2015 में मिली थी पंचायत शिक्षक की नौकरी
निगरानी रिपोर्ट के अनुसार, अपरजीत कुमार का वर्ष 2015 में पंचायत शिक्षक के रूप में नियोजन हुआ था। वहीं, राजीव रंजन पांडेय भी मोहनपुर पंचायत के एक नवसृजित विद्यालय में शिक्षक के रूप में नियोजित हुए थे। निगरानी विभाग ने आरोप लगाया है कि फर्जी अंकपत्र को वास्तविक दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल कर सरकारी शिक्षक पद का लाभ लिया गया। मामले में अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

अब जांच की आंच कहां तक पहुंचेगी?
एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किसने कराया, दस्तावेज में बदलाव कैसे हुआ और इस पूरे कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस अब प्राथमिकी के आधार पर आगे की कार्रवाई और साक्ष्यों की जांच करेगी। करीब एक दशक से अधिक पुराने प्रमाणपत्र की जांच में सामने आए इस मामले ने शिक्षक नियोजन में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
 
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